By: Ravindra Sikarwar
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ एक और बड़ी और निर्णायक सफलता हासिल की है। भैरमगढ़, जांगला और नैमेड क्षेत्र की सरहदी जंगलों में 3 दिसंबर की सुबह शुरू हुई मुठभेड़ 4 दिसंबर की सुबह तक चली। लगभग 23 घंटे तक चले इस लंबे ऑपरेशन में डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम ने माओवादियों की कुख्यात पीएलजीए कंपनी नंबर-2 को करारा झटका दिया। इस कार्रवाई में कुल 18 माओवादी मारे गए, जिनमें कई वरिष्ठ कमांडर और महिला लड़ाके भी शामिल हैं।
मारे गए माओवादियों में रेनू ओयाम, सन्नू अवलम, नंदा मीडियम, लालू उर्फ सीताराम, राजू पूनेम, कामेश कवासी, लक्ष्मी ताती, बंडी मार्डवी, सुखी लेकाम, सोमड़ी कुंजाम, चंदू कुरसम, मासे उर्फ शांति, रीना मरकाम, सोनी मार्डवी और संगीता पदम के नाम शामिल हैं। इनमें नौ महिलाएं थीं, जो यह दर्शाता है कि माओवादी संगठन में महिलाओं की भागीदारी अभी भी काफी बड़ी है। सुरक्षा बलों को मिली जानकारी के अनुसार, मारे गए अधिकांश लोग पीएलजीए कंपनी-2 के सक्रिय सदस्य थे और कई पर लाख रुपये का इनाम भी घोषित था।
इस लंबी मुठभेड़ में सुरक्षा बलों को भी कीमत चुकानी पड़ी। बीजापुर जिले के तीन बहादुर जवान शहीद हो गए। शहीद होने वालों में प्रधान आरक्षक मोहज बड़दी, आरक्षक दुकारूराम गाँचे और जवान रमेश सोढ़ी शामिल हैं। तीनों को बीजापुर जिला मुख्यालय में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई। उनके पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद गृह ग्राम भेजा गया, जहां हजारों लोगों ने आंसुओं के साथ अंतिम विदाई दी।
मुठभेड़ में तीन अन्य जवान घायल भी हुए। घायल जवानों के नाम जनार्दन कोरम, आरक्षक सोनदेव यादव और आरक्षक रामलू हेमला हैं। सभी को तुरंत हेलीकॉप्टर से रायपुर के बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति अब स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है।
सुरक्षा बलों ने मौके से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए हैं। बरामद सामान में एक एलएमजी, एक एके-47 राइफल, चार एसएलआर, एक इंसास राइफल, कई .303 राइफलें, दो बीजीएल लॉन्चर, ग्रेनेड, बड़ी संख्या में गोला-बारूद, वॉकी-टॉकी सेट, स्कैनर, मल्टीमीटर, मेडिकल किट और माओवादी साहित्य शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माओवादी किसी बड़े हमले की फिराक में थे, शायद किसी कैंप या सुरक्षा बलों के काफिले पर बड़ा हमला करने की योजना थी, जिसे इस सफल ऑपरेशन ने पूरी तरह नाकाम कर दिया।
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में अब तक जिले में 161 माओवादी मारे जा चुके हैं, जबकि 546 को गिरफ्तार किया गया और 560 ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 तक की अवधि में कुल 219 माओवादी मारे गए, 1049 गिरफ्तार हुए और 790 ने हथियार डाल दिए। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि माओवादी संगठन अब अपने अंतिम चरण में है।
बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने कहा कि माओवादी संगठन की रीढ़ टूट चुकी है। उनके पास अब न तो मनोबल बचा है और न ही जनसमर्थन। जो बचे हैं, उनके सामने सिर्फ दो रास्ते हैं – या तो मुख्यधारा में लौट आएं या फिर इसी तरह का अंत। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर अब नक्सल मुक्ति के अंतिम और निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। आने वाले कुछ महीनों में क्षेत्र को पूरी तरह नक्सल-मुक्त करने का लक्ष्य बहुत करीब आ गया है।
यह मुठभेड़ सिर्फ 18 माओवादियों का खात्मा नहीं है, बल्कि यह उस विचारधारा पर भी करारा प्रहार है जो दशकों से बस्तर के आदिवासी इलाकों में खून बहा रही थी। सुरक्षा बलों की लगातार बढ़ती सफलता और आत्मसमर्पण करने वालों की बढ़ती संख्या यह संदेश दे रही है कि लाल आतंक का अंत अब बहुत近 है। बस्तर अब शांति, विकास और समृद्धि की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
