by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में ट्रेनों और स्टेशनों पर ट्रांसजेंडर बनकर पैसे वसूलने वाले धोखेबाजों के बढ़ते मामलों के बीच रेलवे ने यात्रियों को एक आसान और त्वरित तरीका सुझाया है। अगर कोई व्यक्ति ट्रांसजेंडर का भेष धारण कर आपको परेशान करे, तो तुरंत ‘रेल मदद’ ऐप का उपयोग करें या हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल करें। यह पहल रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) की आगरा मंडल की विशेष अभियान से प्रेरित है, जिसमें 54 ऐसे धोखेबाजों को पकड़ा गया। यह अभियान न केवल यात्रियों के मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि रेल यात्रा को सुरक्षित और गरिमापूर्ण बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी शिकायतें दर्ज करने से अपराधियों पर अंकुश लगेगा और असली ट्रांसजेंडर समुदाय की छवि भी सुधरेगी।
समस्या का रूप: ट्रेनों में धोखेबाजों का बढ़ता आतंक
भारतीय रेलवे, जो प्रतिदिन करोड़ों यात्रियों को ढोता है, लंबे समय से ऐसी घटनाओं से जूझ रहा है। कई लोग ट्रांसजेंडर समुदाय का भेष अपनाकर ट्रेनों के जनरल, स्लीपर या यहां तक कि एसी कोचों में घुस आते हैं। वे यात्रियों को ‘आशीर्वाद’ के नाम पर पैसे मांगते हैं, और इनकार करने पर गाली-गलौज, धमकी या शारीरिक छेड़छाड़ तक कर देते हैं। सोशल मीडिया पर कई यात्री अपनी आपबीती साझा करते हैं, जहां वे बताते हैं कि कैसे ये धोखेबाज परिवारों को निशाना बनाते हैं, खासकर महिलाओं और बच्चों को। उदाहरण के लिए, मुंबई लोकल ट्रेनों में यह समस्या इतनी आम हो चुकी है कि यात्री खुद को असहज महसूस करते हैं।
इसकी जड़ें सामाजिक पूर्वाग्रहों और आर्थिक मजबूरियों में हैं। असली ट्रांसजेंडर समुदाय को नौकरियों और सम्मानजनक जीवन से वंचित रखा जाता है, जिससे कुछ लोग इस तरह के धोखे का सहारा लेते हैं। लेकिन अधिकांश मामलों में ये बाहरी लोग होते हैं जो समुदाय की पहचान का दुरुपयोग करते हैं। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में ऐसी 200 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, जो पिछले वर्ष से 30% अधिक हैं। आगरा मंडल के अभियान ने साबित कर दिया कि सतर्कता से इन्हें रोका जा सकता है। आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि ये धोखेबाज अक्सर बिना टिकट यात्रा करते हैं और स्टेशनों पर भी भीड़ का फायदा उठाते हैं।
आरपीएफ आगरा मंडल का विशेष अभियान: 54 गिरफ्तारियां, एक नई शुरुआत
उत्तर मध्य रेलवे के आगरा मंडल में आरपीएफ ने 1 से 15 अक्टूबर 2025 तक ‘ऑपरेशन सफाई’ नामक एक विशेष ड्राइव चलाई। इस दौरान ट्रेनों, प्लेटफॉर्मों और स्टेशनों पर गश्त बढ़ाई गई। फोकस था – ट्रांसजेंडर बनकर उत्पीड़न, बिना टिकट यात्रा, जबरन पैसे वसूली और असभ्य व्यवहार पर। परिणामस्वरूप, 54 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से अधिकांश पुरुष थे जो महिला वेशभूषा में थे। इनमें से कई को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
अभियान के दौरान आरपीएफ ने 20 से अधिक ट्रेनों की तलाशी ली, जिसमें दिल्ली-हावड़ा, आगरा-मुंबई और अन्य प्रमुख रूट्स शामिल थे। एक अधिकारी ने बताया, “हमने पाया कि ये लोग संगठित तरीके से काम करते हैं – वे स्टेशनों पर चढ़ते हैं, पैसे वसूलते हैं और अगले स्टॉप पर उतर जाते हैं।” इस ड्राइव ने न केवल अपराध दर कम की, बल्कि यात्रियों में विश्वास भी जगाया। अब सभी मंडलों को निर्देश दिए गए हैं कि नियमित चेकिंग करें और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय बनाए रखें। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्वीट कर कहा, “यात्रियों की गरिमा हमारी प्राथमिकता है। ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
