By: Ravindra Sikarwar
जबलपुर की स्पेशल आर्म्ड फोर्स (SAF) की 6वीं बटालियन इन दिनों एक बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रैवलिंग अलाउंस (TA) घोटाले के खुलासे ने पुलिस विभाग से लेकर प्रशासन तक को हिला दिया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में कई नए नाम सामने आ रहे हैं। इस बीच घोटाले के मुख्य आरोपी और टीए शाखा के बाबू सत्यम शर्मा के निलंबन के तुरंत बाद फरार होने ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है। वहीं इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मानसिक तनाव में आए आरक्षक अभिषेक झारिया द्वारा आत्महत्या किए जाने ने विभाग में आंतरिक व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे सामने आया घोटाला?
एसएएफ की 6वीं बटालियन में लंबे समय से टीए बिलों में गड़बड़ियों की शिकायतें आ रही थीं। बीते कुछ महीनों से अधिकारियों को बार-बार कुछ संदिग्ध भुगतान और रिकॉर्ड में विसंगतियां नजर आईं। जब डेटा का गहराई से विश्लेषण शुरू हुआ तो पता चला कि कई टीए बिल काल्पनिक यात्राओं पर आधारित थे, जिनमें वास्तविक रूप से यात्रा न करने वाले कर्मचारियों के नाम पर भी भुगतान हुआ।
जैसे ही हेडक्वॉर्टर ने प्राथमिक जांच शुरू की, मामले की परतें खुलती चली गईं। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ कि लगभग दो करोड़ रुपये गलत तरीके से टीए के नाम पर निकाले गए। अधिकारियों को जब प्रमाण मिले तो घोटाले की परिधि और भी बढ़ती चली गई।
मास्टरमाइंड बताया जा रहा है बाबू सत्यम शर्मा
जांच में सबसे बड़ा नाम टीए शाखा में कार्यरत बाबू सत्यम शर्मा का सामने आया। उन पर आरोप है कि उन्होंने—
- फर्जी टीए बिल तैयार किए
- रिकॉर्ड में हेरफेर किया
- खातों के जरिए गलत भुगतान करवाए
- कई कर्मचारियों के नाम पर बिल लगाकर राशि का दुरुपयोग किया
घोटाले में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया, लेकिन निलंबन आदेश जारी होते ही वह अचानक गायब हो गए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उनके फर्जीवाड़े के तरीके इतने जटिल थे कि वह कई महीनों से बिना पकड़े इसे अंजाम देता रहा।
उनकी लोकेशन और गतिविधियों को ट्रेस करने के लिए पुलिस की अलग टीम काम कर रही है, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
आरक्षक अभिषेक झारिया की आत्महत्या से हड़कंप
इस घोटाले का सबसे दर्दनाक पहलू सामने तब आया, जब इसी बटालियन में कार्यरत आरक्षक अभिषेक झारिया ने तनाव में आकर आत्महत्या कर ली। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि अभिषेक का नाम भी उन कर्मचारियों की सूची में था, जिनके नाम से फर्जी टीए बिल बनाए गए थे।
हालांकि यह साफ नहीं है कि अभिषेक इस फर्जीवाड़े में सीधे शामिल था या अनजाने में उसके नाम का उपयोग किया गया, लेकिन विभागीय जांच और पूछताछ की संभावना के चलते वह गहरी मानसिक परेशानी में था। परिजनों का कहना है कि अभिषेक पर दबाव और अपमान का भय बहुत ज्यादा था, जिसके चलते उसने यह चरम कदम उठाया।
उसकी मौत के बाद पूरा पुलिस विभाग सदमे में है और अब जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं उसे गलत तरीके से इस पूरे मामले में फंसाया तो नहीं जा रहा था।
जांच में और नाम जुड़े, नेटवर्क बड़ा होने की आशंका
जैसे-जैसे दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ रही है, कई नए कर्मचारियों के नाम सामने आ रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार—
- कुछ कर्मचारी जानते-बूझते इस खेल का हिस्सा थे
- कुछ कर्मचारियों के नाम और डाटा का उपयोग उनके बिना जानकारी के किया गया
- ट्रांजेक्शन में कई स्तरों पर अनियमितताएं मिली हैं
जांच अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि का फर्जी भुगतान किसी एक व्यक्ति के बूते की बात नहीं है। इसलिए संभावना है कि यह पूरी एक संगठित आंतरिक नेटवर्क की मदद से संचालित किया गया घोटाला है।
विभाग में मचा हड़कंप, अधिकारी सतर्क
मामले के उजागर होने के बाद SAF और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। अब टीए शाखा से जुड़े सभी रिकॉर्ड, रजिस्टर, पुराने भुगतान, बैंक की प्रविष्टियां और बिलों को दोबारा खंगाला जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों ने साफ किया है कि—
- किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा
- जांच पूरी तरह पारदर्शी होगी
- गायब बाबू सत्यम शर्मा को जल्द खोजकर गिरफ्तार किया जाएगा
- आरक्षक अभिषेक की आत्महत्या के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच होगी
कर्मचारियों में दहशत का माहौल
बटालियन में तैनात कई कर्मचारियों ने बताया कि इस घोटाले के सामने आने के बाद से यूनिट में माहौल तनावपूर्ण है। कई कर्मचारी आशंका जता रहे हैं कि उनके नाम का दुरुपयोग किया गया हो सकता है। इस कारण कर्मचारियों में भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है।
जबलपुर एसएएफ की 6वीं बटालियन में सामने आया यह 2 करोड़ रुपये का टीए घोटाला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि विभागीय प्रणाली की उन कमजोरियों का भी संकेत है, जिनका फायदा उठाकर लंबे समय तक भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।
मुख्य आरोपी सत्यम शर्मा का फरार होना और एक आरक्षक की आत्महत्या इस पूरे मामले को और जटिल बना रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि इस गड़बड़ी में कितने लोग शामिल थे और किस स्तर पर इस फर्जीवाड़े को छुपाया गया।
