by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने आज अपनी बैठक में रेपो दर को 5.5% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। यह निर्णय लगातार तीन बार दरों में कटौती के बाद लिया गया है। इस घोषणा का मतलब है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की मासिक किस्त (EMI) में कोई बदलाव नहीं होगा।
मुख्य बिंदु:
- रेपो दर स्थिर: MPC ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.5% पर बनाए रखने का फैसला किया। यह वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है।
- ‘तटस्थ’ रुख कायम: समिति ने आर्थिक अनिश्चितताओं और व्यापारिक चुनौतियों को देखते हुए ‘तटस्थ’ रुख बनाए रखा है। इसका मतलब है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर दरें बढ़ाई या घटाई जा सकती हैं।
- महंगाई का अनुमान घटाया: RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 3.7% से घटाकर 3.1% कर दिया है। यह फैसला मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट के कारण लिया गया है।
- GDP वृद्धि का अनुमान: RBI ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर का अनुमान 6.5% पर बरकरार रखा है।
RBI ने क्यों नहीं बदली दरें?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि दरों को स्थिर रखने का फैसला कई कारणों पर आधारित है। पिछले कुछ महीनों में रेपो दर में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई थी, जिसका असर अभी पूरी तरह से अर्थव्यवस्था पर दिखना बाकी है। इसके अलावा, अमेरिका से आने वाले टैरिफ और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता जैसी बाहरी चुनौतियाँ भी एक प्रमुख कारण हैं।
गवर्नर ने कहा कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और ग्रामीण खपत में भी तेजी दिख रही है, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। हालांकि, वैश्विक व्यापार में जारी तनाव और भू-राजनीतिक चुनौतियाँ विकास की राह में बाधा डाल सकती हैं। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, RBI ने फिलहाल ‘देखो और प्रतीक्षा करो’ की नीति अपनाने का फैसला किया है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
रेपो दर में कोई बदलाव न होने से उन लोगों को राहत मिलेगी जिन्होंने पहले से कर्ज ले रखा है, क्योंकि उनकी EMI में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। हालांकि, जो लोग नई दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें फिलहाल इंतजार करना होगा। इस फैसले से बैंकों को भी अपनी उधारी दरों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
यह फैसला दर्शाता है कि RBI महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के बीच एक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।
