by-Ravindra Sikarwar
मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) ने राज्य की पहली स्व-निर्मित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है। उज्जैन से जावरा के बीच बनने वाले 98.73 किलोमीटर लंबे, 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के लिए तकनीकी बोलियों की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
छह कंपनियां हुईं तकनीकी रूप से पात्र:
MPRDC की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कुल कई कंपनियों ने इस परियोजना में भागीदारी के लिए आवेदन किया था, जिनमें से छह प्रमुख कंपनियां तकनीकी बोली चरण में क्वालिफाई हुई हैं। इनमें Ceigall Infra, GR Infraprojects जैसी अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां शामिल हैं। अब इन कंपनियों की वित्तीय बोलियां (Financial Bids) आमंत्रित की जाएंगी, जिसके बाद अंतिम ठेकेदार का चयन किया जाएगा।
परियोजना का महत्व:
यह एक्सप्रेसवे उज्जैन से जावरा तक सीधा और तेज मार्ग प्रदान करेगा। यह न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा देगा बल्कि मालवाहक वाहनों की आवाजाही को भी सुगम बनाएगा। परियोजना के पूरे होने के बाद मालवा क्षेत्र की कनेक्टिविटी में जबरदस्त सुधार होगा और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।
एक्सप्रेसवे की विशेषताएं:
- लंबाई: 98.73 किलोमीटर
- लेन: 4-लेन (एक्सेस-कंट्रोल्ड)
- मॉडल: ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट (पूरी तरह नया मार्ग निर्माण)
- प्रथम स्व-निर्मित एक्सप्रेसवे: मध्यप्रदेश सरकार का यह पहला एक्सप्रेसवे है जिसे स्वयं राज्य स्तर पर विकसित किया जा रहा है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव:
इस परियोजना से मालवा क्षेत्र में निवेश, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उज्जैन जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहर से तेज और सुरक्षित संपर्क उपलब्ध होने से यात्रियों को सुविधा होगी। साथ ही, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
निष्कर्ष:
उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने वाला कदम है। तकनीकी बोलियों के पूरा होने के बाद वित्तीय बोलियों की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। माना जा रहा है कि यह परियोजना न केवल यातायात व्यवस्था में सुधार करेगी, बल्कि मालवा क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगी।
