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by-Ravindra Sikarwar

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राज्य में कथित स्कूल नौकरी घोटाले से जुड़ी 26,000 शिक्षकों की भर्ती रद्द करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की पुनर्विचार की याचिका में कोई योग्यता नहीं पाई और अपने पिछले फैसले को बरकरार रखा।

पृष्ठभूमि और प्रमुख बिंदु

  • मूल फैसला: 22 अप्रैल को, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) द्वारा 2016 की भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था। इस फैसले ने राज्य में बड़े पैमाने पर एक भर्ती घोटाले का खुलासा किया था।
  • पुनर्विचार याचिका: राज्य सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए एक याचिका दायर की थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि सभी नियुक्तियों को सामूहिक रूप से रद्द करना अनुचित है, क्योंकि इससे उन उम्मीदवारों पर भी असर पड़ा है जिन्होंने योग्यता के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। राज्य ने न्यायालय से इस मामले पर दोबारा विचार करने और व्यक्तिगत रूप से जांच करने का अनुरोध किया था।
  • कोर्ट का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई नई जानकारी या कानूनी आधार नहीं है जो पुनर्विचार को उचित ठहराता हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब पूरी भर्ती प्रक्रिया ही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से भरी हुई थी, तो उसमें से ‘योग्य’ और ‘अयोग्य’ उम्मीदवारों को अलग करना संभव नहीं था।
  • प्रभाव: इस फैसले से 26,000 से अधिक लोगों की नौकरी पर संकट आ गया है और यह राज्य सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह निर्णय भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायालय की सख्त कार्रवाई को दर्शाता है।

भविष्य की राह:
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद, राज्य सरकार को अब रद्द की गई नौकरियों के लिए एक नई और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इस निर्णय ने भर्ती घोटाले के दोषियों के खिलाफ जांच को और भी तेज कर दिया है। यह फैसला एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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