by-Ravindra Sikarwar
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच व्हाइट हाउस में हुई हालिया बैठक बेहद तनावपूर्ण रही। बैठक के दौरान ट्रंप ने जेलेंस्की पर चिल्लाया, गालियां दीं और यूक्रेन के युद्धक्षेत्र के नक्शे एक तरफ फेंक दिए। ट्रंप ने जेलेंस्की को चेतावनी दी कि अगर वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शर्तों को नहीं मानते तो पुतिन उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर देंगे। यह बैठक 17 अक्टूबर 2025 को ओवल ऑफिस में हुई, जो दो घंटे से अधिक समय तक चली।
यह बैठक ट्रंप और पुतिन के बीच 16 अक्टूबर को हुई दो घंटे की फोन वार्ता के ठीक बाद आयोजित की गई थी। फोन पर ट्रंप ने पुतिन से यूक्रेन युद्ध को खत्म करने पर चर्चा की और जल्द ही हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में दूसरी द्विपक्षीय बैठक की योजना बनाई। यह ट्रंप और पुतिन की इस साल की दूसरी बैठक होगी, इससे पहले अगस्त में अलास्का में हुई बैठक में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। पुतिन ने ट्रंप के प्रस्तावित तीन-पक्षीय बैठक (ट्रंप, पुतिन और जेलेंस्की) को ठुकरा दिया है।
बैठक के दौरान जेलेंस्की की टीम ने युद्धक्षेत्र के नक्शे पेश किए, लेकिन ट्रंप ने उन्हें एक तरफ फेंकते हुए कहा कि वे इन नक्शों को देखकर थक चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं इन नक्शों को बार-बार देखकर थक गया हूं। वह लाल रेखा—मैं नहीं जानता वह कहां है। मैं कभी वहां नहीं गया।’ ट्रंप ने पुतिन की बातों को दोहराते हुए युद्ध को ‘विशेष अभियान, युद्ध भी नहीं’ बताया और जेलेंस्की से कहा कि रूस की अर्थव्यवस्था ‘शानदार स्थिति’ में है। उन्होंने जेलेंस्की से मॉस्को की आत्मसमर्पण की शर्तों को स्वीकार करने की मांग की, जिसमें यूक्रेन को डोनबास क्षेत्र से पूरी तरह पीछे हटना होगा। डोनबास में लुहांस्क पूरी तरह रूस के कब्जे में है, जबकि डोनेत्स्क का लगभग 30% हिस्सा यूक्रेन के पास है, जिसे कीव एक रक्षात्मक किले के रूप में देखता है।
पुतिन ने ट्रंप से फोन पर प्रस्ताव रखा था कि रूस यूक्रेन के दक्षिणी क्षेत्रों खेर्सन और जपोरिजिया के छोटे हिस्सों को छोड़ सकता है, बदले में यूक्रेन डोनबास से निकल जाए। लेकिन जेलेंस्की ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया, क्योंकि इससे यूक्रेन को महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र गंवाना पड़ता। ट्रंप ने जेलेंस्की से कहा कि अगर वे नहीं माने तो पुतिन उन्हें नष्ट कर देंगे। बैठक में ट्रंप ने पूरे समय गालियां दीं और माहौल इतना गरम हो गया कि यह ‘चिल्लाहट वाली बैठक’ बन गई।
जेलेंस्की बैठक में टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों की मांग लेकर आए थे, जो यूक्रेन को रूस के गहरे इलाकों में लक्ष्य भेदने में मदद कर सकती थीं। लेकिन ट्रंप ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया और कहा कि अमेरिका को खुद इन हथियारों की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘एक बात तो कहनी पड़ेगी, हमें भी टॉमहॉक चाहिए। हम ऐसी चीजें नहीं दे सकते जो हमारे देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।’ उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने बाद में कहा कि ट्रंप ने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है।
बैठक के बाद ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया: ‘काफी खून बह चुका है, सीमाएं युद्ध से तय हुई हैं, उन्हें जहां हैं वहीं रोक दें। दोनों पक्ष जीत का दावा करें, इतिहास फैसला करेगा! अब और गोलीबारी नहीं, मौत नहीं, पैसे की बर्बादी नहीं। हर हफ्ते हजारों लोग मारे जा रहे हैं—अब रुक जाओ। शांति से घर जाओ परिवारों के पास!’ जेलेंस्की ने बैठक को ‘सार्थक बातचीत’ बताया लेकिन नकारात्मक भाव से बाहर निकले। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेन किसी भी क्षेत्र को छोड़ने को तैयार नहीं है और यूरोपीय नेताओं से रूस पर ‘सही दबाव’ डालने की अपील की।
यूक्रेन-रूस युद्ध का पृष्ठभूमि: यह युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ, जब पुतिन ने यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण का आदेश दिया। रूस ने डोनबास के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर लिया है, जो यूक्रेन की अर्थव्यवस्था का 16% हिस्सा था। डोनबास में भारी उद्योग और खनन है, और वहां रूसी भाषी आबादी अधिक है। ट्रंप ने चुनाव अभियान में वादा किया था कि वे 24 घंटे में युद्ध खत्म कर देंगे, लेकिन इसे अपनी सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं। फरवरी में ट्रंप और जेलेंस्की की पहली बैठक भी तनावपूर्ण रही थी, जहां ट्रंप ने अमेरिकी सहायता के लिए जेलेंस्की की ‘कृतघ्नता’ पर नाराजगी जताई थी। अगस्त से ट्रंप प्रशासन यूक्रेन को हथियार यूरोपीय नाटो सहयोगियों के माध्यम से बेच रहा है।
यूरोपीय नेता इस बैठक पर सतर्क हैं। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि किसी को जेलेंस्की पर क्षेत्रीय रियायतों के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए, बल्कि रूस की आक्रामकता रोकने पर ध्यान दें। यूक्रेन ने रूस के ऊर्जा ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं, जैसे हाल ही में ओरेंबुर्ग गैस प्लांट पर हमला। व्हाइट हाउस और जेलेंस्की के कार्यालय ने इन रिपोर्टों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
यह घटना ट्रंप की विदेश नीति को दर्शाती है, जहां वे युद्ध को जल्द खत्म करने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन यूक्रेन की संप्रभुता पर रूस की मांगों को प्राथमिकता देते नजर आ रहे हैं।
