by-Ravindra Sikarwar
एमहर्स्ट, मैसाचुसेट्स: अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक नई प्रकार की नैनोपार्टिकल वैक्सीन विकसित की है, जो चूहों में कैंसर को उसके शुरू होने से पहले ही रोकने में सक्षम साबित हुई है। इस वैक्सीन को ‘सुपर वैक्सीन’ कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें एक विशेष ‘सुपर एडजुवेंट’ का उपयोग किया गया है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को इतना मजबूत बनाता है कि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट कर देती है। अध्ययन में शामिल 80 प्रतिशत चूहों ने 250 दिनों तक कोई ट्यूमर विकसित नहीं किया और पूरी तरह स्वस्थ रहे। यह खोज मेलानोमा, पैन्क्रियाटिक कैंसर और ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर जैसे घातक कैंसरों के खिलाफ प्रभावी पाई गई है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट (यूएमएएसएस एमहर्स्ट) के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन सामग्री विज्ञान और इम्यूनोलॉजी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है, जो भविष्य में मानवों के लिए रोकथाम आधारित कैंसर उपचार का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। यह वैक्सीन पारंपरिक वैक्सीनों से अलग है, क्योंकि यह कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करने के लिए नैनो तकनीक का उपयोग करती है।
शोध की पृष्ठभूमि और टीम:
यह अध्ययन यूएमएएसएस एमहर्स्ट के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया, जिनकी टीम में प्रमुख रूप से सामग्री वैज्ञानिक और इम्यूनोलॉजिस्ट शामिल थे। शोध का नेतृत्व प्रोफेसर जेफरसन चैन ने किया, जो नैनोटेक्नोलॉजी और इम्यून थेरेपी के विशेषज्ञ हैं। टीम ने कई वर्षों से कैंसर वैक्सीन पर काम कर रही थी, लेकिन इस बार उन्होंने एक नई रणनीति अपनाई: नैनोपार्टिकल्स का उपयोग करके एक शक्तिशाली एडजुवेंट (प्रतिरक्षा बढ़ाने वाला पदार्थ) को डिलीवर करना। अध्ययन ‘साइंस एडवांसेज’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसमें चूहों पर किए गए प्रयोगों के परिणाम शामिल हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह वैक्सीन कैंसर की रोकथाम के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो आनुवंशिक रूप से कैंसर का जोखिम रखते हैं। टीम ने पहले भी समान नैनोपार्टिकल्स पर काम किया था, लेकिन इस बार एडजुवेंट को ‘सुपर’ स्तर पर उन्नत किया गया, जो प्रतिरक्षा कोशिकाओं को अधिक प्रभावी ढंग से सक्रिय करता है।
वैक्सीन कैसे काम करती है: निर्माण और प्रक्रिया का विस्तृत विवरण
सुपर वैक्सीन की मुख्य विशेषता नैनोपार्टिकल्स हैं, जो सूक्ष्म कण होते हैं और शरीर में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। निर्माण प्रक्रिया में सबसे पहले एक विशेष एडजुवेंट तैयार किया जाता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करता है। यह एडजुवेंट नैनोपार्टिकल्स में लोड किया जाता है, जो कैंसर एंटीजन (कैंसर कोशिकाओं के चिन्हक) के साथ मिलकर काम करता है। वैक्सीन इंजेक्शन के माध्यम से दी जाती है, जहां नैनोपार्टिकल्स शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं (जैसे टी-सेल्स और डेंड्राइटिक सेल्स) को सक्रिय करते हैं। ये कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें नष्ट करने लगती हैं, इससे पहले कि वे ट्यूमर बन सकें।
प्रक्रिया के चरण:
- एडजुवेंट का चयन: एक शक्तिशाली इम्यून बूस्टर चुना जाता है, जो सामान्य एडजुवेंट से 10 गुना अधिक प्रभावी होता है।
- नैनोपार्टिकल्स का निर्माण: ये कण बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर्स से बनाए जाते हैं, जो शरीर में घुल जाते हैं और कोई हानि नहीं पहुंचाते।
- एंटीजन लोडिंग: कैंसर-विशिष्ट प्रोटीन या डीएनए को नैनोपार्टिकल्स में जोड़ा जाता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रशिक्षित करता है।
