by-Ravindra Sikarwar
भारतीय प्रधानमंत्री ने हाल ही में अपने ब्रिटिश समकक्ष के साथ एक महत्वपूर्ण बातचीत में कट्टरवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में कट्टरवाद और अतिवाद के लिए कोई स्थान नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर कट्टरपंथी विचारधाराओं और हिंसक गतिविधियों के बढ़ते प्रभाव ने कई देशों के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी की हैं। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
बातचीत का संदर्भ और पृष्ठभूमि:
भारतीय प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के साथ अपनी टेलीफोनिक बातचीत में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद, कट्टरवाद, और हिंसक अतिवाद से उत्पन्न खतरों पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मूल भावना—स्वतंत्रता, समानता और सहिष्णुता—कट्टरपंथी विचारधाराओं के साथ सह-अस्तित्व नहीं रख सकती। भारतीय प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि दोनों देश मिलकर ऐसी ताकतों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती हैं।
यह चर्चा उस समय हुई, जब हाल के वर्षों में भारत और यूनाइटेड किंगडम दोनों ने कट्टरपंथी गतिविधियों और आतंकवादी हमलों का सामना किया है। भारत, विशेष रूप से, सीमा पार आतंकवाद और आंतरिक कट्टरपंथी तत्वों से जूझ रहा है, जबकि यूनाइटेड किंगडम ने भी अपनी धरती पर कई आतंकी घटनाओं का सामना किया है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि कट्टरवाद न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विविधता को भी नष्ट करता है।
कट्टरवाद के खिलाफ भारत का रुख:
भारतीय प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने हमेशा से सहिष्णुता, बहुलवाद और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान और उसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था इन मूल्यों को बढ़ावा देती है, लेकिन कट्टरपंथी ताकतें इन सिद्धांतों को चुनौती दे रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन तत्वों की निंदा की, जो धार्मिक या वैचारिक आधार पर हिंसा को बढ़ावा देते हैं और युवाओं को गलत दिशा में ले जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि भारत ने आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें कड़े कानून, बेहतर खुफिया तंत्र, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से इस दिशा में और अधिक सहयोग की अपील की, विशेष रूप से खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान, आतंकी वित्तपोषण को रोकने, और ऑनलाइन कट्टरपंथी प्रचार को नियंत्रित करने के लिए।
वैश्विक स्तर पर कट्टरवाद का खतरा:
कट्टरवाद का मुद्दा केवल भारत या यूनाइटेड किंगडम तक सीमित नहीं है; यह एक वैश्विक समस्या है। हाल के वर्षों में, आतंकवादी संगठनों ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग करके अपनी विचारधारा को फैलाया है, जिससे युवाओं का ब्रेनवॉश करना आसान हो गया है। भारतीय प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कट्टरवाद को जड़ से खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को और अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कट्टरवाद का मुकाबला करने के लिए केवल सैन्य या कानूनी कदम पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए सामाजिक और शैक्षिक सुधारों की भी आवश्यकता है। शिक्षा के माध्यम से युवाओं में सहिष्णुता और आपसी समझ को बढ़ावा देना, साथ ही आर्थिक अवसरों को बेहतर करना, कट्टरपंथी विचारों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत-यूके सहयोग की संभावनाएं:
इस बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। कट्टरवाद और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग को बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहमति जताई, जिनमें शामिल हैं:
- खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान: संदिग्ध गतिविधियों और आतंकी नेटवर्क की निगरानी के लिए बेहतर समन्वय।
- साइबर सुरक्षा: ऑनलाइन कट्टरपंथी प्रचार और आतंकी भर्ती को रोकने के लिए संयुक्त प्रयास।
- प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण: दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- वैश्विक मंचों पर सहयोग: आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक नियमों और नीतियों को लागू करने के लिए एकजुटता।
इसके अलावा, दोनों नेताओं ने व्यापार, जलवायु परिवर्तन, और स्वास्थ्य जैसे अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। भारतीय प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को भारत यात्रा के लिए आमंत्रित किया, ताकि दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा किया जा सके।
जनता के लिए संदेश:
भारतीय प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में देशवासियों से भी अपील की कि वे कट्टरपंथी विचारों के खिलाफ सजग रहें और सामाजिक एकता को बनाए रखें। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र हमारी ताकत है, और हमें इसे हर हाल में बचाना होगा। कट्टरवाद और हिंसा का जवाब एकता और सहिष्णुता से देना होगा।” उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत स्थानीय प्रशासन को दें और सामुदायिक स्तर पर शांति और भाईचारे को बढ़ावा दें।
यह बातचीत न केवल भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच मजबूत संबंधों का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक स्तर पर कट्टरवाद के खिलाफ एक साझा लड़ाई की शुरुआत भी है। भारतीय प्रधानमंत्री का यह बयान कि “लोकतंत्रों में कट्टरवाद के लिए कोई स्थान नहीं है,” एक स्पष्ट संदेश है कि दोनों देश इस खतरे को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समय की मांग है कि सभी लोकतांत्रिक देश एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करें, ताकि वैश्विक शांति और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।

