by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है, जिसने सरकारी इमारतों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों और वहां आने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा (Delhi Fire Service – DFS) ने हाल ही में किए गए निरीक्षणों के बाद कई सरकारी इमारतों को आवश्यक अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र (Fire Safety Certificate) जारी करने से इनकार कर दिया है। यह स्थिति दर्शाती है कि राजधानी के कई सरकारी भवन न्यूनतम सुरक्षा मानदंडों का भी पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे आपात स्थिति में बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है।
क्यों बढ़ाई जा रही है चिंता?
अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र किसी भी इमारत के लिए यह सुनिश्चित करता है कि वह आग लगने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी मानदंडों और प्रणालियों से लैस है। इसमें आग लगने पर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त निकास मार्ग, आग बुझाने के उपकरण और आग का पता लगाने वाली प्रणालियाँ शामिल होती हैं। सरकारी इमारतों को यह प्रमाण पत्र न मिलना, यह संकेत देता है कि इनमें से कई महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जा रही है।
दिल्ली अग्निशमन सेवा द्वारा उजागर की गई प्रमुख कमियां:
DFS के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान जिन मुख्य कमियों की पहचान की है, वे निम्नलिखित हैं:
- अप्रयाप्त या निष्क्रिय अग्निशमन उपकरण: कई इमारतों में अग्निशामक यंत्रों की संख्या या तो अपर्याप्त पाई गई है या वे ठीक से काम नहीं कर रहे थे। इसके अलावा, अग्नि हाइड्रेंट और होज़ रील सिस्टम भी या तो अनुपस्थित थे या निष्क्रिय पड़े थे।
- अवरुद्ध आपातकालीन निकास मार्ग: सबसे गंभीर चिंताओं में से एक यह है कि कई इमारतों में आपातकालीन निकास द्वार या तो पूरी तरह से अवरुद्ध पाए गए हैं या उन तक पहुंच मुश्किल थी। कई बार इन रास्तों को कबाड़ या अनावश्यक सामान रखकर बंद कर दिया जाता है, जो आग लगने की स्थिति में लोगों को बाहर निकलने से रोक सकता है।
- खराब या अनुपस्थित अग्निशमन प्रणालियां: आधुनिक इमारतों में अनिवार्य फायर अलार्म सिस्टम, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम और स्मोक डिटेक्टर (धुएं का पता लगाने वाले उपकरण) जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियां या तो स्थापित नहीं हैं या वे खराब स्थिति में हैं और ठीक से काम नहीं कर रही हैं।
- नियमित रखरखाव की कमी: यहां तक कि जहां अग्निशमन प्रणालियां मौजूद हैं, वहां भी उनके नियमित रखरखाव और परीक्षण (मॉक ड्रिल) की कमी पाई गई है। ऐसी प्रणालियों का नियमित परीक्षण न होने से यह सुनिश्चित नहीं हो पाता कि आपात स्थिति में वे काम करेंगी या नहीं।
- क्षतिग्रस्त या अनुपयोगी वायरिंग: कुछ इमारतों में पुरानी और क्षतिग्रस्त बिजली की वायरिंग भी पाई गई है, जो आग लगने के प्रमुख कारणों में से एक हो सकती है।
DFS का कड़ा रुख और आगे की कार्रवाई:
दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारियों ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। DFS ने संबंधित सरकारी विभागों को नोटिस जारी किए हैं और उन्हें इन कमियों को तत्काल दूर करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने यह भी दोहराया है कि जब तक ये सरकारी इमारतें सभी आवश्यक सुधार नहीं करतीं और अग्नि सुरक्षा मानदंडों का पूरी तरह से पालन नहीं करतीं, तब तक उन्हें अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाएंगे।
कर्मचारियों में चिंता और सरकार पर दबाव:
इस खबर ने इन सरकारी इमारतों में प्रतिदिन काम करने वाले हजारों कर्मचारियों और आगंतुकों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका हो रही है। इस स्थिति ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों पर तत्काल इन कमियों को दूर करने और यह सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ा दिया है कि सभी सरकारी इमारतें अग्नि सुरक्षा के उच्चतम मानकों को पूरा करें। उम्मीद है कि अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत ध्यान देंगे और आवश्यक सुधारों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेंगे ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
