By: Ravindra Sikarwar
उज्जैन: मध्य प्रदेश के धार्मिक नगरी उज्जैन में एक ऐसी घटना सामने आई है, जो मानवता को शर्मसार करने वाली है। एक नशे की लत में डूबी मां ने अपने दो छोटे-छोटे बच्चों, महज दो और तीन साल के मासूमों को देवास गेट बस स्टैंड पर अकेला छोड़ दिया और खुद शराब पीने चली गई। जब स्थानीय लोगों ने बच्चों से पूछताछ की, तो उन्होंने निश्चिंत भाव से कहा, “मम्मी दारू पीने गई है।” यह दिल दहला देने वाली बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिससे नेटिजंस में गुस्सा और दुख की लहर दौड़ गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, लेकिन मां की तलाश अभी जारी है। यह घटना न केवल मादक पदार्थों की लत के खतरों को उजागर करती है, बल्कि बाल सुरक्षा और मातृत्व की जिम्मेदारियों पर भी सवाल खड़े करती है।
घटना सुबह करीब साढ़े सात बजे की बताई जा रही है। देवास गेट क्षेत्र में स्थित व्यस्त बस स्टैंड पर दो छोटे बच्चे अकेले घूमते नजर आए। वे भूखे-प्यासे लग रहे थे और आसपास के दुकानदारों व यात्रियों से कुछ खाने को मांग रहे थे। एक स्थानीय निवासी ने जब उनसे बात की, तो बच्चे ने बेफिक्र होकर बताया कि उनकी मां शराब पीने चली गई है। बच्चे इतने छोटे थे कि उन्हें अपनी परिस्थिति का अंदाजा भी नहीं था। जब पूछा गया कि वे कहां रहते हैं, तो दोनों ने एक साथ कहा, “मम्मी के पास।” यह वीडियो, जो किसी ने मोबाइल पर रिकॉर्ड किया, तुरंत सोशल मीडिया पर फैल गया। इसमें बच्चे के चेहरे पर मासूमियत साफ झलक रही थी, लेकिन उनकी आंखों में एक अनजानी उदासी भी छिपी हुई थी। वीडियो देखकर हजारों लोग भावुक हो गए और कमेंट बॉक्स में पुलिस व प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग करने लगे।
पुलिस को सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। ड्राइवर विकास भाटी और कांस्टेबल तरुण दंडोतिया ने आसपास के लोगों से पूछताछ की। पता चला कि बच्चों की मां लंबे समय से शराब की आदी है और अक्सर बच्चों को लावारिस छोड़ देती है। थाना इंस्पेक्टर अनीला परेशोर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि मां का नाम राधा (काल्पनिक नाम, गोपनीयता हेतु) है, जो पास के झुग्गी इलाके में रहती है। वह दैनिक मजदूरी करती है, लेकिन नशे की वजह से परिवार की जिम्मेदारी निभा पाने में असमर्थ हो चुकी है। बच्चों के पिता के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली, संभवतः वह परिवार से अलग हो चुके हैं। पुलिस ने बच्चों को महिला थाने ले जाकर भोजन कराया और चिकित्सकीय जांच कराई। दोनों बच्चे स्वस्थ हैं, लेकिन मानसिक आघात से गुजर रहे हैं। फिलहाल, उन्हें बाल कल्याण समिति के हवाले कर दिया गया है, जहां वे सुरक्षित रहेंगे।
यह घटना उज्जैन जैसे शहर में एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है, जहां महाकालेश्वर मंदिर की भक्ति की धारा बहती है। शहर में पर्यटकों व श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है, लेकिन सामाजिक समस्याएं भी कम नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि शराब की लत महिलाओं में बढ़ रही है, जो परिवारों को बर्बाद कर रही है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया, “ऐसी घटनाएं गरीबी और जागरूकता की कमी का परिणाम हैं। सरकार को नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ानी चाहिए और माताओं के लिए विशेष काउंसलिंग कार्यक्रम चलाने चाहिए।” वायरल वीडियो ने न केवल स्थानीय स्तर पर बहस छेड़ दी है, बल्कि राष्ट्रीय मीडिया में भी यह सुर्खियां बटोर रहा है। कई एनजीओ ने आगे आकर बच्चों की मदद की पेशकश की है, जबकि सोशल मीडिया यूजर्स ने #SaveUjjainKids जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए।
पुलिस ने मां के खिलाफ बाल परित्याग और लापरवाही का मामला दर्ज किया है। एसपी सिद्धार्थ चौधरी ने कहा, “हमारी टीमें मां की तलाश में जुटी हैं। एक बार गिरफ्तार होने पर उसे काउंसलिंग और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, इलाके में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।” यह घटना याद दिलाती है कि कैसे नशा एक परिवार को चंद मिनटों में तबाह कर सकता है। बच्चे, जो समाज का भविष्य हैं, ऐसी लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर साल हजारों बच्चे माता-पिता की लत के कारण सड़कों पर भटकते हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और मध्य प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
इस घटना से सबक लेते हुए, समाज को सोचना होगा कि मातृत्व की पवित्रता को कैसे बचाया जाए। स्कूलों और समुदायों में नशा विरोधी शिक्षा को मजबूत करना जरूरी है। उज्जैन जिला प्रशासन ने घोषणा की है कि अगले महीने एक विशेष ड्राइव चलाई जाएगी, जिसमें शराब की लत से जूझ रही महिलाओं को चिकित्सकीय सहायता दी जाएगी। बच्चे अब सुरक्षित हैं, लेकिन उनके दिलों के जख्म भरने में समय लगेगा। यह वीडियो न केवल एक घटना है, बल्कि एक चेतावनी है – नशे के चक्रव्यूह से निकलना ही होगा, वरना और कितने मासूम बर्बाद होंगे?
सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। एक यूजर ने लिखा, “ये बच्चे तो बोल पाए, कितने ऐसे हैं जो चुपचाप बिलखते रह जाते हैं?” दूसरी ओर, कुछ ने पुलिस की तारीफ की कि उन्होंने इतनी तेजी से कार्रवाई की। कुल मिलाकर, यह घटना भारतीय समाज की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है, जहां आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव लत को जन्म देते हैं। उम्मीद है कि यह प्रकरण बदलाव का सूत्रपात साबित हो। बच्चों का भविष्य संभालना हम सबकी जिम्मेदारी है।
