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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश: छिंदवाड़ा जिले में बीते 15 दिनों के भीतर छह मासूम बच्चों की संदिग्ध मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और दवा नियंत्रण अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। प्राथमिक जांच में आशंका जताई गई है कि बच्चों की मौत कोल्ड्रिफ नामक खांसी की दवा पीने से हुई। इस दवा के सेवन के बाद 30 से अधिक बच्चे बीमार पड़े थे।

जबलपुर की कंपनी पर छापा:
स्वास्थ्य अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर स्थित कटारिया फार्मास्युटिकल्स पर छापेमारी की। बताया जा रहा है कि इसी कंपनी से यह दवा छिंदवाड़ा जिले में सप्लाई की गई थी। छापे के दौरान अधिकारियों ने दवा की खेप को जब्त किया और स्टॉक का ब्योरा खंगाला।

594 बोतलें वितरित, लैब जांच जारी:
ड्रग इंस्पेक्टर शरद कुमार जैन के अनुसार, अब तक इस खांसी की दवा की कुल 594 बोतलें वितरित की गई थीं। फिलहाल इन दवाओं के नमूने एकत्र कर राज्य स्तरीय लैब में जांच के लिए भेज दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दवा में कोई जहरीला या हानिकारक तत्व मिला था या नहीं।

सप्लाई का धागा चेन्नई तक
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जबलपुर की कंपनी को यह खांसी की दवा चेन्नई की एक दवा निर्माण कंपनी से सप्लाई की गई थी। अब जांच एजेंसियां इस कंपनी की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

राजस्थान और मध्य प्रदेश में जांच तेज:
मामला केवल छिंदवाड़ा तक ही सीमित नहीं रहा। आशंका जताई जा रही है कि इस खांसी की दवा की खेप मध्य प्रदेश के अन्य जिलों और राजस्थान तक भी पहुंची है। इसी कारण दोनों राज्यों के स्वास्थ्य विभाग दवा दुकानों और गोदामों पर छापेमारी कर रहे हैं।

जांच के नतीजों का इंतजार:
फिलहाल बच्चों की मौत के असली कारणों की पुष्टि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का बीमार होना और छह की मौत ने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध दवाओं का उपयोग तुरंत बंद करें और डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न दें।

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