By: Ravindra Sikarwar
Breaking news: पंजाब के पठानकोट में पुलिस ने एक 15 साल के नाबालिग लड़के को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। लड़का सोशल मीडिया पर लुभावने जाल में फंस गया और करीब एक साल से संवेदनशील जानकारी पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेज रहा था। यह घटना 5 जनवरी 2026 को सामने आई और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठा रही है। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी डिटेल्स।
कैसे फंसाया गया नाबालिग?
पठानकोट के एसएसपी दलजिंदर सिंह धिल्लों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरफ्तार लड़के का नाम संजीव कुमार है। वह जम्मू के सांबा जिले का रहने वाला है। लड़का भावनात्मक रूप से कमजोर था क्योंकि उसे लगता था कि उसके पिता की हत्या हुई है (हालांकि जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई)।
पाकिस्तानी एजेंट्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फेक अकाउंट्स से संपर्क किया और उसे भावनात्मक रूप से操纵 किया। इसके बाद लड़के ने संवेदनशील स्थानों की वीडियो और फोटो भेजनी शुरू कर दीं। वह पाकिस्तान स्थित टेरर मॉड्यूल से जुड़े लोगों और ISI से जुड़े अधिकारियों के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार, यह संपर्क लगभग एक साल से चल रहा था।
लड़का टेक-सेवी था और उसका मोबाइल फोन क्लोन किया गया था, जिससे और ज्यादा डेटा निकाला गया। उसने रक्षा स्थलों की तस्वीरें और अन्य गोपनीय जानकारी शेयर की।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
खुफिया इनपुट और तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस ने लड़के को हिरासत में लिया। पूछताछ में पता चला कि वह अकेला नहीं था – पंजाब के कई अन्य जिलों में भी नाबालिग लड़के ISI हैंडलर्स के संपर्क में हो सकते हैं।
इसके चलते पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया गया है। पुलिस स्टेशनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कमजोर बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि कितनी जानकारी लीक हुई और क्या कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।
पिछले महीने दिसंबर 2025 में भी पंजाब पुलिस ने गुरदासपुर में ISI बैक्ड टेरर मॉड्यूल को पकड़ा था, जो ग्रेनेड अटैक से जुड़ा था।
ISI की नई रणनीति: बच्चों को निशाना बनाना
यह मामला भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी ISI अब नाबालिगों को टारगेट कर रही है क्योंकि वे भावनात्मक रूप से आसानी से प्रभावित होते हैं और सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहते हैं।
ऐसे केस बॉर्डर इलाकों में ज्यादा खतरा पैदा कर सकते हैं। पुलिस का मानना है कि यह एक बड़ा पैटर्न हो सकता है, जहां बच्चों को हनीट्रैप या भावनात्मक ब्लैकमेल से फंसाया जा रहा है।
अभिभावकों और युवाओं के लिए सलाह
यह घटना सोशल मीडिया के खतरों को उजागर करती है। अभिभावक अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें:
- अनजान लोगों से चैट न करें।
- संवेदनशील जगहों की फोटो/वीडियो शेयर न करें।
- अगर कोई संदिग्ध संपर्क हो तो तुरंत पुलिस को बताएं।
राष्ट्रीय सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है। अगर आपको कोई संदेह हो तो साइबर सेल या लोकल पुलिस से संपर्क करें। जांच पूरी होने पर आगे की कार्रवाई की उम्मीद है। सुरक्षित रहें और सतर्क रहें!
