by-Ravindra Sikarwar
बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतिंद्र सिद्धारमैया ने एक कार्यक्रम में अपने पिता की राजनीतिक स्थिति पर बड़ा बयान दिया है, जिसने राज्य में कांग्रेस पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को हवा दे दी है। यतिंद्र ने कहा कि उनके पिता राजनीतिक जीवन के अंतिम दौर में हैं और अब उन्हें एक मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतीश जारकीहोली को प्रगतिशील विचारधारा वाले नेताओं के लिए एक आदर्श बताते हुए उन्हें सिद्धारमैया की विरासत को आगे ले जाने के लिए उपयुक्त बताया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल के आधे समय को पूरा करने वाली है और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। हालांकि, यतिंद्र ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका मतलब तत्काल परिवर्तन से नहीं था और पार्टी हाईकमान ने नेतृत्व में कोई बदलाव न होने की पुष्टि की है।
यतिंद्र के बयान का पूरा विवरण: विधान परिषद सदस्य यतिंद्र सिद्धारमैया ने बुधवार को बेलगावी में एक कार्यक्रम में मंत्री सतीश जारकीहोली की मौजूदगी में कहा, “मेरे पिता राजनीतिक जीवन के अंतिम चरण में हैं। इस समय उन्हें एक मजबूत विचारधारा और प्रगतिशील सोच वाले नेता की जरूरत है, जिनके लिए वे मार्गदर्शक बन सकें। जारकीहोली ऐसे व्यक्ति हैं जो कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को बनाए रख सकते हैं और पार्टी को प्रभावी ढंग से नेतृत्व दे सकते हैं। मुझे विश्वास है कि ऐसी वैचारिक प्रतिबद्धता वाले नेता मिलना दुर्लभ है और मैं चाहता हूं कि वे यह अच्छा काम जारी रखें।” बाद में पत्रकारों से बातचीत में यतिंद्र ने स्पष्ट किया कि उनके पिता ने पहले ही घोषणा की है कि वे 2028 के बाद चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने केवल इतना कहा कि मेरे पिता सामाजिक न्याय और कांग्रेस पार्टी के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं। सतीश जारकीहोली के पास भी ऐसी ही आदर्श और विश्वास हैं। मेरे पिता ने कहा है कि वे 2028 के बाद चुनाव नहीं लड़ेंगे और मैंने केवल इतना कहा कि वे पार्टी में ऐसे सिद्धांतों वाले युवा नेताओं के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं।” उत्तराधिकार पर उन्होंने जोड़ा, “हां, सतीश जारकीहोली निश्चित रूप से सिद्धारमैया की जगह भरने की क्षमता रखते हैं। वे उन बहुत कम सक्षम नेताओं में से हैं जो वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध हैं।”
डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया: उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, जिन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जाता है, ने यतिंद्र के बयान पर सतर्कता से जवाब दिया। आंध्र प्रदेश के मंत्रालय में राघवेंद्र स्वामी मठ की यात्रा के दौरान और रायचूर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “आप (मीडिया) उनसे (यतिंद्र) पूछिए कि उन्होंने क्या कहा। अगर आप मुझसे पूछते हैं तो मैं क्या कह सकता हूं?” अपनी खुद की चर्चाओं पर उन्होंने जोर देकर कहा, “मैं नहीं चाहता कि कोई मेरे बारे में चर्चा करे। सिद्धारमैया और मैंने स्पष्ट किया है कि हम पार्टी हाईकमान की दिशा का पालन करेंगे और साथ मिलकर काम करेंगे। मैं इसके लिए प्रतिबद्ध हूं।” शिवकुमार ने पहले भी मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को कम करके आंका है, पिछले महीने कहा था, “सत्ता साझेदारी पर कहां चर्चा हो रही है? मैं खुद यह कह रहा हूं। ऐसी कोई बात नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा न करने की चेतावनी भी दी है।
सिद्धारमैया की स्थिति: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुद कई बार स्पष्ट किया है कि वे अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। पिछले महीने उन्होंने इस्तीफे की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा, “मैं शेष 2.5 वर्षों तक मुख्यमंत्री बना रहूंगा। उन्होंने कहा था कि मैं दूसरी बार मुख्यमंत्री नहीं बनूंगा, लेकिन मैं बना और अगले 2.5 वर्षों तक जारी रखूंगा।” यतिंद्र ने भी बाद में यू-टर्न लेते हुए कहा कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा। उन्होंने पार्टी हाईकमान का हवाला देते हुए कहा, “हमारे हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक में नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं है। चुनाव नजदीक आने पर बीजेपी दावा करती है कि नेतृत्व में बदलाव होगा। लेकिन हमें अपनी पार्टी की वास्तविकता पता है।” उन्होंने कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला का हवाला दिया कि सभी चर्चाएं मात्र अटकलें हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि: कर्नाटक कांग्रेस में दो गुटों का अस्तित्व है – एक सिद्धारमैया का समर्थन करता है और दूसरा शिवकुमार का। सतीश जारकीहोली को सिद्धारमैया गुट का मजबूत सदस्य माना जाता है, जिससे यतिंद्र का उनका समर्थन आश्चर्यजनक लगता है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। पार्टी ने शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनने के लिए मनाया। कुछ रिपोर्टों में एक अनौपचारिक “रोटेशनल मुख्यमंत्री फॉर्मूला” की बात की गई थी, जिसमें शिवकुमार को 2.5 वर्ष बाद मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन पार्टी ने इसे आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की। पूर्व सांसद एलआर शिवरामे गौड़ा ने पिछले महीने कहा था कि शिवकुमार “100%” मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन अंतिम फैसला हाईकमान पर है। उन्होंने कहा, “शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने में कोई संदेह नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला हाईकमान लेगा। वे पार्टी को संभालना और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री के बीच संतुलन बनाना जानते हैं। अंत में, कड़ी मेहनत हमेशा फल देती है।” इन बयानों को राजनीतिक विशेषज्ञ “सुनियोजित” मानते हैं, जो शिवकुमार और उनके समर्थकों को संकेत दे रहे हैं कि प्रभाव सिद्धारमैया गुट में रहेगा।
सतीश जारकीहोली की भूमिका: अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से आने वाले जारकीहोली ने खुद मुख्यमंत्री पद की दौड़ से दूर रहने की बात कही है। यतिंद्र ने उन्हें प्रगतिशील सिद्धांतों के लिए प्रतिबद्ध बताते हुए कहा, “सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध नेता होना मुश्किल है, लेकिन जारकीहोली प्रतिबद्धता के साथ अपना काम कर रहे हैं। उन्हें ऐसा ही जारी रखना चाहिए।”
यह घटना कर्नाटक कांग्रेस में आंतरिक गतिशीलता को उजागर करती है और दिखाती है कि कैसे छोटे बयान बड़े राजनीतिक बहस को जन्म दे सकते हैं। पार्टी का कहना है कि वर्तमान नेतृत्व संरचना में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन अटकलें जारी हैं। जांच पूरी होने पर और अधिक स्पष्टता मिल सकती है।
