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by-Ravindra Sikarwar

आंध्र प्रदेश: शनिवार सुबह एकादशी के पावन अवसर पर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ ने एक ऐसी त्रासदी को जन्म दे दिया, जिसने पूरे राज्य को सदमे में डाल दिया। श्रीकाकुलम जिले के कासिबुग्गा स्थित इस मंदिर में भगदड़ मचने से कम से कम नौ भक्तों की जान चली गई, जबकि 15 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में आठ महिलाएं और एक 13 वर्षीय बालक शामिल हैं। यह घटना न केवल भक्तों के विश्वास को हिला रही है, बल्कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर कर रही है। मंदिर प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगे हैं, और पुलिस ने मंदिर मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

एकादशी की भक्ति में छिपी आपदा:
कासिबुग्गा का श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर एक निजी निर्माण है, जो लगभग 12 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है। यह मंदिर एंडोमेंट्स विभाग के अधीन नहीं है और इसका प्रबंधन एक निजी व्यक्ति द्वारा किया जाता है। सामान्यतः शनिवार को यहां 1,500 से 2,000 भक्त दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन कार्तिक मास में एकादशी का संयोग होने से भीड़ अचानक 20,000 से अधिक हो गई। सुबह के समय भक्तों की संख्या तेजी से बढ़ी, और मंदिर के संकरे रास्ते पर दबाव पड़ने लगा। वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि महिलाएं पूजा की थालियां लिए सीढ़ियों पर धक्कम-धक्के में उलझ गईं, जिससे अफरा-तफरी मच गई।

घटना सुबह करीब 7 बजे हुई, जब भक्त मंदिर के मुख्य द्वार की ओर बढ़ रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आयोजन और निकास के लिए एक ही संकीर्ण गेट का उपयोग किया जा रहा था, जो भीड़ को संभालने में पूरी तरह असफल साबित हुआ। निर्माणाधीन मंदिर में लगे लोहे के रेलिंग भी कमजोर थे, जो टूटने से स्थिति और बिगड़ गई। एक भक्त ने बताया, “हम दर्शन के लिए घंटों इंतजार कर रहे थे, लेकिन अचानक भीड़ ने हमें घेर लिया। चीखें और धक्के सुनाई दिए, और सब कुछ अंधेरे में बदल गया।” मंदिर के अंदरूनी हिस्से में पहुंचते ही भगदड़ फैल गई, जिसमें कई लोग कुचल दिए गए।

मृतकों की पहचान में अधिकांश महिलाएं हैं, जो परिवार के साथ दर्शन के लिए आई थीं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। जिलाधिकारी कार्यालय ने पुष्टि की कि घटना के तुरंत बाद राहत कार्य शुरू हो गए, लेकिन शुरुआती देरी ने स्थिति को और जटिल बना दिया।

सुरक्षा की पोल खुली: निर्माणाधीन मंदिर में भीड़ का प्रबंधन क्यों विफल?
यह मंदिर हाल ही में बनाया गया है, और इसका निर्माण एक परिवार द्वारा निजी धन से कराया गया। मंदिर अधिकारियों का दावा है कि भूमि भगवान वेंकटेश्वर के नाम पर पंजीकृत है और कोई दान नहीं लिया जाता। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माणाधीन अवस्था में इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। एक ही रास्ते का उपयोग, अस्थायी रेलिंग्स और पर्याप्त पुलिस बल की कमी मुख्य कारण बने। मंदिर मालिक ने इसे “ईश्वरीय लीला” करार दिया, लेकिन यह बयान विवादास्पद साबित हो रहा है।

पुलिस ने मंदिर मालिक के खिलाफ ‘लापरवाह हत्या’ (कुल्पेबल होमिसाइड) का मामला दर्ज किया है। जांच में सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का सहारा लिया जा रहा है। राज्य सरकार ने मंदिर में प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है, ताकि आगे की दुर्घटनाओं को रोका जा सके। गृह मंत्री वंग्लापुड़ी अनीता ने कहा, “यह निजी मंदिर होने के बावजूद, भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी प्रबंधन की थी। हम सख्त कार्रवाई करेंगे।”

नेताओं की प्रतिक्रियाएं और राहत प्रयास:
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे “हृदय विदारक” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “कासिबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर में भगदड़ से हुई मौतें बेहद दुखद हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।” सीएम ने अधिकारियों को घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने और राहत कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए। साथ ही, एक उच्च स्तरीय जांच का आदेश भी जारी किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया और पीएमएनआरएफ से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुदान राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “यह दुखद घटना मुझे व्यथित कर रही है। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शोक संदेश जारी कर परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने भी श्रद्धांजलि दी।

विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने राज्य सरकार से पीड़ितों को तत्काल सहायता प्रदान करने की अपील की। मंत्रिपरिषद के सदस्य नारा लोकेश ने इसे “अनियोजित भीड़” का परिणाम बताया और कहा कि अधिकांश भक्त पहली बार मंदिर आए थे, जिससे प्रबंधन की तैयारी अपर्याप्त साबित हुई।

2025 की तीसरी ऐसी त्रासदी: सबक लेने की जरूरत
यह घटना आंध्र प्रदेश में 2025 की तीसरी बड़ी मंदिर दुर्घटना है, जो धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जनवरी में तिरुपति के बैरागी पत्तेदा में वेंकटेश्वर मंदिर के वैकुंठ द्वार दर्शन टिकट वितरण के दौरान छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 40 से अधिक घायल हुए थे। अप्रैल में विशाखापत्तनम के सिंहचलम स्थित श्री वराह लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर में बारिश से भीगी दीवार ढहने से सात भक्त मारे गए थे। कुल मिलाकर, इस साल राज्य में मंदिर संबंधी घटनाओं में 22 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि निजी मंदिरों में सरकारी निगरानी की कमी और भीड़ प्रबंधन के आधुनिक उपकरणों (जैसे सीसीटीवी, अलग-अलग प्रवेश-निकास द्वार) का अभाव ऐसी विपत्तियों को न्योता देता है। पीड़ित परिवारों ने मांग की है कि मृतकों को उचित मुआवजा और घायलों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाए। पुलिस जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।

यह त्रासदी भक्तों की आस्था को झकझोर रही है, लेकिन उम्मीद है कि इससे सबक लेकर भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। कासिबुग्गा मंदिर अब शोकमग्न है, जहां भक्तों की प्रार्थनाएं घायलों के जल्द स्वस्थ होने के लिए गूंज रही हैं।

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