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by-Ravindra Sikarwar

जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) परिषद ने कर व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करते हुए दो-स्लैब वाली नई संरचना को मंजूरी दे दी है, जिसमें 5% और 18% की दरें होंगी। उम्मीद है कि इस फैसले से आम आदमी के लिए कई सामान सस्ते हो जाएंगे। ये बदलाव 22 सितंबर, 2025 से लागू होने वाले हैं। राजनीतिक दलों, व्यवसायों और आम जनता के एक बड़े वर्ग ने इस कदम का व्यापक रूप से स्वागत किया है।

नई दो-स्लैब संरचना का विवरण:
अब तक, भारत में जीएसटी की चार मुख्य दरें थीं: 5%, 12%, 18% और 28%। इस बदलाव के बाद, 12% और 28% की दरों को हटाकर उन्हें क्रमशः 18% और 5% की श्रेणी में लाया गया है।

  • 5% स्लैब: आवश्यक वस्तुओं और रोजमर्रा के उपयोग के सामान, जैसे कि खाद्य पदार्थ, दवाएँ और कुछ घरेलू उत्पाद, पहले की तरह 5% जीएसटी दर पर बने रहेंगे या इस नई श्रेणी में लाए जाएंगे।
  • 18% स्लैब: 12% और 18% की पिछली दरों में आने वाले अधिकांश सामानों को अब 18% के नए स्लैब में रखा जाएगा। इसके अलावा, 28% वाले लग्जरी सामानों में से कुछ को भी 18% के दायरे में लाया जा सकता है, जिससे वे सस्ते हो जाएंगे।

आम आदमी पर प्रभाव:
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आम आदमी के लिए कई वस्तुएं और सेवाएं सस्ती हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, जो वस्तुएं पहले 12% के स्लैब में थीं, वे अब 18% के दायरे में आ जाएंगी। लेकिन, 28% के स्लैब में आने वाले कई सामान, जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक्स और कुछ घरेलू उपकरण, अब 18% पर आ सकते हैं। इससे इन वस्तुओं की कीमतें कम होंगी।

स्वागत और चुनौतियाँ:
इस कदम का राजनीतिक दलों और व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह कर व्यवस्था को सरल बनाएगा और अनुपालन को आसान करेगा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि दरों को कम करने से सरकार के राजस्व पर क्या असर पड़ेगा। इसके अलावा, इस नई व्यवस्था में वस्तुओं को सही स्लैब में वर्गीकृत करना एक चुनौती हो सकती है। सरकार का कहना है कि वे इस बदलाव को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।

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