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by-Ravindra Sikarwar

भारतीय वायु सेना (IAF) छह दशकों से अधिक की सेवा के बाद अपने प्रतिष्ठित MiG-21 लड़ाकू जेट को विदाई देने के लिए तैयार है। यह विमान 26 सितंबर, 2025 को एयर फ़ोर्स स्टेशन चंडीगढ़ में एक विशेष समारोह के साथ औपचारिक रूप से सेवामुक्त हो जाएगा। इस ऐतिहासिक क्षण के लिए 24 सितंबर को एक पूर्ण-पोशाक पूर्वाभ्यास (full-dress rehearsal) भी आयोजित किया जाएगा।

MiG-21: भारतीय वायु सेना का रीढ़ (Backbone of IAF)
MiG-21 ने 1960 के दशक से भारतीय वायु सेना की सेवा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसे ‘रीढ़ की हड्डी’ भी कहा जाता था। सोवियत संघ द्वारा निर्मित, इस विमान ने भारत की हवाई सुरक्षा और विभिन्न युद्ध अभियानों में अपनी काबिलियत साबित की है। MiG-21 की गति, चपलता और बहुमुखी प्रतिभा ने इसे भारतीय वायु सेना के बेड़े में एक भरोसेमंद और प्रभावी लड़ाकू विमान बनाए रखा।

सेवामुक्ति का कारण और भविष्य:
दशकों की सेवा के बाद, MiG-21 बेड़े को चरणबद्ध तरीके से हटाने का निर्णय लिया गया है। इसका मुख्य कारण विमान की उम्र और आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। MiG-21 ने कई दुर्घटनाओं का सामना किया है, जिसके कारण इसे अक्सर ‘उड़ता ताबूत’ भी कहा जाता रहा है। इसकी जगह नए और अधिक उन्नत लड़ाकू विमान लेंगे, जैसे कि स्वदेशी तेजस मार्क-1ए (Tejas Mk-1A), जो भारतीय वायु सेना की भविष्य की जरूरतों को पूरा करेंगे।

विदाई समारोह का महत्व:
चंडीगढ़ में होने वाला विदाई समारोह MiG-21 की सेवाओं को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया जा रहा है। यह समारोह भारतीय वायु सेना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के समापन का प्रतीक है। इस आयोजन में वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी, MiG-21 उड़ा चुके पायलट और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। यह दिन MiG-21 की बहादुरी और गौरवशाली सेवा को याद करने का अवसर होगा।

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