by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली/ग्वालियर: भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्र और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार दिग्गज टेस्ला भारत में अपनी कारों के विनिर्माण में फिलहाल कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है। मंत्री के अनुसार, टेस्ला की योजना भारत में केवल शोरूम खोलने तक सीमित है, न कि उत्पादन इकाई स्थापित करने की।
मंत्री का बयान और इसके निहितार्थ:
मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा देने और वैश्विक कंपनियों को देश में विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा, “टेस्ला का इरादा यहां सिर्फ शोरूम खोलने का है। वे विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने में रुचि नहीं ले रहे हैं।” यह टिप्पणी उन पिछली उम्मीदों और अटकलों के बिल्कुल विपरीत है जिनमें टेस्ला के भारत में एक बड़ा विनिर्माण केंद्र स्थापित करने की बात कही जा रही थी।
पूर्व उम्मीदें और ‘मेक इन इंडिया’ से जोड़ना:
लंबे समय से ऐसी चर्चाएं थीं कि एलन मस्क के नेतृत्व वाली टेस्ला भारत को अपने वैश्विक उत्पादन आधार के रूप में देख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के बीच हुई मुलाकातों ने भी इन अटकलों को बल दिया था। भारत सरकार ने हाल ही में एक नई ईवी नीति भी पेश की थी, जिसके तहत उन कंपनियों को आयात शुल्क में कमी की पेशकश की गई थी जो देश में न्यूनतम निवेश के साथ विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध थीं। इस नीति को मुख्य रूप से टेस्ला जैसी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया माना जा रहा था।
टेस्ला को ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा था, जो न केवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लाएगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा और भारत को वैश्विक ईवी विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। मंत्री का मौजूदा बयान इन उम्मीदों पर पानी फेरता नजर आ रहा है।
केवल शोरूम का मतलब क्या?
यदि टेस्ला केवल शोरूम खोलती है और भारत में कारों का आयात करती है, तो इसका मतलब होगा कि भारतीय उपभोक्ताओं को ये इलेक्ट्रिक वाहन उच्च आयात शुल्क के कारण काफी महंगे मिलेंगे। भारत में आयातित कारों पर भारी शुल्क लगता है, जो उन्हें औसत भारतीय खरीदार की पहुंच से दूर कर देता है। यह स्थिति भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और स्थानीय ईवी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के सरकार के व्यापक लक्ष्य के साथ भी मेल नहीं खाती।
भारत की ईवी महत्वाकांक्षाएँ और भविष्य:
भारत सरकार का लक्ष्य देश को इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और अपनाने के लिए एक प्रमुख केंद्र बनाना है। ‘फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स’ (FAME) योजना और उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं जैसी पहलें स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। टेस्ला जैसी एक बड़ी वैश्विक खिलाड़ी का विनिर्माण में अनिच्छुक होना भारत की स्थानीय उत्पादन क्षमताओं को विकसित करने की गति को धीमा कर सकता है, हालांकि यह अन्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ईवी निर्माताओं के लिए अवसर खोल सकता है जो भारत में निवेश करने के इच्छुक हैं।
निष्कर्ष:
भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी का बयान टेस्ला के भारत में विनिर्माण योजनाओं को लेकर एक स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार की उम्मीदें, जो पहले एक पूर्ण उत्पादन इकाई की ओर थीं, अब केवल बिक्री और आयात तक सीमित हो सकती हैं। यह स्थिति भारत के ईवी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए नई रणनीतिक चुनौतियों और अवसरों को सामने लाती है।
