Report by: Avinash Srivastwa
Sasaram : बिहार के रोहतास जिले के कैंसर रोगियों के लिए सोमवार का दिन एक बड़ी राहत लेकर आया है। अब तक कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली, पटना या वाराणसी जैसे महानगरों की दौड़ लगाने वाले मरीजों के लिए सासाराम का सदर अस्पताल एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। अस्पताल परिसर में सोमवार से कैंसर स्क्रीनिंग के साथ-साथ कीमोथेरेपी की सुविधा का आधिकारिक शुभारंभ कर दिया गया है, जिससे जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में एक ऐतिहासिक सुधार हुआ है।

अत्याधुनिक कैंसर वार्ड और कीमोथेरेपी सेवा का आगाज
Sasaram सदर अस्पताल सासाराम के एसीएमओ डॉ. बी.के. पुष्कर ने सोमवार को इस नई स्वास्थ्य सेवा का विधिवत उद्घाटन किया। स्वास्थ्य विभाग ने कैंसर पीड़ितों की जरूरतों को देखते हुए अस्पताल परिसर में एक समर्पित छः बेड का कैंसर वार्ड तैयार किया है। इस वार्ड को सभी आवश्यक आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस किया गया है ताकि मरीजों को उच्च स्तरीय देखभाल मिल सके।
डॉ. पुष्कर ने जानकारी दी कि हालांकि अस्पताल में कैंसर की प्रारंभिक जांच (स्क्रीनिंग) की सुविधा पहले से ही उपलब्ध थी, लेकिन संसाधनों के अभाव में मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए बाहर रेफर करना पड़ता था। अब इस वार्ड के शुरू होने से जटिल कीमोथेरेपी प्रक्रिया भी यहीं संभव हो सकेगी, जिससे मरीजों को घर के पास ही विशेषज्ञ उपचार मिल सकेगा।

होमी जहांगीर भाभा संस्थान का तकनीकी सहयोग
Sasaram सासाराम में इस सुविधा की शुरुआत स्वास्थ्य विभाग और मुजफ्फरपुर स्थित होमी जहांगीर भाभा कैंसर अस्पताल व अनुसंधान केंद्र के साझा प्रयासों का परिणाम है। इस संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की देखरेख में ही सदर अस्पताल के कैंसर वार्ड का संचालन किया जाएगा।
विशेषज्ञों की उपस्थिति यह सुनिश्चित करेगी कि मरीजों को वही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले जो बड़े शहरों के कॉर्पोरेट अस्पतालों में मिलता है। फिलहाल, वार्ड के उद्घाटन के पहले ही दिन ब्रेस्ट कैंसर और ओरल कैंसर से पीड़ित पांच मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार और कीमोथेरेपी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह सहयोग सासाराम को भविष्य में कैंसर उपचार के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
समय की बचत और आर्थिक बोझ से मुक्ति
Sasaram कैंसर का इलाज लंबा और खर्चीला होता है। सासाराम में यह सेवा शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को मिलेगा। अब तक मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों या बड़े शहरों में जाने पर न केवल भारी चिकित्सा शुल्क चुकाना पड़ता था, बल्कि रहने-खाने और यात्रा में भी बड़ी राशि खर्च होती थी।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, स्थानीय स्तर पर कीमोथेरेपी मिलने से मरीजों का आर्थिक शोषण रुकेगा और उनके समय की भी भारी बचत होगी। गुणवत्तापूर्ण इलाज अब उनके अपने जिले में उपलब्ध होने से न केवल मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि कैंसर के प्रति लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी। यह पहल रोहतास के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
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