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By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के दो साल पूरे हो चुके हैं। यह अवधि न केवल प्रशासनिक उपलब्धियों की है, बल्कि एक ऐसे नेतृत्व की है जो सत्ता के सिंहासन से उतरकर आम जनता की चौखट पर पहुंचता है। डॉ. यादव की कार्यशैली ने प्रदेश की राजनीति को नया रंग दिया है, जहां शासन का मतलब केवल नीतियां और योजनाएं लागू करना नहीं, बल्कि जनता की भावनाओं को समझना और उनकी समस्याओं में साथ खड़ा होना है। इन दो वर्षों में उन्होंने साबित किया कि एक नेता की असली ताकत कागजी रिपोर्टों में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में बसने वाले भरोसे में होती है।

मुख्यमंत्री बनते ही डॉ. यादव ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी – जनता तक सीधे पहुंचना। वे मानते हैं कि सरकार की सफलता का पैमाना फाइलों में बंद आंकड़े नहीं, बल्कि गांव-गांव, शहर-शहर में लोगों की मुस्कान है। उनकी दिनचर्या में जनता से मुलाकात एक अनुष्ठान की तरह है। चाहे गांव की चौपाल हो, खेत की मेढ़ हो या शहर की व्यस्त सड़कें, वे खुद वहां पहुंचकर लोगों की बात सुनते हैं। यह दौरा मात्र औपचारिकता नहीं, बल्कि समस्याओं का त्वरित हल निकालने का माध्यम बन जाता है। उनकी यह शैली पारंपरिक राजनीति से बिल्कुल अलग है, जहां नेता दूर से निर्देश देते हैं, जबकि डॉ. यादव जमीन पर उतरकर जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाते हैं।

इन दो वर्षों में जनसुनवाई कार्यक्रम उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया है। यह कोई साधारण शिकायत निवारण तंत्र नहीं, बल्कि लोकतंत्र का जीता-जागता रूप है। जनसुनवाई में वे घंटों बैठकर लोगों की फरियाद सुनते हैं – कभी किसी बुजुर्ग की पेंशन की समस्या, कभी किसान के मुआवजे की शिकायत, तो कभी किसी युवती की शिक्षा या नौकरी संबंधी दिक्कत। उनका धैर्य और संवेदना देखते ही बनती है। कई बार तो वे मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश देकर समाधान करा देते हैं। इससे न केवल व्यक्ति को राहत मिलती है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही की भावना जागृत होती है। जनता को लगता है कि उनकी आवाज सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच रही है और उस पर कार्रवाई भी हो रही है। यह विश्वास लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है।

ग्रामीण क्षेत्रों में डॉ. यादव का सक्रिय नेतृत्व विशेष रूप से सराहनीय है। वे बार-बार गांवों का दौरा करते हैं, किसानों के खेतों में जाकर फसल की स्थिति देखते हैं, सिंचाई की व्यवस्था समझते हैं और बीज-खाद की उपलब्धता पर चर्चा करते हैं। एक किसान के साथ खेत में बैठकर बात करना या सड़क और स्कूल की समस्याओं पर ग्रामीणों से राय लेना – ये दृश्य आम हो गए हैं। इससे नीतियां केवल भोपाल के दफ्तरों में नहीं बनतीं, बल्कि गांव की मिट्टी से जुड़कर आकार लेती हैं। ग्रामीण विकास योजनाएं और महिला स्व-सहायता समूहों को मजबूती देने के कई फैसले इसी संवाद का नतीजा हैं।

महिलाओं और युवाओं के प्रति उनकी विशेष संवेदना इन दो वर्षों की सबसे चमकदार उपलब्धि है। लाड़ली बहना योजना को उन्होंने न केवल जारी रखा, बल्कि और विस्तार दिया। इस योजना से लाखों महिलाओं को आर्थिक सहायता मिली, जिसने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया और सामाजिक सम्मान बढ़ाया। डॉ. यादव महिलाओं को मात्र लाभार्थी नहीं मानते, बल्कि समाज की रीढ़ की तरह देखते हैं। इसी सोच से महिला सशक्तिकरण के कई कार्यक्रम चलाए गए। युवाओं के लिए भी वे खेल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर विशेष ध्यान देते हैं। स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट में युवाओं को प्रोत्साहित करना उनकी प्राथमिकता रही है।

संकट की घड़ियों में डॉ. यादव की उपस्थिति जनता को सबसे ज्यादा मजबूती देती है। चाहे प्राकृतिक आपदा हो, दुर्घटना हो या कोई महामारी का प्रसार, वे तुरंत मौके पर पहुंचते हैं। पीड़ितों के बीच खड़े होकर सांत्वना देना, घायलों का हालचाल लेना और राहत कार्यों की निगरानी करना – यह उनकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। अस्पतालों में अचानक निरीक्षण, निर्माण कार्यों की प्रगति देखना या ट्रैफिक और सफाई व्यवस्था पर नजर रखना, सबमें उनकी सक्रियता दिखती है।

इन दो वर्षों में मध्य प्रदेश ने कई चुनौतियां देखीं – बाढ़, सूखा, दुर्घटनाएं और अन्य आपदाएं। लेकिन हर बार मुख्यमंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत हस्तक्षेप ने स्थिति को संभाला। आर्थिक सहायता, चिकित्सा सुविधाएं और पुनर्वास के कामों में उनकी संवेदना ने जनता का मनोबल बढ़ाया। शहरों में भी उनकी नजर हर छोटी-बड़ी समस्या पर रहती है – फ्लायओवर की प्रगति, बाजारों में व्यापारियों की दिक्कतें या सार्वजनिक सुविधाओं का रखरखाव। बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण करना उनकी शैली का हिस्सा है, जो प्रशासन को हमेशा अलर्ट रखता है।

डॉ. मोहन यादव का यह कार्यकाल साबित करता है कि शासन में मानवीयता और संवाद का कितना महत्व है। विकास के आंकड़े तो कई सरकारें गिना सकती हैं, लेकिन जनता के दिल में जगह बनाना दुर्लभ है। उन्होंने यह कर दिखाया। प्रदेश अब केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि एक परिवार की तरह एकजुट महसूस करता है। जनता उन्हें दूर का नेता नहीं, अपना साथी मानती है – जो खुशी में शामिल होता है और दुख में साथ खड़ा रहता है।

ये दो साल विश्वास की मजबूत इमारत खड़ी करने के साल रहे हैं। डॉ. यादव ने दिखाया कि यदि नेता जनता की नब्ज पकड़कर चले, उनकी पीड़ा समझे और समाधान में ईमानदारी दिखाए, तो राज्य न केवल प्रगति करता है, बल्कि एक मजबूत सामाजिक बंधन से जुड़ता है। मध्य प्रदेश की जनता आज गर्व से कह सकती है कि उनकी सरकार भरोसेमंद है, संवेदनशील है और पूरी तरह उनकी अपनी है। यह नेतृत्व का नया मॉडल है, जो आने वाले समय के लिए प्रेरणा बनेगा।

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