by-Ravindra Sikarwar
गोवा में स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS), पिलानी के परिसर में एक 20 वर्षीय छात्र की दुखद मृत्यु की खबरें सामने आ रही हैं। यह घटना दिसंबर से लेकर अब तक पाँचवीं ऐसी घटना है, जिसने सरकार को जांच शुरू करने के लिए प्रेरित किया है।
लगातार हो रही मौतें: एक गंभीर चिंता का विषय
BITS, पिलानी के गोवा परिसर में हुई यह नवीनतम घटना शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। यह पाँचवीं मौत है जो दिसंबर 2023 से अब तक हुई है, जिससे परिसर में छात्रों, अभिभावकों और प्रशासन में बेचैनी का माहौल है।
पिछले कुछ महीनों में, छात्रों की मौत के कई कारण बताए गए हैं, जिनमें आत्महत्या और अन्य अज्ञात कारण शामिल हैं। इन घटनाओं ने न केवल छात्रों के जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे शैक्षणिक समुदाय को भी हिला दिया है।
सरकार की प्रतिक्रिया और जांच:
इन लगातार हो रही मौतों को गंभीरता से लेते हुए, सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है जो इन घटनाओं के पीछे के कारणों की गहराई से जांच करेगी। इस समिति का मुख्य उद्देश्य है:
- मौतों के कारणों का पता लगाना: यह समिति यह जानने की कोशिश करेगी कि क्या इन मौतों के पीछे कोई साझा कारण है, जैसे कि शैक्षणिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ, या अन्य कोई कारण।
- संस्थान के प्रोटोकॉल की समीक्षा: समिति यह भी जांच करेगी कि क्या संस्थान के पास छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और संकट प्रबंधन के लिए पर्याप्त सुविधाएँ और प्रोटोकॉल हैं।
- भविष्य के लिए सुझाव: जांच के आधार पर, समिति भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कुछ सुझाव भी देगी।
छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया:
इन घटनाओं ने परिसर में छात्रों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी कई छात्रों ने अपनी चिंता व्यक्त की है और प्रशासन से बेहतर सहायता प्रणाली की मांग की है।
अभिभावक भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने शिक्षण संस्थानों से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का आग्रह किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्च शिक्षा के संस्थान, जो छात्रों के भविष्य का निर्माण करते हैं, अब उनकी सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में हैं।
निष्कर्ष:
BITS, पिलानी में हुई इन दुखद घटनाओं ने एक बार फिर से इस बात पर जोर दिया है कि शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के मानसिक और भावनात्मक कल्याण पर भी ध्यान देना आवश्यक है। यह न केवल संस्थान बल्कि सरकार और समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे एक ऐसा वातावरण बनाएँ जहाँ छात्र बिना किसी दबाव या डर के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। यह घटना एक वेक-अप कॉल है, जो हमें छात्रों की भलाई को प्राथमिकता देने की याद दिलाती है।
