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Security: मकर संक्रांति में सुरक्षा की चुनौती

मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का एक जीवंत पर्व है, जो आस्था, उल्लास और प्रकृति के साथ जुड़ी परंपराओं का प्रतीक है। लेकिन हाल के वर्षों में इस पर्व की खुशियों पर खतरनाक छाया पड़ती नजर आ रही है।

Security: मकर संक्रांति: उत्सव और परंपराएं

तिल-गुड़ की मिठास, स्नान-दान की परंपरा और खुले आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें मकर संक्रांति की पहचान हैं। यह पर्व कभी सौहार्द और आनंद का प्रतीक रहा है, लेकिन अब इसकी पारंपरिक खुशी कई बार जोखिम और हादसों में बदल रही है।

Security: चीनी मांझा: उत्सव का जानलेवा हथियार

प्रतिबंध के बावजूद चीनी मांझे का उपयोग कई जगहों पर जारी है। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और कर्नाटक समेत देश के विभिन्न हिस्सों में इससे होने वाली चोटों और मौतों की घटनाएं सामने आ रही हैं। गले कटने, चेहरे पर गंभीर चोटें और यहां तक कि मौत इस तथ्य को दर्शाती हैं कि यह केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही और प्रशासनिक कमी का परिणाम है।

प्रशासन और निगरानी की कमी

कानून मौजूद होने के बावजूद इसका असर जमीन पर नहीं दिख रहा। त्योहार के दौरान विशेष निगरानी, छापेमारी और कड़े दंड की कमी इसे गंभीर चुनौती बना देती है। केवल आदेश जारी करना ही पर्याप्त नहीं; प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को सतत सक्रिय रहना होगा।

नागरिक जिम्मेदारी और जागरूकता

समाज की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। परंपरा के नाम पर दूसरों की जान जोखिम में डालना संवेदनहीनता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को यह समझाना जरूरी है कि उत्सव का उल्लास लापरवाही में नहीं बदलना चाहिए। जागरूकता अभियान, स्कूलों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से संदेश देना आवश्यक है।

सुरक्षित और जिम्मेदार उत्सव के उपाय

पर्यावरण अनुकूल सूती धागे का उपयोग बढ़ाना, पतंगबाजी के लिए सुरक्षित स्थल तय करना और आपात चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करना महत्वपूर्ण कदम हैं। मकर संक्रांति हमें प्रकृति और समाज के साथ संतुलन का संदेश देती है। परंपराएं संरक्षित रहनी चाहिए, लेकिन सुरक्षा और जिम्मेदारी के साथ। तभी पतंगें फिर से जीवन और उल्लास की प्रतीक बन सकेंगी, न कि खतरनाक हथियार।

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