by-Ravindra Sikarwar
छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीदी की प्रक्रिया शनिवार सुबह से विधिवत शुरू हो गई है। खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की रुकावट या व्यवधान को रोकने के लिए राज्य सरकार ने सभी संबंधित कर्मचारियों पर छत्तीसगढ़ आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम (एस्मा) 1979 लागू कर दिया है। यह अधिनियम पूरी खरीदी अवधि यानी 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा, जिसके तहत इस दौरान कोई भी कर्मचारी हड़ताल या कार्यबहिष्कार नहीं कर सकेगा।
मुख्यमंत्री का संकल्प: सुविधा, सम्मान और समयबद्ध भुगतान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धान खरीदी अभियान को ‘उत्सव’ करार देते हुए कहा कि सरकार किसानों की मेहनत का पूरा सम्मान करने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार भी किसानों को प्रति क्विंटल धान के लिए 3,100 रुपये का समर्थन मूल्य मिलेगा, जो पिछले वर्ष की तरह ही है। राज्यभर में कुल 2,739 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं और इस सीजन में 160 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सरकार ने खरीदी व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए कई तकनीकी नवाचार लागू किए हैं। इनमें ‘तुहर टोकन’ मोबाइल ऐप, जीपीएस आधारित वाहन ट्रैकिंग सिस्टम, ‘सतर्क’ ऐप के माध्यम से शिकायत निवारण और एकीकृत कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर शामिल हैं। सीएम साय ने कहा कि इन उपायों से हर चरण में किसानों को सुविधा, सम्मानजनक व्यवहार और भुगतान में देरी न हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा।
पंजीकृत किसानों को धान बेचने के लिए ‘तुहर’ ऐप से ऑनलाइन टोकन प्राप्त करना अनिवार्य है। हालांकि, डिजिटल सुविधा से वंचित किसानों के लिए उपार्जन केंद्रों पर ही ऑफलाइन टोकन जारी करने की व्यवस्था की गई है।
पहले दिन का प्रदर्शन: 19,464 क्विंटल धान उपार्जित
खरीदी के प्रथम दिन राज्य के 195 उपार्जन केंद्रों पर कुल 19,464 क्विंटल धान की खरीदी की गई। पूरे राज्य में 2,739 केंद्रों को सक्रिय किया गया है। सहकारी समितियों में कर्मचारियों की संभावित हड़ताल को देखते हुए मार्कफेड ने आउटसोर्सिंग के जरिए 2,739 डेटा एंट्री ऑपरेटरों की तैनाती की है, ताकि उपार्जन प्रक्रिया निर्बाध रहे।
पहले दिन कुल 2,029 टोकन जारी किए गए, जिनमें से 1,912 टोकन ‘तुहर टोकन’ ऐप के माध्यम से किसानों द्वारा प्राप्त किए गए।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई, गिरफ्तारी तक की चेतावनी:
राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि धान खरीदी को अतिआवश्यक सेवा घोषित किया गया है। उपार्जन केंद्रों पर तैनात सभी कर्मचारी—चाहे वे समिति प्रबंधक हों, पटवारी, पंचायत विभाग के कर्मचारी या अन्य विभागों से—अनिवार्य रूप से ड्यूटी निभाएंगे। कार्य से मना करने या लापरवाही बरतने पर संबंधित कर्मचारी पर तत्काल कार्रवाई होगी, जिसमें गिरफ्तारी की संभावना भी शामिल है।
इस व्यवस्था से न केवल खरीदी प्रक्रिया सुचारु रहेगी, बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिलना सुनिश्चित होगा। सरकार का पूरा जोर पारदर्शिता, दक्षता और किसान हितों की रक्षा पर है।
