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Report by: Avinash Srivastwa

Rohtas : प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती, और जब जुनून रगों में दौड़ रहा हो तो सफलता कदम चूमती है। रोहतास जिले के शिवसागर प्रखंड अंतर्गत सिकरौर गांव के रहने वाले विकेश कुमार दुबे ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की परीक्षा उत्तीर्ण कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले और राज्य का नाम रोशन किया है। अपना प्रशिक्षण संपन्न कर जब विकेश पहली बार अपने गृह नगर सासाराम पहुंचे, तो वहां का नजारा किसी उत्सव जैसा था।

आरपीएफ प्रभारी ने किया अभिनंदन: स्टेशन पर उमड़ा जनसैलाब

Rohtas सासाराम रेलवे स्टेशन पर विकेश कुमार दुबे के पहुँचते ही माहौल उत्साह और गर्व से भर गया। आरपीएफ के पोस्ट प्रभारी संजीव कुमार ने मुख्य द्वार पर विकेश का भव्य स्वागत किया। उन्हें माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर सम्मानित किया गया।

इस गौरवमयी पल के साक्षी बनने के लिए स्टेशन परिसर में विकेश के रिश्तेदार, मित्र और भारी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे। सुरक्षा बल के अधिकारियों द्वारा एक युवा अभ्यर्थी का इस प्रकार सम्मान करना वहां मौजूद अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया।

सैन्य विरासत को आगे बढ़ाया: पिता के पदचिन्हों पर विकेश

Rohtas विकेश की इस सफलता के पीछे एक गहरी पारिवारिक प्रेरणा छिपी है। उनके पिता स्वयं भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बचपन से ही घर में देशभक्ति का माहौल और अनुशासन देख रहे विकेश ने भी सेना में अधिकारी बनकर देश सेवा का संकल्प लिया था।

विकेश के जीजा विजय चौबे ने बताया कि यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे विकेश की कड़ी मेहनत, दिन-रात का त्याग और अटूट लगन है। बेटे की वर्दी और उसकी सफलता की चमक माता-पिता के चेहरों पर साफ देखी जा सकती थी, जिनकी आँखों में खुशी के आंसू और सीने में गर्व का अहसास था।

युवाओं के लिए प्रेरणा: कड़ी मेहनत से हासिल किया मुकाम

Rohtas विकेश कुमार दुबे की उपलब्धि उन हजारों छात्रों के लिए एक मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। शिवसागर जैसे ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर एनडीए जैसी कठिन परीक्षा को क्रैक करना और सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करना उनकी मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है।

सासाराम में हुए इस स्वागत समारोह ने यह संदेश दिया कि समाज और प्रशासन हमेशा प्रतिभा का सम्मान करता है। अब विकेश भारतीय सेना में एक अधिकारी के रूप में देश की सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके पूरे गांव सिकरौर में इस समय जश्न का माहौल है और लोग उन्हें अपनी आंखों का तारा मान रहे हैं।

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