By: Ravindra Sikarwar
ग्वालियर में पिछले दो दिनों से लापता एक बुजुर्ग व्यक्ति का शव आखिरकार कुएं से बरामद होने के बाद पूरे इलाके में शोक और सनसनी का माहौल बन गया। मृतक की पहचान 70 वर्षीय मदनलाल सविता के रूप में हुई है, जो घर से आधी रात को निकले थे और उसके बाद वापस नहीं लौटे। नगर निगम द्वारा कुएं की सफाई कराए जाने के दौरान दलदल में फंसा उनका शव मिलने से इस रहस्यमय गुमशुदगी का दुखद अंत सामने आया।
परिजनों के अनुसार, मदनलाल सविता पिछले कुछ समय से अनिद्रा की बीमारी से पीड़ित थे। रात में उन्हें नींद नहीं आती थी, जिसके कारण वे मानसिक रूप से काफी परेशान रहते थे। बताया गया है कि इसी बीमारी के चलते वे अवसाद की स्थिति में भी थे। परिजनों ने आशंका जताई है कि इसी मानसिक परेशानी के कारण वे देर रात घर से निकल गए थे।
जानकारी के मुताबिक, बुजुर्ग रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात अचानक घर से बाहर चले गए। सुबह जब वे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने आसपास उनकी तलाश शुरू की। मोहल्ले, रिश्तेदारों और परिचितों के यहां पूछताछ की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने थाने में उनकी गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तलाश अभियान शुरू किया। इसी दौरान सोमवार दोपहर को एक कुएं के पास बुजुर्ग के कपड़े मिले, जिससे संदेह और गहरा गया। कपड़े मिलने की सूचना के बाद पुलिस और नगर निगम को जानकारी दी गई। कुआं काफी पुराना और गाद से भरा हुआ था, इसलिए तत्काल भीतर उतरकर तलाश करना संभव नहीं था।
मंगलवार को नगर निगम की टीम ने मशीनों की मदद से कुएं की सफाई शुरू कराई। काफी मशक्कत के बाद जब कुएं में जमी दलदल हटाई गई, तो भीतर बुजुर्ग का शव दिखाई दिया। शव को बाहर निकालने के बाद मौके पर मौजूद परिजनों की आंखें नम हो गईं। यह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा। फिलहाल मामले को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के रूप में दर्ज कर जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मदनलाल सविता शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और किसी से उनका कोई विवाद नहीं था। वे अक्सर अपनी नींद न आने की समस्या को लेकर परेशान रहते थे। मोहल्ले के लोगों के अनुसार, उन्होंने कई बार इलाज भी कराया था, लेकिन बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई थी।
इस घटना के बाद इलाके में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। लोग मानते हैं कि बुजुर्गों और अकेले रहने वाले लोगों में अवसाद और मानसिक परेशानी को गंभीरता से लेने की जरूरत है। समय रहते काउंसलिंग और पारिवारिक सहयोग मिल जाए, तो ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है।
कुल मिलाकर, ग्वालियर में हुई यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। मानसिक बीमारियों को नजरअंदाज करना कितना घातक हो सकता है, यह इस दुखद घटना से साफ दिखाई देता है। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आ पाएगी, लेकिन फिलहाल शहर इस दर्दनाक हादसे से गहरे शोक में डूबा हुआ है।
