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by-Ravindra Sikarwar

तिब्बत, चीन: चीन के राष्ट्रीय अवकाश ‘गोल्डन वीक’ के दौरान माउंट एवरेस्ट के पूर्वी ढलानों पर अचानक आए एक शक्तिशाली बर्फीले तूफान ने सैकड़ों पर्यटकों और पर्वतारोहियों को फंसा दिया। चीनी राज्य मीडिया के अनुसार, करीब 1000 लोग करमा घाटी के ऊंचे शिविरों में घिर गए, जहां भारी बर्फबारी ने रास्ते बंद कर दिए और तापमान तेजी से गिर गया। स्थानीय प्रशासन ने बड़े पैमाने पर बचाव कार्य शुरू किया है, जिसमें ग्रामीणों, अग्निशमन दलों और विशेष टीमों की मदद से सड़कों को साफ किया जा रहा है। रविवार तक 350 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि बाकी 200 से ज्यादा से संपर्क स्थापित हो गया है। हालांकि, कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, और हाइपोथर्मिया (शीतलता) का खतरा बरकरार है। यह घटना हिमालय क्षेत्र में असामान्य मौसम की मार को दर्शाती है, जहां नेपाल में भी बाढ़ और भूस्खलन से 47 लोगों की जान जा चुकी है।

तूफान की शुरुआत: छुट्टियों के उत्साह में छिपा खतरा
यह विपत्ति 3 अक्टूबर की शाम को शुरू हुई, जब चीन का आठ दिवसीय राष्ट्रीय अवकाश ‘गोल्डन वीक’ अपने चरम पर था। इस दौरान हजारों चीनी पर्यटक तिब्बत के करमा घाटी क्षेत्र में उमड़ पड़े, जो माउंट एवरेस्ट (जिसे तिब्बत में चोमोलुंगमा के नाम से जाना जाता है) के पूर्वी चेहरे की ओर जाता है। यह इलाका लगभग 16,000 फीट (4,900 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है, जहां पर्यटक आसानी से हिमालय की मनमोहक चोटियों का दीदार कर सकते हैं। प्रकृति फोटोग्राफर डोंग शूचांग जैसे कई यात्री शनिवार सुबह ट्रेकिंग पर निकले थे, लेकिन कुछ ही घंटों में मौसम ने करवट ली।

भारी बर्फबारी ने रातोंरात शिविरों को सफेद चादर ओढ़ा दी, जिससे टेंट ढह गए और रास्ते मीलों लंबे बर्फ के ढेरों से भर गए। एक बचावकर्मी ने बताया कि बर्फ की मोटाई इतनी थी कि पैदल चलना भी असंभव हो गया। पर्यटकों ने अपनी आपबीती साझा की – एक यात्री ने कहा, “हमने रात भर जागकर हर 10 मिनट में टेंट के बाहर बर्फ साफ की, लेकिन नींद आते ही हाइपोथर्मिया का डर सताने लगा।” तूफान की तीव्रता इतनी थी कि स्थानीय गाइड भी हैरान रह गए, क्योंकि पूर्वी ढलान पर इतनी जल्दी बर्फबारी दुर्लभ है।

फंसे लोगों की संख्या और स्थिति: अनिश्चितता का माहौल
चीनी मीडिया जिमू न्यूज के अनुमान के मुताबिक, करीब 1000 लोग – जिनमें पर्यटक, पर्वतारोहियों और सहायक स्टाफ शामिल हैं – प्रभावित हुए। हालांकि, सीसीटीवी ने स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा ट्रेकिंग पार्टियों के सदस्यों पर आधारित है, और स्थानीय गाइडों या सहायकों की गिनती अलग से हो सकती है। पूर्वी ढलान के अलावा, एवरेस्ट के उत्तरी चेहरे पर भी पर्यटक सक्रिय रहते हैं, लेकिन अभी तक वहां कोई प्रभावित होने की खबर नहीं आई है।

फंसे लोगों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। बीबीसी के अनुसार, कम से कम एक हाइकर की मौत हो चुकी है, जो शीतलता और थकान का शिकार हो गया। बाकी लोग ठंड, भूख और ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं। एक पर्यटक ने बताया कि तूफान के दौरान वे छह घंटे पैदल चले, लेकिन रास्ता बर्फ से पट गया था। बचाव टीमों ने ब्लू स्काई रेस्क्यू जैसे संगठनों से संपर्क साधा, जिन्होंने टेंट ढहने की सूचना पर तुरंत मदद भेजी। सौभाग्य से, सभी फंसे लोगों से संपर्क हो गया है, लेकिन ऊंचाई और मौसम की वजह से निकालना चुनौतीपूर्ण है।

