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Report by: Yogendra Singh

Ujjain : धर्म और संस्कृति की नगरी उज्जैन एक बार फिर वैश्विक पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ रही है। ‘विक्रमोत्सव-2026’ के पावन अवसर पर कालिदास अकादमी के अभिरंग सभागार में “इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ एंशिएंट स्प्लेंडर” (प्राचीन वैभव का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव) का भव्य आगाज़ हो चुका है। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ और मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह अनूठा महोत्सव 13 मार्च से शुरू होकर 17 मार्च 2026 तक चलेगा।

25 से अधिक देशों की सांस्कृतिक झलक

Ujjain इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैश्विक स्वरूप है। भारत के गौरवशाली इतिहास के साथ-साथ विश्व की प्राचीन सभ्यताओं को पर्दे पर उतारने के लिए 25 से अधिक देशों की फिल्मों का चयन किया गया है। इसमें रूस, फ्रांस, इंडोनेशिया, मॉरीशस, यूके, जर्मनी, और वेनेजुएला जैसे देश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को फिल्मों के माध्यम से प्रदर्शित कर रहे हैं। महोत्सव में न केवल फीचर फिल्में, बल्कि वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) और शॉर्ट फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जा रहा है, जो दर्शकों को प्राचीन वैभव से रूबरू करा रही हैं।

पहले दिन की झलक: ‘राजा हरिश्चंद्र’ से ‘सम्राट विक्रमादित्य’ तक

Ujjain महोत्सव के उद्घाटन दिवस यानी 13 मार्च को भारतीय सिनेमा की क्लासिक पौराणिक फिल्मों ने दर्शकों का मन मोह लिया। ‘जय महादेव’, ‘भारत मिलाप’ और भारतीय सिनेमा की नींव मानी जाने वाली ‘राजा हरिश्चंद्र’ जैसी फिल्मों का प्रदर्शन हुआ। विशेष आकर्षण के रूप में उज्जैन के ’84 महादेव’ और ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। इसके साथ ही वियतनाम के प्राचीन ‘म्यसोन शिव मंदिर’ पर आधारित फिल्म ने यह दर्शाया कि भारतीय संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी और व्यापक हैं।

आज के प्रमुख आकर्षण: 14 मार्च का शेड्यूल

Ujjain महोत्सव के दूसरे दिन आज यानी 14 मार्च को भी सिनेमा प्रेमियों के लिए यादगार फिल्मों की लंबी सूची है:

  • सिल्वर स्क्रीन की अमर फिल्में: 1965 की प्रसिद्ध ‘महाभारत’, ‘हर हर महादेव’ और 1943 की क्लासिक ‘राम राज्य’ का प्रदर्शन किया जा रहा है।
  • क्षेत्रीय सिनेमा का संगम: दक्षिण भारतीय भाषाओं सहित गुजराती में ‘बलराम श्री कृष्ण’, तमिल में ‘विक्रम थुई थान कांडा’ और कन्नड़-तेलुगु की पौराणिक फिल्में विविधता पेश कर रही हैं।
  • वैश्विक सिनेमा: इंडोनेशिया की ‘द हाईलैंड वैनगार्ड’ और क्यूबा की ‘साचा’ जैसी फिल्में अंतर्राष्ट्रीय आकर्षण का केंद्र हैं।
  • डॉक्यूमेंट्री: ‘द्वादश ज्योतिर्लिंग’ और लाओस के ‘वाट फोउ’ मंदिर पर आधारित जानकारीपूर्ण फिल्में दिखाई जा रही हैं।

समय और स्थान: यह महोत्सव 17 मार्च तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक कालिदास अकादमी के अभिरंग सभागार में निःशुल्क आयोजित किया जा रहा है।

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