सरल उपाय: ‘रेल मदद’ ऐप और 139 हेल्पलाइन का उपयोग कैसे करें
रेलवे ने यात्रियों के लिए एक सीधी और गोपनीय शिकायत प्रणाली विकसित की है, जो किसी भी समय उपलब्ध है। यहां विस्तार से जानिए कैसे इसका लाभ उठाएं:
- रेल मदद ऐप: गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से मुफ्त डाउनलोड करें। ऐप खोलें, ‘शिकायत दर्ज करें’ विकल्प चुनें। अपनी समस्या का वर्णन करें – जैसे “ट्रेन नंबर XYZ में ट्रांसजेंडर बनकर पैसे मांग रहे हैं”। लोकेशन, समय और फोटो/वीडियो जोड़ें। शिकायत तुरंत आरपीएफ को भेजी जाती है, और आपको ट्रैकिंग आईडी मिलती है। ऐप हिंदी, अंग्रेजी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।
- हेल्पलाइन 139: मोबाइल से डायल करें। ऑटोमेटेड सिस्टम में विकल्प चुनें – उत्पीड़न के लिए ‘3’ दबाएं। अपनी बात रिकॉर्ड करें या लाइव एजेंट से बात करें। कॉल के दौरान ट्रेन का PNR, कोच नंबर बताएं। रिस्पॉन्स समय औसतन 5-10 मिनट का होता है।
- अन्य विकल्प: नजदीकी आरपीएफ पोस्ट या जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) से संपर्क करें। इमरजेंसी में 112 डायल करें। रेलवे ने सभी स्टेशनों पर जागरूकता पोस्टर लगाए हैं, जहां ये निर्देश लिखे हैं।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि ऐसी स्थिति में आंखें मिलाने से बचें, शांत रहें और शिकायत करें। इससे धोखेबाज खुद पीछे हट जाते हैं। एक यात्री ने शेयर किया, “मैंने 139 पर कॉल की, और अगले स्टेशन पर आरपीएफ आ गया। समस्या हल हो गई।”
व्यापक प्रयास: रेलवे की सुरक्षा पहलें और भविष्य की योजनाएं
यह उपाय रेलवे की व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। 2025 में रेलवे ने ‘मिशन सुरक्षा’ के तहत 5,000 नए आरपीएफ जवान तैनात किए हैं। सीसीटीवी कवरेज 90% स्टेशनों पर पहुंच चुका है, और वुमन हेल्प डेस्क स्थापित की गई हैं। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए रेलवे ने अलग से काउंसलिंग सेंटर शुरू किए हैं, जहां उन्हें वैकल्पिक रोजगार के अवसर बताए जाते हैं – जैसे वेंडिंग जोब्स या कारीगरी प्रशिक्षण।
हालांकि, चुनौतियां बाकी हैं। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है कि क्या यह पूर्वाग्रह को बढ़ावा देगा? विशेषज्ञ कहते हैं, “समस्या धोखेबाजों की है, न कि समुदाय की। जागरूकता से दोनों हल होंगी।” सरकार ने 2026 तक ऐसी शिकायतों को 50% कम करने का लक्ष्य रखा है। विपक्ष ने भी समर्थन किया है, लेकिन मांग की है कि ग्रामीण रूट्स पर फोकस बढ़े।
यात्रियों की प्रतिक्रियाएं: आशा की किरण
सोशल मीडिया पर #RailSafe ट्रेंड कर रहा है, जहां यात्री अपनी सफल शिकायतों की कहानियां साझा कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “पहली बार लगा कि रेलवे हमारी सुनता है। धन्यवाद!” लेकिन कुछ ने चेतावनी दी कि अमल में देरी न हो। रेलवे ने वादा किया है कि हर शिकायत पर 24 घंटे में कार्रवाई होगी।
यह पहल न केवल उत्पीड़न रोकेगी, बल्कि रेल यात्रा को सभी के लिए सुखद बनाएगी। अगर आप भी ऐसी स्थिति का सामना करें, तो हिचकिचाएं नहीं – शिकायत करें, और सुरक्षित रहें। रेलवे आपकी आवाज है, इसे मजबूत बनाएं।
