by-Ravindra Sikarwar
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए गहन बातचीत चल रही है, जिसका उद्देश्य इस साल के अंत तक समझौते पर हस्ताक्षर करना है। एक शीर्ष यूरोपीय संघ के अधिकारी के अनुसार, वार्ताएं अब एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी हैं।
प्रमुख बिंदु और व्यापार आंकड़े:
- बढ़ता व्यापार: यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 137.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले एक दशक में लगभग 90% की वृद्धि है।
- लक्ष्य: यूरोपीय संघ के व्यापार प्रमुख मारोस सेफकोविक ने बताया कि इस समझौते का लक्ष्य दोनों पक्षों के लिए “निवेश को खोलना, बाधाओं को कम करना, बाजार की पहुंच का विस्तार करना और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना” है। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इसे संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी सौदा बताया है।
- तेज हुई वार्ता: 2022 में फिर से शुरू हुई बातचीत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फिर से चुने जाने के बाद गति पकड़ी है, क्योंकि ब्रसेल्स (EU) ने नए व्यापारिक गठबंधन बनाने के अपने प्रयासों को तेज कर दिया है।
मतभेद और मांगें:
- यूरोपीय संघ की मांगें: यूरोपीय संघ वाहनों, चिकित्सा उपकरणों, शराब और डेयरी उत्पादों पर भारी शुल्क में कटौती चाहता है।
- भारत की मांगें: भारत अपने कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, स्टील और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच की मांग कर रहा है।
- कृषि क्षेत्र पर बातचीत: यूरोपीय कृषि आयुक्त क्रिस्टोफ हैनसेन कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों पर मतभेदों को सुलझाने के लिए दिल्ली में निर्णायक बातचीत कर रहे हैं।
- अवरोध: यह समझौता कई वर्षों से भारत की कुछ क्षेत्रों में टैरिफ कम करने की अनिच्छा के कारण रुका हुआ था। यूरोपीय संघ विशेष रूप से आयातित कारों, व्हिस्की और वाइन पर 100% से अधिक के टैरिफ को कम करने पर जोर दे रहा है।
यह समझौता दोनों पक्षों के लिए आर्थिक और रणनीतिक अवसरों को खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
