By: Ravindra Sikarwar
एक चौंकाने वाली घटना में पुलिस विभाग की लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी का गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक मृत व्यक्ति के शव को उसी थाने में रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय दूसरे पुलिस क्षेत्र में ले जाकर छोड़ दिया गया। आरोप है कि ऐसा केवल इसलिए किया गया ताकि संबंधित पुलिसकर्मी मामले की जांच और कागजी कार्रवाई से बच सकें।
इस घटना ने न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर भी गंभीर अविश्वास पैदा किया है। मामले का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
घटना कैसे सामने आई?
सूत्रों के अनुसार, एक व्यक्ति संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया था। घटनास्थल उसी थाने की सीमा में था जहां संबंधित पुलिसकर्मी तैनात थे। लेकिन नियमों के तहत FIR, पंचनामा, पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया और आगे की जांच से बचने के लिए पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से शव को जीप में उठाया और उसे पड़ोसी थाना क्षेत्र में ले जाकर सड़क किनारे छोड़ दिया।
स्थानीय लोगों को जब शव मिला तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी और मामला सोशल मीडिया पर फैल गया। वीडियो फुटेज में पुलिस वाहन और वर्दीधारी कर्मियों को शव ले जाते हुए देखा गया, जिसके बाद मामला छिपाना संभव नहीं रहा।
पुलिस विभाग में बढ़ी बेचैनी, अधिकारी हरकत में
घटना के सामने आते ही उच्च अधिकारियों ने इस पर गंभीरता से ध्यान दिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने प्रारंभिक जांच के आदेश दे दिए हैं और संबंधित पुलिसकर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
सूत्रों का कहना है कि विभाग इस घटना को कर्तव्यहीनता, सरकारी कार्य में लापरवाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन के तहत देख रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद निलंबन सहित कठोर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना को “निर्दयी और शर्मनाक” बताया है। उनका कहना है कि—
“एक पुलिस बल जो नागरिकों की रक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है, वह खुद कानून तोड़ रहा है और जिम्मेदारी से भाग रहा है, यह न सिर्फ खतरनाक है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी चोट है।”
स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। कुछ निवासियों ने कहा कि यदि पुलिस शव को भी बोझ समझने लगे, तो जीवित नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
कानूनी रूप से कितना गंभीर मामला?
भारतीय कानून के अनुसार, इस तरह शव को छोड़ना या मामले को टालना न केवल कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालना है, बल्कि यह भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत आपराधिक लापरवाही माना जा सकता है।
यदि जांच में तथ्य सिद्ध होते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मी:
- निलंबित
- नोकरी से बर्खास्त
- अथवा आपराधिक मुकदमे का सामना कर सकते हैं
यह घटना पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाती है — क्या जांच और कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए कानून व्यवस्था से जुड़े लोग ही कानून को तोड़ने लगेंगे?
इस मामले की जांच से यह स्पष्ट होगा कि यह केवल कुछ पुलिसकर्मियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया था या फिर सिस्टम में और भी ऐसी कमियां मौजूद हैं जिनका दुरुपयोग किया जा रहा है।
फिलहाल, पीड़ित परिवार और समाज न्याय की प्रतीक्षा में है और सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
