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by-Ravindra Sikarwar

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक सड़क हादसे के केस में महिंद्रा थार गाड़ी चलाने वाले चालक पर तीखी फटकार लगाते हुए कहा, “थार जैसी धौंस जमाने वाले गाड़ी चालक समाज के लिए खतरा हैं। वे गुंडई करने वाले और मानसिक रूप से अस्थिर लोग होते हैं।” जस्टिस ए.एस. चंदुरकर और जस्टिस राजेश पाटिल की बेंच ने यह टिप्पणी 8 नवंबर 2025 को सुनवाई के दौरान की, जब थार ड्राइवर ने रेड लाइट तोड़कर एक स्कूटी सवार महिला को टक्कर मार दी थी। अदालत ने आरोपी को 50,000 रुपये का दंड, 15 दिन की कम्युनिटी सर्विस और ड्राइविंग लाइसेंस 6 महीने के लिए सस्पेंड करने का हुक्म सुनाया।

वाकया 14 जुलाई 2025 का है, जब 28 साल का आरोपी विक्रांत मेहता (बदला नाम), जो जिम इंस्ट्रक्टर हैं, ने बांद्रा के वर्ली सी लिंक के पास लाल सिग्नल को अनदेखा कर दिया। उनकी थार ने 35 वर्षीय स्कूटी चालक प्रिया शर्मा (बदला नाम) को जोरदार धक्का मारा, जिससे महिला की दाहिनी टांग टूट गई और उसे 3 महीने अस्पताल में गुजारने पड़े। सीसीटीवी में साफ दिखा कि थार चालक ने सिग्नल जंप किया और तेज स्पीड में था। प्रिया, जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, ने कोर्ट में गवाही दी कि हादसे के बाद आरोपी ने माफी नहीं मांगी, बल्कि गालियां देकर भागने की कोशिश की।

अदालत ने अपने 12 पन्नों के फैसले में ठर मालिकों की सोच पर सवाल उठाया। जजों ने कहा, “थार जैसी बड़ी और आक्रामक गाड़ियां खरीदने वाले अक्सर सड़क पर रौब झाड़ने की मानसिकता रखते हैं। वे छोटी गाड़ियों को धमकाते हैं। यह ‘रोड रेज’ का प्रतीक बन गई है।” कोर्ट ने महाराष्ट्र मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 183 (खतरनाक ड्राइविंग) और 279 (लापरवाही से चालन) के तहत सजा सुनाई। जुर्माना प्रिया के इलाज और मानसिक पीड़ा के लिए दिया जाएगा। कम्युनिटी सर्विस में आरोपी को बांद्रा ट्रैफिक पुलिस के साथ 15 दिन तक सड़क सुरक्षा जागरूकता मुहिम चलानी होगी।

विक्रांत के वकील ने तर्क दिया कि थार एक पॉपुलर एसयूवी है और इसे बदनाम करना गलत है। लेकिन कोर्ट ने इसे ठुकराते हुए कहा, “हमने कई केस देखे हैं जहां थार ड्राइवर हॉर्न बजाकर, हाई बीम जलाकर और ओवरटेक करके दहशत फैलाते हैं। गाड़ी नहीं, ड्राइवर की सोच दोषी है।” अदालत ने मुंबई ट्रैफिक पुलिस को थार और इसी तरह की बड़ी गाड़ियों (फॉर्च्यूनर, स्कॉर्पियो) पर खास निगरानी का आदेश दिया। पिछले 2 साल में मुंबई में थार से जुड़े 180 रोड रेज केस दर्ज हुए, जिनमें 42 फीसदी में रेड लाइट जंपिंग थी।

महिंद्रा कंपनी ने कोर्ट की टिप्पणी पर कहा, “थार एक सुरक्षित वाहन है। हम गलत इस्तेमाल की निंदा करते हैं।” कंपनी ने बताया कि 2025 में थार की बिक्री 1.2 लाख यूनिट्स पार कर चुकी है। थार मालिकों के ऑनलाइन ग्रुप ‘थार ओनर्स ग्रुप’ ने बयान को ‘भेदभावपूर्ण’ बताया और #TharIsNotRogue कैंपेन चलाया।

मुंबई ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी संजय लाटकर ने कहा, “थार और बड़ी गाड़ियों के लिए स्पेशल चेकिंग शुरू करेंगे। हॉर्न, स्पीड और सिग्नल उल्लंघन पर सख्ती होगी।” प्रिया शर्मा ने फैसले पर खुशी जताई और कहा, “यह मेरे लिए नहीं, सभी छोटे वाहन चालकों के लिए इंसाफ है।” अपील की सुनवाई 22 नवंबर को होगी। यह फैसला सड़क सुरक्षा और ड्राइवरों की मनोवृत्ति पर बहस छेड़ने वाला साबित हो रहा है।

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