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By: Ravindra Sikarwar

राजसमंद: राजस्थान के राजसमंद जिले में पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक पिकअप ट्रक से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की है। यह कार्रवाई श्रीनाथजी थाना क्षेत्र के त्रिनेत्र सर्कल के पास की गई, जहां गुप्त सूचना के आधार पर नाकाबंदी के दौरान बिना नंबर प्लेट वाला वाहन रोका गया। ट्रक में कुल 109 कार्टन इको प्राइम एक्स विस्फोटक पदार्थ भरे हुए थे, जिनमें 981 जेलेटिन स्टिक, 93 डेटोनेटर, 100 ट्रंक लाइन डिले (टीएलडी) और 30 फुट का सेफ्टी फ्यूज शामिल था। दो संदिग्धों – भागवत सिंह और हिम्मत सिंह, जो राजस्थान के निवासी हैं – को गिरफ्तार किया गया है। दोनों ने विस्फोटक परिवहन के लिए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहे। यह घटना खनन क्षेत्रों में अवैध विस्फोटकों की तस्करी को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के बीच चिंता बढ़ा रही है।

घटना मंगलवार सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है। श्रीनाथजी थाने की टीम नाथद्वारा के निकट गश्त पर थी, जब एक मुखबिर ने संदिग्ध ट्रक की जानकारी दी। डीएसपी शिप्रा राजावत के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने तुरंत नाकाबंदी की। वाहन अमेट कस्बे की ओर से आ रहा था और इसकी नंबर प्लेट गायब थी, जो संदेह को और गहरा गया। जब ट्रक को रोका गया, तो चालक और उसके साथी ने घबराहट दिखाई। तलाशी लेने पर ट्रक के पिछले हिस्से में ढेर सारे कार्टन मिले, जो प्लास्टिक शीट से ढके हुए थे। इन्हें खोलने पर विस्फोटक सामग्री का खुलासा हुआ। डीएसपी राजावत ने बताया, “यह सामग्री मुख्य रूप से खनन कार्यों के लिए इस्तेमाल होती है, लेकिन बिना लाइसेंस के परिवहन अवैध है। आरोपी पूछताछ में खानापूर्ति कर रहे हैं, लेकिन हम स्रोत और गंतव्य की पूरी जानकारी उजागर करेंगे।”

विस्फोटकों की मात्रा इतनी अधिक थी कि यह एक बड़ा खतरा बन सकती थी। इको प्राइम एक्स एक शक्तिशाली विस्फोटक है, जो रॉक ब्लास्टिंग में प्रयुक्त होता है। प्रत्येक कार्टन में औसतन 9 जेलेटिन स्टिक और अन्य सहायक सामग्री थी, जो कुल मिलाकर सैकड़ों टन विस्फोटक ऊर्जा उत्पन्न कर सकती थी। पुलिस ने तत्काल वाहन को जब्त कर लिया और सामग्री को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। फॉरेंसिक टीम को बुलाकर नमूनों की जांच की जा रही है। आरोपी भागवत सिंह (उम्र 35 वर्ष) और हिम्मत सिंह (उम्र 28 वर्ष) को श्रीनाथजी थाने में हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक बयानों से पता चला कि वे राजसमंद के ही रहने वाले हैं और स्थानीय खनन ठेकेदारों के लिए काम करते हैं। हालांकि, पुलिस को शक है कि यह खेप बड़े स्तर पर अवैध व्यापार का हिस्सा हो सकती है।

इस मामले में एक्सप्लोसिव एक्ट 2008 और आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। एसपी राजसमंद ने कहा, “हमारी टीमें अब स्रोत की पड़ताल कर रही हैं। क्या यह सामग्री पड़ोसी राज्यों से आई है या स्थानीय स्तर पर तैयार की गई, यह स्पष्ट होगा।” राजस्थान खनिज संपदा वाला राज्य है, जहां संगमरमर और ग्रेनाइट खदानों की भरमार है। यहां विस्फोटकों की मांग अधिक है, लेकिन अवैध तस्करी भी आम समस्या बनी हुई है। पिछले एक वर्ष में राज्य में ऐसी कम से कम 15 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से अधिकांश खनन माफिया से जुड़ी पाई गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खेपें न केवल दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं, बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए भी दुरुपयोग हो सकती हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी इसकी निगरानी शुरू कर दी है, खासकर सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण।

यह जब्ती नाथद्वारा जैसे धार्मिक पर्यटन स्थल के लिए राहत की सांस है, जहां लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष आते हैं। यदि यह ट्रक फट जाता, तो भयानक हादसा हो सकता था। स्थानीय व्यापारियों ने पुलिस की तारीफ की और कहा कि नियमित चेकिंग से अपराध कम हो रहे हैं। एक खनन मजदूर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “खदानों में विस्फोटकों की कालाबाजारी लंबे समय से चल रही है। लाइसेंसधारी कंपनियां ही सही सामग्री मुहैया कराती हैं, लेकिन अवैध विक्रेता सस्ते दामों पर बेचते हैं।” सरकार ने हाल ही में खनन विभाग को निर्देश दिए हैं कि विस्फोटक परिवहन पर सख्त नजर रखी जाए। इस घटना के बाद जिले में विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया गया है, जिसमें सीसीटीवी कवरेज बढ़ाई जाएगी और मुखबिरों को पुरस्कार दिए जाएंगे।

अवैध विस्फोटकों की समस्या पूरे देश में फैली हुई है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों में भी ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो पर्यावरणीय क्षति और मानवीय हानि का कारण बनती हैं। एक अध्ययन के अनुसार, भारत में हर साल खनन संबंधी विस्फोटों से 200 से अधिक मौतें होती हैं। राजस्थान सरकार ने 2024 में विस्फोटक लाइसेंसिंग प्रक्रिया को डिजिटल किया था, लेकिन ग्रामीण इलाकों में प्रवर्तन की कमी बनी हुई है। इस जब्ती से न केवल स्थानीय अपराधियों को झटका लगा है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि कानून का पालन न करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आरोपी कोर्ट में पेश किए जाने वाले हैं, जहां रिमांड की मांग की जाएगी। जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे हो सकते हैं।

यह घटना राजस्थान पुलिस की सतर्कता का प्रतीक है। डीजीपी ने सभी थानों को निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में नाइट पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए। उम्मीद है कि इससे अवैध व्यापार पर अंकुश लगेगा और खनन उद्योग अधिक सुरक्षित बनेगा। कुल मिलाकर, यह कार्रवाई राज्य की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। क्या यह बड़े नेटवर्क का हिस्सा था, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। फिलहाल, पुलिस की मुस्तैदी पर सभी का ध्यान केंद्रित है।

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