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By: Ravindra Sikarwar

उज्जैन जिले के नागदा क्षेत्र में एक साहसी और त्वरित पुलिस कार्रवाई ने एक युवक की जान बचा ली। कथित रूप से आत्महत्या के इरादे से फांसी लगाने की कोशिश करने वाले युवक को थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी ने न केवल समय पर फंदे से उतारा, बल्कि कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) की तकनीक से उसे होश में लाकर जीवनदान दिया। यह घटना पुलिस प्रशिक्षण की उपयोगिता और मानवीय संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण बन गई है।

घटना उस समय की है जब युवक के पिता अचानक थाने पहुंचे और हांफते-हांफते थाना प्रभारी को बताया कि उनका बेटा घर में फंदे से लटक गया है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए टीआई अमृतलाल गवरी ने बिना देरी किए तुरंत कार्रवाई की। वे अपने दल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और बंद कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुए। वहां का दृश्य देखकर परिजन सदमे में थे और युवक को मृत समझकर रोने-पीटने लगे थे। युवक का शरीर फंदे पर निर्जीव सा लटक रहा था।

लेकिन टीआई गवरी ने हार नहीं मानी। उन्होंने फौरन युवक को रस्सी से नीचे उतारा और जमीन पर लिटाया। परिजनों के विलाप के बीच उन्होंने शांत मन से अपना पुलिस प्रशिक्षण याद किया और सीपीआर देना शुरू कर दिया। छाती पर दबाव डालकर और कृत्रिम सांस देने की प्रक्रिया कुछ ही पलों में शुरू हो गई। आश्चर्यजनक रूप से, मात्र कुछ सेकंड बाद युवक के शरीर में हलचल दिखाई देने लगी। उसकी सांसें लौटने लगीं और नब्ज महसूस होने लगी। यह देखकर सभी राहत की सांस लेने लगे।

समय का महत्व समझते हुए पुलिस ने बिना इंतजार किए अपने वाहन से युवक को निकटतम अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया और जांच के बाद पुष्टि की कि टीआई द्वारा मौके पर ही दिया गया सीपीआर युवक की जान बचाने में सबसे बड़ा कारण बना। यदि कुछ मिनट की भी देरी होती तो ब्रेन डैमेज या मौत हो सकती थी। डॉक्टरों के अनुसार, युवक की हालत स्थिर होने के बाद उसे कुछ दिनों की निगरानी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और घर लौट चुका है।

इस पूरी घटना में नगर सुरक्षा समिति के सदस्य राजेश मोरवाल ने भी पुलिस की मदद की। उन्होंने मौके पर पहुंचकर परिजनों को संभाला और आवश्यक सहयोग प्रदान किया। टीआई गवरी ने बाद में बताया कि पुलिस विभाग के नियमित प्रशिक्षण सत्रों में सीपीआर और प्राथमिक चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जाती है, जो ऐसी आपात स्थितियों में बेहद काम आती है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में नियमित गश्त और स्थानीय लोगों से मिलने वाली सूचनाओं के कारण वे तुरंत कार्रवाई कर सके।

यह घटना न केवल पुलिस की सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि आत्महत्या जैसे कदम से पहले मदद मांगना कितना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक तनाव, पारिवारिक कलह या मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं अक्सर ऐसे प्रयासों का कारण बनती हैं। ऐसे में पुलिस और समाज की संवेदनशीलता जीवन बचा सकती है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा समय-समय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना हो रही है, क्योंकि इसी ट्रेनिंग ने एक परिवार को टूटने से बचा लिया।

नागदा पुलिस थाने की इस कार्रवाई की क्षेत्र में खूब चर्चा हो रही है। लोग टीआई गवरी को नायक बता रहे हैं और उनकी तारीफ कर रहे हैं। यह घटना अन्य पुलिसकर्मियों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है कि ड्यूटी के साथ-साथ मानवीयता और तकनीकी ज्ञान का उपयोग कितना महत्वपूर्ण है। अंत में, युवक की नई जिंदगी इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर सही कदम पूरे जीवन को बदल सकता है।

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