By: Ravindra Sikarwar
वृंदावन में निकाली गई प्रारंभिक यात्रा
वृंदावन में प्रेम मंदिर के चिंतामणि कुंज से इस्कॉन मंदिर तक श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति ज्योति यात्रा का आयोजन किया गया। इस यात्रा में कई साधु-संतों के साथ हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रतिभागी नारे लगा रहे थे जैसे “न्याय करो, अधिकार दो, जन्मभूमि लौटा दो” और “आ गए अवध बिहारी, अब आएंगे कृष्ण कन्हाई”।
देश भर में फैलेगा आंदोलन
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में हिंदू पक्ष के प्रमुख याचिकाकर्ता और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने घोषणा की कि यह ज्योति यात्रा पूरे देश में आयोजित की जाएगी। यात्रा हिंदू, सिख, जैन तथा बौद्ध समुदायों के घरों तक पहुंचेगी।
इसके जरिए लोगों को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ऐतिहासिक महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही, पूर्वजों की उन गाथाओं को याद दिलाया जाएगा जिनमें मुगल काल के दौरान सनातन धर्म की रक्षा के लिए कठिन संघर्ष किए गए। यात्रा का उद्देश्य समाज को एकजुट करके इस मुक्ति संकल्प में शामिल करना है।
संतों का समर्थन और आह्वान
कार्यक्रम की अध्यक्षता पीपाद्वाराचार्य बाबा बलराम दास ने की। उन्होंने हिंदू समाज से आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की अपील की।
महामंडलेश्वर डॉ. आदित्यानंद महाराज ने कहा कि यह यात्रा हिंदुओं में जागृति लाएगी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को सुनिश्चित करेगी।
कृष्णानंद महाराज ने जोश भरे अंदाज में कहा कि महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा जलाई गई यह ज्योति कोई हिंदू नहीं बुझने देगा, जब तक भगवान कृष्ण का मूल जन्म स्थल (गर्भगृह) मुक्त नहीं हो जाता।
डॉ. लक्ष्मी गौतम ने विश्वास व्यक्त किया कि देश की महिलाएं (मातृशक्ति) सनातन धर्म की रक्षा के लिए इस ज्योति को हमेशा जलाए रखेंगी।
इस मौके पर वेदांती महाराज, डॉ. रामविलास चतुर्वेदी, श्यामानंद महाराज, देवानंद महाराज, रामदास महाराज और ईश्वरचंद्र रावत सहित कई अन्य संतों ने अपने विचार साझा किए और आंदोलन को मजबूत समर्थन दिया।

