By: Ravindra Sikarwar
भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा, साधना और समर्पण का प्रतीक तानसेन संगीत समारोह एक बार फिर अपने ऐतिहासिक स्वरूप में ग्वालियर में आरंभ होने जा रहा है। संगीत सम्राट तानसेन की स्मृति को समर्पित यह प्रतिष्ठित आयोजन अपने 101वें संस्करण के साथ एक नई उपलब्धि रच रहा है। 15 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलने वाले इस पंचदिवसीय समारोह का आयोजन मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग, उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत एवं कला अकादमी तथा मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। आयोजन स्थल ग्वालियर का ऐतिहासिक तानसेन समाधि परिसर है, जो चतुर्भुज मंदिर के समीप स्थित है।
इस अवसर पर देश-विदेश से आए शास्त्रीय संगीत के दिग्गज कलाकार, साधक और संगीत प्रेमी एकत्र होकर तानसेन को अपनी स्वरांजलि अर्पित करेंगे। तानसेन समाधि पर सजे भव्य मंच से निकलने वाले सुर न केवल संगीत की परंपरा को जीवंत करेंगे, बल्कि ग्वालियर की सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक मंच पर पुनः स्थापित करेंगे।
तानसेन अलंकरण और राजा मानसिंह तोमर सम्मान
101वें तानसेन संगीत समारोह की एक विशेष पहचान इसके सम्मान और अलंकरण कार्यक्रम हैं। इस वर्ष समारोह के दौरान राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण और राजा मानसिंह तोमर सम्मान प्रदान किए जाएंगे। ये सम्मान भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले कलाकारों और संस्थाओं को दिए जाते हैं।
वर्ष 2024 के लिए राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण से प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित राजा काले (मुंबई) को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने वर्षों की साधना, मंचीय प्रस्तुतियों और शास्त्रीय गायन की परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं, वर्ष 2025 का तानसेन अलंकरण सुप्रसिद्ध संतूर वादक पंडित तरुण भट्टाचार्य को प्रदान किया जाएगा। पंडित भट्टाचार्य ने संतूर वादन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ-साथ नई पीढ़ी तक इसकी शास्त्रीय गरिमा को पहुंचाया है।
इसी क्रम में राजा मानसिंह तोमर सम्मान से भी दो प्रतिष्ठित संस्थाओं को अलंकृत किया जाएगा। वर्ष 2024 के लिए यह सम्मान मण्डलेश्वर स्थित साधना परमार्थिक संस्थान समिति को तथा वर्ष 2025 के लिए ग्वालियर की रागायन संगीत समिति को प्रदान किया जाएगा। ये संस्थाएं लंबे समय से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा, साधना और प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
आयोजन का स्वरूप और समय
तानसेन संगीत समारोह का शुभारंभ 15 दिसंबर को सायंकाल लगभग 6 बजे होगा। प्रतिदिन संध्या बेला में देश के जाने-माने कलाकारों द्वारा शास्त्रीय गायन और वादन की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। भव्य मंच, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और ऐतिहासिक वातावरण के बीच होने वाली ये प्रस्तुतियां श्रोताओं को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेंगी।
सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उत्सव
तानसेन संगीत समारोह केवल एक संगीत आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की जीवंत परंपरा का उत्सव है। यह मंच गुरु-शिष्य परंपरा, रागों की साधना और सुरों की तपस्या का प्रतीक माना जाता है। 101वां आयोजन इस बात का प्रमाण है कि तानसेन की संगीत साधना आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है।
ग्वालियर में होने वाला यह समारोह न केवल संगीत प्रेमियों के लिए, बल्कि नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। सुरों, तालों और रागों के इस महासंगम के साथ 101वां तानसेन संगीत समारोह भारतीय सांस्कृतिक चेतना को एक नई ऊंचाई देने जा रहा है।
