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by-Ravindra Sikarwar

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी व्यापार नीतियों के बारे में मुखरता से बात की है और चेतावनी दी है कि यदि भारत रूस से अपनी ऊर्जा का आयात जारी रखता है, तो उस पर और अधिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है।

पृष्ठभूमि और अमेरिकी रुख:
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका ने रूस के खिलाफ कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका का लक्ष्य रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालकर युद्ध के लिए उसके वित्तपोषण को सीमित करना है। अमेरिकी अधिकारियों ने बार-बार भारत सहित अन्य देशों से रूस से तेल और गैस जैसे ऊर्जा उत्पादों की खरीद बंद करने का आग्रह किया है। ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि रूस से ऊर्जा आयात जारी रखने से रूस आर्थिक रूप से मजबूत होता है, जिससे प्रतिबंधों का प्रभाव कम हो जाता है।

भारत की स्थिति और तर्क:
भारत ने अमेरिका के इन आग्रहों का विरोध किया है और अपनी संप्रभुता का हवाला देते हुए रूस से ऊर्जा आयात जारी रखा है। भारत सरकार ने इस नीति के पक्ष में कई तर्क दिए हैं:

  • राष्ट्रीय हित: भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा आयात करता है। रूस से रियायती दर पर मिलने वाला तेल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
  • सुलभता और सुरक्षा: रूस भारत के लिए एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्तिकर्ता रहा है। ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए एक रणनीतिक प्राथमिकता है, और रूस से आयात इसे सुनिश्चित करने में मदद करता है।
  • घरेलू अर्थव्यवस्था: रूस से कम कीमत पर तेल मिलने से भारत में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है, जिससे महंगाई पर दबाव कम होता है।

भारत का तर्क है कि वह किसी भी देश के प्रतिबंधों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है, जब तक कि वे संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनिवार्य न हों।

संभावित परिणाम और चुनौतियाँ:
ट्रम्प प्रशासन की चेतावनियों के परिणामस्वरूप भारत को संभावित चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि अमेरिका भारत पर प्रतिबंध लगाता है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों में तनाव आ सकता है। इन प्रतिबंधों में व्यापार शुल्क, आर्थिक सहायता में कटौती, या वित्तीय लेनदेन पर रोक शामिल हो सकती है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देगा, और किसी भी संभावित दबाव का सामना करने के लिए तैयार है।

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