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by-Ravindra Sikarwar

एपी (एसोसिएटेड प्रेस) की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया के उदारवादी विपक्षी उम्मीदवार ली जे-म्युंग को बुधवार को राष्ट्रपति के रूप में चुना गया है। यह जीत, अब पद से हटाए गए रूढ़िवादी नेता यूं सुक-योल द्वारा संक्षिप्त लेकिन चौंकाने वाले मार्शल लॉ के बाद महीनों की राजनीतिक उथल-पुथल पर विराम लगाएगी। ली जे-म्युंग का जीवन हमेशा विवादों से घिरा रहा है, और अब राष्ट्रपति के रूप में उनके सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं।

एक उथल-पुथल भरा राजनीतिक करियर:
ली जे-म्युंग का राजनीतिक सफर किसी रोलरकोस्टर से कम नहीं रहा है। उनके जीवन के शुरुआती संघर्ष, जिसमें गरीबी और कठिन बचपन शामिल है, ने उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में ढाल दिया जो आम लोगों की समस्याओं को समझते हैं। हालांकि, उनके करियर में कई कानूनी और व्यक्तिगत विवाद भी रहे हैं, जिन्होंने उनकी सार्वजनिक छवि को प्रभावित किया है। इन विवादों के बावजूद, उन्होंने अपनी लोकप्रियता बनाए रखी है और देश के सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में से एक बनकर उभरे हैं।

यूं सुक-योल और मार्शल लॉ का प्रभाव:
पूर्व रूढ़िवादी नेता यूं सुक-योल द्वारा लगाए गए संक्षिप्त मार्शल लॉ ने दक्षिण कोरिया में राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर दी थी। इस अप्रत्याशित कदम ने देश भर में विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया और यूं सुक-योल को पद से हटाने की मांग तेज हो गई। इस राजनीतिक अशांति ने ली जे-म्युंग जैसे विपक्षी नेताओं के लिए एक अवसर पैदा किया, जिन्होंने जनता के असंतोष को भुनाया और राष्ट्रपति पद की दौड़ में खुद को मजबूत किया। यूं सुक-योल के इस कदम ने न केवल उनकी राजनीतिक विरासत को धूमिल किया, बल्कि ली जे-म्युंग की जीत का मार्ग भी प्रशस्त किया।

ली जे-म्युंग के सामने खड़ी प्रमुख चुनौतियाँ:
राष्ट्रपति के रूप में, ली जे-म्युंग के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं।

  • बढ़ती आर्थिक असमानता: दक्षिण कोरिया में आय असमानता एक गंभीर मुद्दा है। ली जे-म्युंग को आर्थिक नीतियों को लागू करना होगा जो समाज के सभी वर्गों के लिए समृद्धि सुनिश्चित करें।
  • आवास संकट: देश के बड़े शहरों में आवास की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे युवा और निम्न-आय वर्ग के लोग प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें इस संकट से निपटने के लिए प्रभावी समाधान खोजने होंगे।
  • उत्तर कोरिया के साथ संबंध: उत्तर कोरिया के साथ जटिल संबंध हमेशा दक्षिण कोरिया के लिए एक चुनौती रहे हैं। ली जे-म्युंग को कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए एक संतुलित कूटनीति अपनानी होगी।
  • भ्रष्टाचार: दक्षिण कोरियाई राजनीति में भ्रष्टाचार एक आवर्ती समस्या रही है। ली जे-म्युंग को अपनी सरकार में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कदम उठाने होंगे।
  • सामाजिक ध्रुवीकरण: देश राजनीतिक और सामाजिक रूप से ध्रुवीकृत होता जा रहा है। ली जे-म्युंग को देश को एकजुट करने और विभिन्न गुटों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में काम करना होगा।

निष्कर्ष:
ली जे-म्युंग की जीत दक्षिण कोरियाई राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। उनका उथल-पुथल भरा जीवन और राजनीतिक अनुभव उन्हें इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वह कैसे इन चुनौतियों से निपटते हैं और दक्षिण कोरिया को एक नई दिशा में ले जाते हैं।

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