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by-Ravindra Sikarwar

लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसक झड़पों के बीच हिरासत में लिया गया है। केंद्र सरकार ने उन्हें हिंसा भड़काने का दोषी ठहराते हुए गृह मंत्रालय के तहत कार्रवाई की है, जो लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांगों पर केंद्रित आंदोलन का हिस्सा था। इस घटना ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय स्वायत्तता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर व्यापक बहस छेड़ दी है, जहां एक ओर सरकार कार्यकर्ता को उकसावे का जिम्मेदार मान रही है, वहीं समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहे हैं।

घटना का पूरा विवरण:
24 सितंबर 2025 को लेह शहर में लद्दाख अपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सुबह करीब 11:30 बजे, सोनम वांगचुक के अनशन स्थल से एक भीड़ बाहर निकली और भाजपा कार्यालय तथा लेह के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEC) के सरकारी कार्यालय पर हमला कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आगजनी की, जिसमें भाजपा कार्यालय और एक CRPF वाहन को नुकसान पहुंचा। पुलिस और अर्धसैनिक बलों के साथ झड़पों में पत्थरबाजी हुई, जिसके परिणामस्वरूप चार लोगों की मौत हो गई और 80 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें 40 पुलिसकर्मी और 50 सुरक्षा बल के जवान शामिल थे। लेह के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि लद्दाख हिल काउंसिल असेंबली हॉल को भी आग लगा दी गई थी।

इस हिंसा के बाद लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया, जो 25 सितंबर तक जारी रहा। पांच या इससे अधिक लोगों के जमावड़े पर सख्त पाबंदी लगा दी गई, और कारगिल जैसे अन्य प्रमुख शहरों में भी धारा 163 BNSS के तहत प्रतिबंध लागू किए गए। पुलिस ने 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया, और भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए। सोनम वांगचुक, जो 10 सितंबर से अनशन पर थे, ने घटना के तुरंत बाद अपना अनशन तोड़ा और एम्बुलेंस से अपने गांव लौट गए। उन्होंने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि ऐसा होगा। युवाओं की निराशा फूट पड़ी, लेकिन हम शांतिपूर्ण रास्ते पर ही रहेंगे।”

सोनम वांगचुक का पृष्ठभूमि और आंदोलन:
सोनम वांगचुक लद्दाख के मूल निवासी हैं, जो जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय शिक्षा प्रणाली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) की स्थापना की, जो पारंपरिक ज्ञान पर आधारित शिक्षा प्रदान करता है। 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से लद्दाख एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया, लेकिन स्थानीय निवासियों को भूमि, नौकरी और पर्यावरण सुरक्षा के अधिकारों पर चिंताएं बढ़ गईं। वांगचुक ने LAB और KDA के साथ मिलकर राज्यhood, छठी अनुसूची (आदिवासी क्षेत्रों के लिए संरक्षण) और केंद्र के साथ सार्थक वार्ता की मांग की। यह उनका पांचवां अनशन था, जो 35 दिनों तक चला। उन्होंने नेपाली ‘जन जेड’ आंदोलन और अरब स्प्रिंग जैसी घटनाओं का जिक्र कर युवाओं को प्रेरित करने की कोशिश की, जिसे सरकार ने उकसावे के रूप में देखा।

गृह मंत्रालय का बयान और आरोप:
गृह मंत्रालय ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में वांगचुक को सीधे जिम्मेदार ठहराया। मंत्रालय के अनुसार, “वांगचुक ने अरब स्प्रिंग शैली के विरोध और नेपाली जन जेड प्रदर्शनों का उल्लेख कर लोगों को भ्रमित किया। 24 सितंबर को सुबह 11:30 बजे उनके उत्तेजक भाषणों से प्रेरित भीड़ ने हमला किया।” मंत्रालय ने दावा किया कि केंद्र LAB और KDA के साथ कई दौर की बैठकें कर चुका है, लेकिन वांगचुक ने शांतिपूर्ण अपीलों को नजरअंदाज कर हिंसा को बढ़ावा दिया। इसके अलावा, हिंसा के बीच उन्होंने अनशन तोड़ा और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं की। मंत्रालय ने इसे “योजनाबद्ध” बताया और कहा कि वांगचुक ने व्यक्तिगत मुद्दों को क्षेत्रीय आंदोलन से जोड़ा।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस:
इस हिरासत ने देशव्यापी बहस छेड़ दी है। समर्थक, जिसमें पूर्व जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शामिल हैं, इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं। अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, “जम्मू-कश्मीर में राज्यhood का वादा पूरा न होने पर हमारी निराशा को समझिए।” वांगचुक के सहयोगी कहते हैं कि युवाओं की हताशा शांतिपूर्ण विरोध की विफलता से उपजी है, न कि किसी साजिश से। वहीं, सरकार समर्थक इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कदम मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि छठी अनुसूची की मांग वैध है, लेकिन हिंसा किसी भी आंदोलन को कमजोर करती है।

अतिरिक्त जांच और प्रभाव:
25 सितंबर को सीबीआई ने वांगचुक की संस्था HIAL के खिलाफ विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) उल्लंघन की प्रारंभिक जांच शुरू की। वांगचुक ने बताया कि 10 दिन पहले सीबीआई टीम मंत्रालय की शिकायत पर पहुंची थी। यह जांच विदेशी फंडिंग पर सवाल उठाती है। आंदोलन ने लद्दाख की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया, जहां पर्यटन और स्थानीय व्यापार ठप हो गए। घायलों को चिकित्सा सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं, और जांच जारी है।

सोनम वांगचुक की हिरासत लद्दाख आंदोलन का एक टर्निंग पॉइंट है, जो क्षेत्रीय अस्मिता और केंद्र-राज्य संबंधों पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि आप लद्दाख के भविष्य से जुड़े हैं, तो यह घटना विचारणीय है। अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर रखें।

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