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by-Ravindra Sikarwar

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच संबंधों को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि दोनों संगठनों के बीच कोई झगड़ा या मतभेद नहीं है।

संघ और भाजपा के संबंध पर स्पष्टीकरण:
मोहन भागवत ने अपने एक बयान में कहा कि RSS और BJP के बीच संबंध बहुत मजबूत हैं। उन्होंने कहा, “यह सच है कि हम अलग-अलग संगठन हैं और हमारा काम करने का तरीका भी अलग है, लेकिन हमारा लक्ष्य एक ही है।” भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि आरएसएस एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है जिसका उद्देश्य देश और समाज का निर्माण करना है, जबकि भाजपा एक राजनीतिक दल है जिसका उद्देश्य सरकार बनाना और देश का शासन चलाना है। उन्होंने कहा कि दोनों अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में काम करते हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं।

उन्होंने उन सभी अटकलों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि लोकसभा चुनावों के बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ गया है। इन अटकलों में कहा गया था कि भाजपा का चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाना और आरएसएस की तरफ से आने वाली आलोचनाओं ने दोनों के बीच दरार पैदा कर दी है। भागवत ने कहा कि ऐसी खबरें निराधार हैं और दोनों संगठन मिलकर राष्ट्र निर्माण के लिए काम कर रहे हैं।

संबोधन के प्रमुख बिंदु:

  • लक्ष्य समान: भागवत ने स्पष्ट किया कि दोनों का अंतिम लक्ष्य भारत को एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र बनाना है।
  • काम करने का तरीका अलग: आरएसएस सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में काम करता है, जबकि भाजपा राजनीतिक क्षेत्र में।
  • परस्पर पूरक: दोनों संगठन एक-दूसरे के काम में सहयोग करते हैं और एक-दूसरे को आगे बढ़ाते हैं।
  • अफवाहों को खारिज किया: भागवत ने मीडिया में चल रही दरार की खबरों को पूरी तरह से गलत बताया।

भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद संघ और भाजपा के रिश्तों में कथित खटास की खबरें लगातार चल रही थीं। उनके इस स्पष्टीकरण से यह साफ हो गया है कि दोनों संगठन अभी भी एक मजबूत और एकजुट इकाई के रूप में काम कर रहे हैं।

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