By: Ravindra Sikarwar
छत्तीसगढ़ न्यूज़: सुकमा जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। कोंटा क्षेत्र में हुई भीषण मुठभेड़ में कोंटा एरिया कमेटी के सचिव सहित कुल 12 माओवादियों को मार गिराया गया है। इस कार्रवाई को जून 2025 में शहीद हुए तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आकाश राव गिरपुंजे की शहादत का बदला माना जा रहा है। मुठभेड़ में मारे गए माओवादियों में कई इनामी और संगठन के सक्रिय सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं।
कोंटा क्षेत्र में पुलिस-माओवादी मुठभेड़ की पुष्टि
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक अंतर्गत किस्टाराम थाना क्षेत्र के पामलूर इलाके में माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। बताया गया कि कोंटा एरिया कमेटी सचिव वेट्टी मुका उर्फ मंगडू अपने सशस्त्र दस्ते के साथ जंगल में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के निर्देशन में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की एक विशेष टीम को ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया।
सुबह शुरू हुई मुठभेड़, करीब एक घंटे तक चला संघर्ष
सुबह जैसे ही डीआरजी के जवान बताए गए इलाके में पहुंचे, वहां पहले से घात लगाए बैठे माओवादियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से रुक-रुक कर करीब एक घंटे तक गोलीबारी होती रही। घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन जवानों ने संयम और रणनीति के साथ अभियान को अंजाम दिया।
मुठभेड़ शांत होने के बाद जब सुरक्षाबलों ने इलाके की सर्चिंग की, तो घटनास्थल से 12 माओवादियों के शव बरामद किए गए। साथ ही भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और दैनिक उपयोग का नक्सली सामान भी मिला। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है और मारे गए माओवादियों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
मंगडू समेत कई बड़े माओवादी ढेर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक मुठभेड़ में मारे गए माओवादियों में कोंटा एरिया कमेटी का सचिव वेट्टी मुका उर्फ मंगडू भी शामिल है। उसकी उम्र लगभग 40 वर्ष बताई जा रही है और वह सुकमा जिले के गोगुड़ा गांव का निवासी था। मंगडू पिछले कई वर्षों से माओवादी संगठन में सक्रिय था और कई बड़ी नक्सली घटनाओं में उसकी संलिप्तता रही है। उसके पास एके-47 जैसे आधुनिक हथियार होने की जानकारी भी सामने आई है। शासन ने उस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
इसके अलावा मुठभेड़ में एरिया कमेटी सदस्य (एसीएम) हितेश के भी मारे जाने की पुष्टि हुई है, जो संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
एएसपी आकाश राव गिरपुंजे की शहादत का बदला
यह मुठभेड़ इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें मारे गए एसीएम हितेश का नाम 9 जून 2025 की उस घटना से जुड़ा था, जिसमें कोंटा के पास आईईडी ब्लास्ट में तत्कालीन एएसपी आकाश राव गिरपुंजे शहीद हो गए थे। जांच में सामने आया था कि उस हमले की योजना और क्रियान्वयन में हितेश की अहम भूमिका थी। अब इस मुठभेड़ के जरिए सुरक्षाबलों ने उस हमले के जिम्मेदार माओवादियों को खत्म कर एएसपी गिरपुंजे की शहादत का बदला ले लिया है।
दो वर्षों में कमजोर पड़ा माओवादी गढ़
कोंटा क्षेत्र को लंबे समय तक माओवादियों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। पिछले करीब चार दशकों तक यह इलाका नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता था। हालांकि बीते दो वर्षों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की लगातार कार्रवाई से माओवादी संगठन की कमर टूटती नजर आ रही है। कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि कई मुठभेड़ों में मारे गए हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता सुरक्षा बलों के मनोबल को और मजबूत करेगी तथा इलाके में शांति बहाली की दिशा में अहम साबित होगी।
सर्च ऑपरेशन जारी, स्थिति पर नजर
फिलहाल डीआरजी और अन्य सुरक्षाबल घटनास्थल पर मौजूद हैं और पूरे इलाके की गहन तलाशी ली जा रही है। ऑपरेशन समाप्त होने और जवानों के कैंप लौटने के बाद ही मुठभेड़ से जुड़ी पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। पुलिस प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में नक्सल विरोधी अभियान और तेज किया जाएगा, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।
