By: Ravindra Sikarwar
जर्मनी की मशहूर केसलर ट्विन्स — एलिस केसलर और एलेन केसलर — ने 18 नवंबर 2025 को एक साथ असिस्टेड सुसाइड के माध्यम से दुनिया को अलविदा कह दिया। 1950–60 के दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली ये बहनें जीवन के हर पड़ाव में एक-दूसरे की परछाईं बनी रहीं और अंत में मृत्यु भी उन्होंने साथ ही चुनी।
कौन थीं केसलर बहनें?
एलिस और एलेन केसलर का जन्म 20 अगस्त 1936 को नाजी जर्मनी में हुआ था। दोनों ने बैले डांसिंग में प्रशिक्षण लिया और किशोरावस्था में परिवार के साथ पूर्वी जर्मनी से पश्चिमी जर्मनी चली गईं।
1950 के दशक में उन्होंने पेशेवर मनोरंजन करियर की शुरुआत की और जल्द ही यूरोप व अमेरिका की लोकप्रिय हस्तियां बन गईं।
- 1963 में अमेरिकी टीवी शो द रेड स्केल्टन ऑवर में धमाकेदार परफॉर्मेंस से उन्होंने खास पहचान बनाई।
- इसी समय वे लाइफ मैगज़ीन के कवर पर नजर आईं, जिस पर उन्हें “जर्मनी से सनसनी” कहा गया।
- 1960 के दशक में वे इटली पहुंचीं और वहां की प्लेबॉय मैगज़ीन के कवर पर भी दिखीं।
- कई यूरोपीय फिल्मों और हॉलीवुड की धार्मिक फिल्म Sodom and Gomorrah में भी उन्होंने छोटा किरदार निभाया।
1980 के दशक में वे जर्मनी लौटकर म्यूनिख के पास बस गईं। दोनों ने कभी शादी नहीं की और उनके फ्लैट एक-दूसरे से स्लाइडिंग दीवारों से जुड़े थे—जैसे जीवन में, वैसा ही घर में भी—हमेशा साथ।
साथ मरने का निर्णय क्यों?
दोनों बहनों ने पहले भी इंटरव्यू में कहा था कि वे जीवन के अंत तक एक-दूसरे से अलग नहीं होना चाहतीं। उनका डर यह था कि किसी एक को पहले कुछ हो गया तो दूसरी अकेले कैसे रहेगी।
इसी इच्छा के तहत वे एक साल पहले जर्मनी की संस्था German Society for Dying with Dignity (DGHS) से जुड़ गईं, जो इच्छामृत्यु/असिस्टेड सुसाइड की प्रक्रिया में लोगों की मदद करती है।
असिस्टेड सुसाइड क्या है?
Assisted Suicide या सहायता प्राप्त आत्महत्या का अर्थ है—किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के अनुसार, कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत, अपनी मृत्यु चुनने में मदद देना।
यह यूथेनेशिया से अलग है।
- यूथेनेशिया में डॉक्टर किसी मरीज को ऐसी दवा देता है जिससे उसकी मृत्यु हो जाती है।
- असिस्टेड सुसाइड में व्यक्ति खुद अंतिम कदम उठाता है—जैसे दवा खुद लेना—बस प्रक्रिया में विशेषज्ञ संस्थाएं और चिकित्सक सहायता प्रदान करते हैं।
जर्मनी में कब और कैसे वैध है असिस्टेड सुसाइड?
2020 में जर्मनी के सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी समाप्त करने का अधिकार है, और यदि वह स्वेच्छा से यह निर्णय ले रहा है तो वह किसी तीसरे व्यक्ति की मदद भी ले सकता है।
इसके लिए 5 मुख्य शर्तें होती हैं—
- निर्णय पूरी समझ और मानसिक स्पष्टता के साथ लिया गया हो।
- इच्छा लंबे समय से बनी हो, अचानक गुस्से या सदमे में न लिया गया फैसला हो।
- किसी प्रकार का दबाव या मजबूरी न हो।
- अंतिम कदम व्यक्ति स्वयं उठाए।
- पूरी प्रक्रिया चिकित्सकीय और कानूनी निगरानी में की जाए।
DGHS की प्रक्रिया कैसी होती है?
DGHS और इसी तरह की अन्य संस्थाओं में लंबी जांच और कई चरणों की अनुमति के बाद ही मृत्यु की तिथि तय की जाती है।
प्रक्रिया के चरण इस प्रकार होते हैं—
- सदस्यता लेना (कम से कम 6 महीने पहले)
- लिखित आवेदन और मेडिकल रिपोर्ट
- संस्था द्वारा दस्तावेजों की जांच
- वकील की परिवार के साथ चर्चा—क्या निर्णय स्वतंत्र है?
- डॉक्टर द्वारा मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और विकल्पों पर बातचीत
- अंतिम तारीख तय करना
- प्रक्रिया के दिन डॉक्टर, वकील और जरूरत पड़ने पर परिवार मौजूद
स्विट्जरलैंड की संस्था डिग्निटास भी इसी तरह की सेवा प्रदान करती है और इसकी लागत लगभग 1100 यूरो तक होती है।
केसलर बहनों का अंतिम फैसला
DGHS ने बताया कि दोनों बहनों की इच्छा परिपक्व और लंबे समय से बनी हुई थी। वे मानसिक तनाव में नहीं थीं। दोनों ने अपनी पूरी समझ और इच्छा के साथ एक ही दिन दुनिया से जाने का निर्णय किया—जैसे वे पूरा जीवन साथ रहीं, वैसे ही अंतिम यात्रा भी साथ की।
