Sardar Sarovar Project:
- आवंटित आवासीय भूखंडो का पंजीयन नि:शुल्क
- सिंचाई परियोजनाओं और योजनाओं को मिली बड़ी स्वीकृति
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में राज्यहित से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। इन निर्णयों का सीधा लाभ विस्थापित परिवारों, किसानों, श्रमिकों, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को मिलेगा। बैठक में नर्मदा घाटी विकास, सिंचाई, सामाजिक कल्याण और प्रशासनिक सुधार से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
Sardar Sarovar Project: सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को बड़ी राहत
मंत्रि-परिषद ने नर्मदा घाटी की सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित विस्थापित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उन्हें आवंटित आवासीय भूखंडों का पंजीयन नि:शुल्क कराए जाने की स्वीकृति प्रदान की। मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार देय पंजीयन शुल्क एवं स्टाम्प ड्यूटी की प्रतिपूर्ति नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा की जाएगी। इस निर्णय से 25,600 से अधिक विस्थापित परिवारों को लाभ होगा। राज्य शासन पर इससे लगभग 600 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा, लेकिन इससे विस्थापितों को स्थायी आवास का अधिकार सुनिश्चित होगा।
Sardar Sarovar Project: मैहर और कटनी में सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी
मंत्रि-परिषद ने मैहर और कटनी जिलों में दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए 620 करोड़ 65 लाख रुपये की स्वीकृति दी। मैहर एवं कटनी की धनवाही सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना के लिए 53 करोड़ 73 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होगी और 9 गांवों के 2,810 किसान लाभान्वित होंगे।
वहीं कटनी जिले की बरही सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए 566 करोड़ 92 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे बरही और विजयराघवगढ़ तहसील के 27 गांवों के 11,500 किसानों को लाभ मिलेगा और लगभग 20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
10 योजनाओं की निरंतरता को मिली स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने 6 विभागों की 10 योजनाओं को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 15,009 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति दी। इनमें श्रम विभाग की मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना, पशुपालन विभाग की डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, महिला एवं बाल विकास विभाग की किशोर कल्याण निधि योजना सहित कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं।
प्रशासनिक सुधार से जुड़ा अहम फैसला
बैठक में मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग करने और उसके कर्मचारियों का संविलयन महिला एवं बाल विकास विभाग में करने का भी निर्णय लिया गया। इससे प्रशासनिक कार्यों में एकरूपता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
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