by-Ravindra Sikarwar
बिहार के समस्तीपुर जिले से एक अनोखी और विवादास्पद घटना सामने आई है, जहां एक स्थानीय कार सफाई केंद्र पर कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक काफिले से जुड़ी लग्जरी वाहनों की धुलाई होती नजर आई। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिससे नेटिजंस के बीच सुरक्षा प्रोटोकॉल और सरकारी व्यवस्था पर बहस छिड़ गई है। घटना 24 अक्टूबर 2025 को दोपहर के समय हुई, जब पीएम मोदी मुजफ्फरपुर में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करने के बाद समस्तीपुर होते हुए आगे बढ़ रहे थे। वीडियो में दिखाई गई गाड़ियां काले रंग की हाई-एंड एसयूवी हैं, जो पीएम के काफिले में इस्तेमाल होने वाली वाहनों से मिलती-जुलती हैं, लेकिन कुछ स्रोतों के अनुसार यह पीएम का मुख्य वाहन हो सकता है।
घटना का विस्तृत विवरण: वीडियो में क्या दिखा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर यूजर @Neetivaan द्वारा शेयर किया गया यह 30 सेकंड का वीडियो स्थानीय कार वॉश सेंटर ‘विश्वकर्मा मोटर विजय’ के मालिक द्वारा खुद फिल्माया गया था। वीडियो में दिखाया गया है कि एक व्यस्त सड़क किनारे स्थित इस साधारण सफाई केंद्र पर चार-पांच काली एसयूवी गाड़ियां खड़ी हैं। कर्मचारी पानी की तेज धार से गाड़ियों को धो रहे हैं, बॉडी को स्क्रब कर रहे हैं और टायरों को चमका रहे हैं। पृष्ठभूमि में स्थानीय लोगों की हलचल और सामान्य बातचीत सुनाई दे रही है, जो दृश्य को और भी सामान्य बनाती है। गाड़ियों पर लगे नंबर प्लेट्स से कुछ यूजर्स ने दावा किया है कि ये पीएम के काफिले की ही हैं, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कार वॉश सेंटर समस्तीपुर के एक बाजार क्षेत्र में स्थित है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग के पास है। पीएम मोदी उस दिन बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के सिलसिले में राज्य के दौरे पर थे। उनके काफिले में आमतौर पर 20-30 वाहन शामिल होते हैं, जिनमें बुलेटप्रूफ एसयूवी, कमांड व्हीकल, एम्बुलेंस और सिक्योरिटी गाड़ियां प्रमुख हैं। वीडियो में दिखाई गई धुलाई प्रक्रिया लगभग 10-15 मिनट चली, और इसके बाद काफिला आगे बढ़ गया। सेंटर के मालिक ने वीडियो को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था, लेकिन वायरल होने के बाद वह अकाउंट डिलीट हो गया, जिससे और संदेह बढ़ गया।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं: हास्य से लेकर गंभीर चिंता तक
वीडियो को अब तक लाखों व्यूज मिल चुके हैं, और कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। एक यूजर ने लिखा, “पीएम का काफिला लोकल कार वॉश पर? यह तो सिक्योरिटी डिजास्टर है! क्या कोई चेक होता है?” जबकि दूसरे ने मजाक में कहा, “मोदी जी की गाड़ियां भी आम आदमी की तरह धुल रही हैं—वाह आत्मनिर्भरता!” कई नेटिजंस ने इसे इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी का प्रतीक बताया, कहते हुए कि सरकारी सुविधाओं के अभाव में ऐसी मजबूरी क्यों? कुछ ने इसे ‘वायरल मार्केटिंग स्टंट’ करार दिया, लेकिन अधिकांश ने एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) की सतर्कता पर सवाल उठाए। हैशटैग जैसे #PMConvoyCarWash और #BiharSecurityFail ट्रेंड कर रहे हैं।
हालांकि, कुछ फैक्ट-चेक साइट्स ने स्पष्ट किया है कि वीडियो में दिखाई गई मुख्य गाड़ी पीएम के काफिले से जुड़ी हो सकती है, लेकिन यह पुष्टि नहीं है कि सफाई के दौरान कोई सुरक्षा उल्लंघन हुआ। एक रिपोर्ट में कहा गया कि काफिले की गाड़ियां कभी-कभी यात्रा के दौरान सामान्य रखरखाव के लिए रुकती हैं, लेकिन लोकल सेंटर पर रुकना असामान्य है।
सुरक्षा और प्रोटोकॉल का पहलू: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
पीएम मोदी के काफिले की सुरक्षा अत्यंत सख्त होती है, जो एसपीजी द्वारा संचालित है। काफिले में शामिल वाहन मुख्य रूप से मर्सिडीज मेबैक एस650 गार्ड, रेंज रोवर सेंटिनल और टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसे बुलेटप्रूफ एसयूवी हैं, जो ग्रेनेड, आईईडी और हाई-कैलिबर गोलियों से बचाव करने में सक्षम हैं। इनमें जामर डिवाइसेज, सैटेलाइट कनेक्टिविटी और थ्रेट डिटेक्शन सिस्टम लगे होते हैं। सामान्यतः, रखरखाव के लिए विशेष सरकारी गैरेज या मोबाइल यूनिट्स का उपयोग होता है, न कि लोकल सेंटर।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना प्रोटोकॉल का उल्लंघन हो सकती है, क्योंकि काफिले की गाड़ियां संवेदनशील उपकरणों से लैस होती हैं, और बाहरी स्थान पर रुकना जोखिम भरा है। पूर्व एसपीजी अधिकारी ने कहा, “काफिले को कभी भी अनियोजित रुकावटों से बचना चाहिए। यह वीडियो सुरक्षा चूक का संकेत देता है।” हालांकि, बिहार पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन स्थानीय प्रशासन जांच की बात कह रहा है। केंद्र सरकार की ओर से भी चुप्पी साधी हुई है, संभवतः चुनावी माहौल के कारण।
व्यापक संदर्भ: बिहार दौरे और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां
यह घटना पीएम मोदी के बिहार दौरे के दौरान हुई, जहां वे एनडीए के पक्ष में प्रचार कर रहे थे। समस्तीपुर बिहार का एक महत्वपूर्ण जिला है, जो मुजफ्फरपुर और दरभंगा के बीच स्थित है। राज्य में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी विकासशील चरण में है, जहां लंबी यात्राओं के दौरान वाहनों को सफाई या मरम्मत की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी को उजागर करती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में केवल 40% राष्ट्रीय राजमार्गों पर पूर्ण रखरखाव सुविधाएं उपलब्ध हैं।
क्या करें आगे: सुझाव और सबक
- सुरक्षा मजबूत करें: काफिले के लिए मोबाइल वॉश यूनिट्स या प्री-अप्रूव्ड साइट्स का उपयोग अनिवार्य हो।
- जागरूकता: सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट की फैक्ट-चेकिंग जरूरी; गलत सूचना से बचें।
- इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार: बिहार जैसे राज्यों में राजमार्गों पर सरकारी सुविधाएं बढ़ाएं।
- रिपोर्टिंग: अगर ऐसी घटना दिखे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या एसपीजी को सूचित करें।
यह वीडियो न केवल एक मजेदार किस्सा बन गया है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि उच्च स्तरीय सुरक्षा और दैनिक वास्तविकताओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। जांच पूरी होने पर ही पूरी सच्चाई सामने आएगी, लेकिन फिलहाल यह बिहार की राजनीतिक और सामाजिक बहस को हवा दे रहा है।
