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Report by: Avinash Srivastwa

Sasaram : बिहार के रोहतास जिले से एक बड़ी और डराने वाली खबर सामने आ रही है। पिछले दो दिनों से एक जंगली हाथी ने तिलौथू और अमझोर के पास सोन नदी के बीचो-बीच स्थित बालू के ऊंचे टीलों (टापू) पर अपना डेरा जमा लिया है। हाथी के इस अचानक आगमन और हिंसक व्यवहार से नदी के बीच खेती-बाड़ी करने वाले किसानों और स्थानीय निवासियों में भारी दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है कि यह हाथी भटककर रिहायशी इलाकों के करीब पहुँच गया है और लगातार झोपड़ियों को निशाना बना रहा है।

कैमूर की पहाड़ियों से भटककर पहुँचा हाथी: भारी तबाही

Sasaram वन विभाग के सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, लगभग एक सप्ताह पहले इस हाथी को नौहट्टा के जंगलों और कैमूर पहाड़ी के आसपास देखा गया था। तब से यह लगातार अपना स्थान बदल रहा है और अब तिलौथू की ओर बढ़ आया है। सोन नदी में पानी का स्तर कम होने के कारण नदी के बीच में ऊंचे रेतीले टीले बन गए हैं, जहाँ लोग झोपड़ियाँ बनाकर मौसमी खेती करते हैं।

हाथी ने इन अस्थायी बस्तियों पर हमला कर कई झोपड़ियों को तहस-नहस कर दिया है। हमले की उग्रता को देखते हुए वहां रहने वाले लोग अपनी जान बचाकर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग खड़े हुए हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस प्रकार विशालकाय हाथी झोपड़ियों को पैरों तले रौंद रहा है और अनाज व अन्य सामान को नुकसान पहुँचा रहा है।

वन विभाग की सुस्ती और बढ़ता खतरा

Sasaram हाथी के आतंक की सूचना तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को दी गई है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मौके पर वन कर्मियों की अनुपस्थिति ने लोगों के डर को और बढ़ा दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि “दिन के उजाले में तो हाथी की लोकेशन का पता चल जाता है और लोग सतर्क रहते हैं, लेकिन असली डर रात के अंधेरे का है।” यदि रात के समय हाथी ने रिहायशी बस्तियों या मुख्य सड़कों की ओर रुख किया, तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। फिलहाल हाथी तिलौथू और अमझोर के बीच के टापू नुमा स्थान पर ही डटा हुआ है।

सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट और बचाव की अपील

Sasaram इस घटना ने सोन तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। स्थानीय प्रशासन और जागरूक नागरिकों ने अपील की है कि लोग रात के समय नदी के तटीय इलाकों में जाने से बचें और आग जलाकर या शोर मचाकर हाथी को आबादी से दूर रखने का प्रयास करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी संभवतः अपने झुंड से बिछड़ गया है या भोजन की तलाश में नीचे उतर आया है। यदि समय रहते वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने हाथी को वापस जंगलों की ओर नहीं खदेड़ा, तो स्थिति अनियंत्रित हो सकती है। रोहतास जिला प्रशासन को इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर विशेषज्ञों की टीम बुलाने की तत्काल आवश्यकता है।

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