- इंजेक्शन और सक्रियण: वैक्सीन लगाने के बाद, प्रतिरक्षा कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए तैयार हो जाती हैं।
यह वैक्सीन mRNA तकनीक से प्रेरित है, लेकिन नैनोपार्टिकल्स के कारण अधिक स्थिर और लक्षित है। अध्ययन में पाया गया कि यह वैक्सीन कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को 90 प्रतिशत तक रोक सकती है।
अध्ययन के परिणाम और प्रभावशीलता:
चूहों पर किए गए प्रयोगों में वैक्सीन की सफलता दर प्रभावशाली रही। अध्ययन में दो समूह बनाए गए: एक को सुपर एडजुवेंट वाली वैक्सीन दी गई, जबकि दूसरे को सामान्य वैक्सीन। सुपर वैक्सीन वाले समूह के 80 प्रतिशत चूहों में कोई ट्यूमर नहीं विकसित हुआ, और वे 250 दिनों तक जीवित रहे। सामान्य वैक्सीन वाले समूह में केवल 20 प्रतिशत चूहे ट्यूमर-मुक्त रहे। वैक्सीन ने मेलानोमा (त्वचा कैंसर), पैन्क्रियाटिक कैंसर (अग्न्याशय कैंसर) और ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर का एक घातक प्रकार) के खिलाफ उत्कृष्ट परिणाम दिखाए। शोधकर्ताओं ने पाया कि वैक्सीन ने प्रतिरक्षा प्रणाली को इतना मजबूत बनाया कि वह कैंसर कोशिकाओं को उनके प्रारंभिक चरण में ही समाप्त कर देती है। कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स नहीं देखे गए, हालांकि कुछ चूहों में हल्की सूजन हुई जो जल्दी ठीक हो गई। यह परिणाम ‘उल्लेखनीय जीवित रहने की दर’ के रूप में वर्णित किए गए हैं।
संभावित अनुप्रयोग और लाभ:
यह वैक्सीन कैंसर की रोकथाम में क्रांति ला सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो उच्च जोखिम वाले हैं, जैसे धूम्रपान करने वाले, आनुवंशिक इतिहास वाले या पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित। भविष्य में, यह वैक्सीन व्यक्तिगत रूप से अनुकूलित की जा सकती है, जहां मरीज के डीएनए के आधार पर एंटीजन चुने जाएंगे। यह पारंपरिक कीमोथेरेपी या रेडिएशन से बेहतर है, क्योंकि यह दुष्प्रभाव मुक्त और रोकथाम केंद्रित है। पर्यावरणीय लाभ के रूप में, नैनोपार्टिकल्स बायोडिग्रेडेबल हैं, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित हैं। वैक्सीन कैंसर के पुनरावृत्ति को भी रोक सकती है, जो वर्तमान उपचारों की एक बड़ी समस्या है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘यूनिवर्सल कैंसर वैक्सीन’ की दिशा में एक कदम है।
विशेषज्ञों की राय और चुनौतियां:
यूएमएएसएस एमहर्स्ट के प्रोफेसर चैन ने कहा, “यह वैक्सीन प्रतिरक्षा प्रणाली को इतना सशक्त बनाती है कि कैंसर को बढ़ने का मौका ही नहीं मिलता। हम मानव परीक्षणों की ओर बढ़ रहे हैं।” अन्य विशेषज्ञों, जैसे विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने समान वैक्सीनों पर काम किया है और इसे ‘व्यक्तिगत कैंसर वैक्सीन’ का भविष्य बताया है। हालांकि, चुनौतियां हैं: मानव परीक्षणों में सफलता की गारंटी नहीं, लागत अधिक हो सकती है, और नियामक अनुमोदन में समय लगेगा। नैतिक मुद्दे जैसे वैक्सीन की पहुंच और सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हैं।
भविष्य की संभावनाएं:
यह अध्ययन कैंसर अनुसंधान में एक नई दिशा देता है, जहां रोकथाम उपचार से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। टीम अब बड़े जानवरों पर परीक्षण करने की योजना बना रही है, और यदि सफल रहा, तो मानव क्लिनिकल ट्रायल्स 2-3 वर्षों में शुरू हो सकते हैं। यह वैक्सीन mRNA वैक्सीनों (जैसे कोविड-19 वैक्सीन) से सीख लेकर विकसित की गई है, जो तेजी से उत्पादन की अनुमति देती है। वैश्विक स्तर पर, यह कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने में मदद कर सकती है, जो हर साल लाखों जीवन लेती हैं। शोधकर्ताओं का लक्ष्य एक ऐसी वैक्सीन बनाना है जो सभी प्रकार के कैंसरों के खिलाफ काम करे। आने वाले समय में और अधिक अध्ययन इसकी क्षमता को साबित करेंगे।
