by-Ravindra Sikarwar
खंडवा: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में विजयादशमी के अवसर पर दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। एक ट्रैक्टर-ट्रॉली, जो मूर्ति विसर्जन के लिए भक्तों को लेकर जा रही थी, अनियंत्रित होकर जावर तहसील के एक तालाब में जा गिरी। इस त्रासदी में 11 लोगों की डूबने से मौत हो गई, जिनमें सात लड़कियां शामिल हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएमएनआरएफ से प्रत्येक मृतक के परिवार के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की सहायता स्वीकृत की है। बचाव कार्य अभी भी जारी है, और उत्सव का माहौल शोक में बदल गया है।
हादसे का विवरण:
यह दुखद घटना गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 की देर शाम खंडवा जिले की जावर तहसील के पास एक तालाब में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैक्टर-ट्रॉली में करीब 25-30 लोग सवार थे, जो विजयादशमी के उत्सव के तहत मां दुर्गा की मूर्तियों को विसर्जन के लिए ले जा रहे थे। ये लोग स्थानीय गांवों से एकत्र हुए थे और नवरात्रि समारोह के समापन के लिए तालाब की ओर जा रहे थे।
पुलिस और स्थानीय लोगों के अनुसार, ट्रैक्टर-चालक ने तालाब के पास एक तीखे मोड़ पर वाहन का नियंत्रण खो दिया, जिसके कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली गहरे पानी में जा गिरी। सवारियों में से कई लोग तैरना नहीं जानते थे, और गहरा पानी होने के कारण वे डूब गए। मृतकों में सात युवा लड़कियां, तीन पुरुष और एक नाबालिग शामिल हैं, जिनकी उम्र 14 से 25 वर्ष के बीच थी।
बचाव कार्य और तत्काल कार्रवाई:
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, आपातकालीन सेवाएं, और गोताखोरों की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और कई लोगों को तालाब से निकालने में मदद की। हालांकि, 11 लोगों को बचाया नहीं जा सका, और उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। घायलों को तुरंत खंडवा के जिला अस्पताल और अन्य नजदीकी चिकित्सालयों में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
बचाव कार्य रातभर चला, और गोताखोरों ने यह सुनिश्चित करने के लिए तालाब की गहराई में तलाशी ली कि कोई और व्यक्ति फंसा न हो। पुलिस ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली को निकालने का काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि हादसे के सटीक कारणों की जांच की जा सके।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया:
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस त्रासदी पर गहरी संवेदना व्यक्त की और मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्होंने ट्विटर पर अपने शोक संदेश में कहा, “खंडवा में हुए इस हादसे ने हमें गहरे दुख में डुबो दिया है। हम प्रभावित परिवारों के साथ हैं, और हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।” इसके अलावा, उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं दी जाएं और मृतकों के परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाई जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर शोक जताया और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिवार के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “खंडवा में हुए इस दुखद हादसे से मन व्यथित है। मेरी संवेदनाएं शोकग्रस्त परिवारों के साथ हैं।”
स्थानीय समुदाय का शोक और आक्रोश:
इस हादसे ने खंडवा और आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ा दी है। विजयादशमी का उत्सव, जो खुशी और उत्साह का प्रतीक है, इस त्रासदी के कारण गमगीन हो गया। स्थानीय लोगों ने सड़क की खराब स्थिति और तालाब के पास सुरक्षा उपायों की कमी को हादसे का एक प्रमुख कारण बताया। कई ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब के आसपास रेलिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
कुछ लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली में अधिक सवारियां होने की बात भी उठाई, जिसके कारण वाहन का संतुलन बिगड़ सकता था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है और चालक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करने पर विचार कर रही है।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव:
यह हादसा न केवल प्रभावित परिवारों के लिए एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह पूरे समुदाय के लिए एक गहरा झटका है। नवरात्रि और विजयादशमी जैसे त्योहार सामुदायिक एकता और आनंद के प्रतीक हैं, लेकिन इस घटना ने उत्सव के माहौल को मातम में बदल दिया। मृतकों में शामिल सात लड़कियां अपने परिवारों की आशा और भविष्य थीं, और उनकी असामयिक मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और धार्मिक समूहों ने प्रभावित परिवारों के लिए सहायता अभियान शुरू किए हैं। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से सड़क सुरक्षा और जलाशयों के आसपास बेहतर बुनियादी ढांचे की मांग की है।
भविष्य के लिए कदम:
यह हादसा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर आपातकालीन तैयारियों की कमी को उजागर करता है। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह निम्नलिखित कदम उठाए:
- तालाबों और नदियों के पास सुरक्षा रेलिंग और चेतावनी संदेश बोर्ड लगाए जाएं।
- वाहनों में सवारी की संख्या को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं।
- ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के लिए तत्काल बजट आवंटन।
- आपातकालीन बचाव दलों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित और तैनात करना।
खंडवा में हुआ यह दुखद हादसा एक बार फिर हमें सड़क और जल सुरक्षा के महत्व की याद दिलाता है। यह घटना प्रशासन और समाज के लिए एक चेतावनी है कि उत्सवों और धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा उपायों को और सख्त करना होगा। प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए, यह उम्मीद की जाती है कि सरकार और समुदाय मिलकर भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