बचाव अभियान: ग्रामीणों और मशीनरी का संयुक्त प्रयास
तिब्बत के स्थानीय प्रशासन ने तुरंत संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया। सैकड़ों ग्रामीणों ने खुद को आगे किया – वे ऊंचे इलाकों में रहते हैं और बर्फ साफ करने के लिए कुशल हैं। भारी मशीनरी जैसे बुलडोजर और स्नोक्लीयर को रास्तों पर तैनात किया गया, जबकि अग्निशमन दल पैदल दूरी तय कर रहे हैं। रविवार तक 350 लोगों को निकाल लिया गया और उन्हें निकटवर्ती छोटे पहाड़ी कस्बे कुदांग (Qudang) पहुंचा दिया गया, जहां चिकित्सा सहायता उपलब्ध है।

बाकी फंसे लोगों को चरणबद्ध तरीके से उतारा जा रहा है। सीसीटीवी के अनुसार, बचावकर्मी ग्रामीणों की मदद से आपूर्ति पहुंचा रहे हैं – भोजन, दवाएं और गर्म कपड़े। एक ग्रामीण ने बताया, “हमने रविवार को ऊपर जाकर फंसे पर्यटकों से मुलाकात की। वे थक चुके थे, लेकिन हमारी मदद से धीरे-धीरे नीचे आ रहे हैं।” एवरेस्ट नेशनल पार्क के अधिकारियों ने तूफान के बाद टिकट बिक्री और प्रवेश रोक दिया है, ताकि और लोग न फंसें। बचाव कार्य में हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल सीमित है, क्योंकि बर्फीली हवाओं के कारण उड़ान जोखिम भरी है।

क्षेत्रीय प्रभाव: नेपाल में भी तबाही
यह तूफान केवल तिब्बत तक सीमित नहीं रहा। पड़ोसी नेपाल में भारी वर्षा ने भूस्खलन और बाढ़ को जन्म दिया, जिसमें शुक्रवार से अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है। पूर्वी इलाम जिले में 35 लोग भूस्खलन का शिकार बने, जबकि बाकी बाढ़ में बह गए। नेपाल नेशनल माउंटेन गाइड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तुलसी गुरुंग ने बताया कि एक दक्षिण कोरियाई ट्रेकर की मौत हुई, जिसका शव हेलीकॉप्टर से बरामद किया गया। हिमालय का यह असामान्य मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन से जुड़ा हो सकता है, जो अप्रत्याशित तूफान ला रहा है।

पर्यटकों की आपबीतियां: सबक और सावधानियां
फंसे पर्यटकों ने अपनी कहानियां साझा कीं, जो साहसिक यात्राओं के जोखिमों को उजागर करती हैं। डोंग शूचांग ने कहा, “मैं हिमालय की तस्वीरें लेने आया था, लेकिन तूफान ने सब बदल दिया। हमने रात भर सतर्क रहकर बिताई।” एक अन्य यात्री ने बताया कि गाइड ने चेतावनी दी थी, लेकिन छुट्टियों का उत्साह भारी पड़ा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ट्रेकिंग से पहले मौसम पूर्वानुमान चेक करें, गर्म कपड़े रखें और हमेशा गाइड के साथ रहें। यह घटना गोल्डन वीक जैसे व्यस्त समय में भी सतर्कता की याद दिलाती है।

निष्कर्ष: प्रकृति के प्रकोप से सीख
माउंट एवरेस्ट का यह बर्फीला संकट न केवल बचाव टीमों की वीरता को दर्शाता है, बल्कि मानवीय लापरवाही के परिणामों को भी। तिब्बती ग्रामीणों और अधिकारियों के प्रयासों से अधिकांश लोग सुरक्षित हैं, लेकिन एक मौत और सैकड़ों की पीड़ा चिंता का विषय है। जैसे-जैसे बचाव कार्य आगे बढ़ रहा है, उम्मीद है कि सभी यात्री जल्द घर लौटेंगे। यह घटना पर्यटकों को चेतावनी देती है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी की सैर रोमांचक तो है, लेकिन जोखिमों से भरी भी। हिमालय क्षेत्र में मौसम निगरानी को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि ऐसी विपत्तियां दोबारा न हों।

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