By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश में एक बार फिर जातीय आरक्षण और सामाजिक समरसता का मुद्दा गरमा गया है। कारण बने हैं अजाक्स (अनुसूचित जाति कल्याण संघ) के नवनिर्वाचित प्रांतीय अध्यक्ष और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा। 23 नवंबर को भोपाल के तुलसीनगर स्थित अंबेडकर मैदान में आयोजित अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा ने मंच से जो कहा, उसका वीडियो अब वायरल हो चुका है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा, “मैं तो यह कहता हूं कि जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देगा या उससे रिश्ता नहीं जोड़ेगा, तब तक आरक्षण खत्म नहीं होना चाहिए।” इस बयान के सामने आते ही पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। ब्राह्मण संगठनों ने इसे न केवल घोर आपत्तिजनक बताया है, बल्कि बेटियों का अपमान और सवर्ण समाज के खिलाफ घृणा फैलाने वाला करार दिया है।
संतोष वर्मा की इस टिप्पणी को लेकर सबसे तीखी प्रतिक्रिया अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज की ओर से आई है। प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्र ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का इस तरह का बयान देना अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा, “बेटी कोई दान की वस्तु नहीं होती। विवाह दो परिवारों का आपसी निर्णय और सम्मान का विषय है, इसे आरक्षण की राजनीति से जोड़कर बेटियों का अपमान करना निंदनीय है।” मिश्र ने आगे कहा कि जिस राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ‘लाड़ली लक्ष्मी’, ‘लाड़ली बहना’ जैसी योजनाएं चला रही हो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा दे रहे हों, उसी राज्य के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का बेटियों के बारे में इस तरह का अमर्यादित बयान देना न केवल शर्मनाक है, बल्कि उनके पद की गरिमा के भी खिलाफ है। ब्राह्मण समाज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि संतोष वर्मा के खिलाफ तत्काल प्रभाव से निलंबन और विभागीय जांच की जाए।
वायरल वीडियो में संतोष वर्मा को यह भी कहते सुना जा सकता है कि आरक्षण तभी समाप्त हो जब समाज में पूर्ण समरसता आ जाए और अंतरजातीय विवाह आम हो जाएं। लेकिन जिस भाषा और उदाहरण का उन्होंने इस्तेमाल किया, वह सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। कई लोगों ने इसे केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं, बल्कि सभी बेटियों के सम्मान पर हमला बताया। एक अन्य ब्राह्मण संगठन ‘परशुराम सेना’ ने तो चेतावनी दी है कि यदि 72 घंटे में संतोष वर्मा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। सोशल मीडिया पर #SuspendSantoshVerma और #BetiNahiDan हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं। कई महिला संगठनों ने भी इस बयान की निंदा की है और कहा है कि बेटी को ‘दान’ की वस्तु बताना मध्ययुगीन सोच का प्रमाण है।
दूसरी ओर अजाक्स के कुछ पदाधिकारियों ने संतोष वर्मा का बचाव करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है और वे तो सामाजिक समरसता की बात कर रहे थे। लेकिन वीडियो में साफ-साफ ‘बेटी दान’ और ‘ब्राह्मण’ शब्दों का इस्तेमाल सुनाई दे रहा है, जिसके बाद बचाव कमजोर पड़ रहा है। राजनीतिक गलियारों में भी इस बयान को लेकर हलचल है। विपक्षी दल कांग्रेस इसे सरकार की नाकामी बता रहा है तो सत्तारूढ़ भाजपा के कुछ नेता इसे व्यक्तिगत बयान बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
फिलहाल संतोष वर्मा की इस टिप्पणी ने एक बार फिर आरक्षण, अंतरजातीय विवाह और सामाजिक समरसता जैसे ज्वलंत मुद्दों को गरमा दिया है। ब्राह्मण समाज ने साफ कह दिया है कि वे इस मामले को यूं ही खत्म नहीं होने देंगे। दूसरी ओर दलित संगठनों के भीतर भी दो मत हैं – कुछ लोग इसे गलत शब्द चयन मान रहे हैं तो कुछ इसे साहसिक आवाज बता रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सार्वजनिक मंच पर इस तरह की भाषा शोभा देती है? और यदि नहीं, तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? आने वाले कुछ दिन इस विवाद की तपिश को और बढ़ाने वाले हैं, क्योंकि अब यह केवल एक बयान नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, अफसरशाही की मर्यादा और सामाजिक समीकरणों का सवाल बन चुका है।
