by-Ravindra Sikarwar
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत के डिजिटल वित्तीय ढाँचे में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ऑफ़लाइन डिजिटल रुपये (e₹) नामक सेवा लॉन्च की है, जिसके ज़रिए इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क न होने पर भी भुगतान संभव होगा।
यह घोषणा Global Fintech Fest 2025, मुंबई में की गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरी वाले क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को और सुलभ बनाना है।
डिजिटल रूप से मुद्रा — e₹ क्या है?
- e₹, जिसे “डिजिटल रुपया” या “e-Rupee” भी कहा जाता है, RBI द्वारा जारी की जाने वाली केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) है — यह भौतिक रूप की रुपये की डिजिटल प्रतिकृति है।
- यह मुद्रा सुरक्षित डिजिटल वॉलेट्स में संग्रहित होगी, जिन्हें बैंक उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाएँगे।
- e₹ वह सुविधा देता है कि उपयोगकर्ता इसे भेज और प्राप्त कर सकें, साथ ही दुकानदारों को भुगतान कर सकें — और यह उन लेन-देनों की तरह कार्य करता है जो नकदी (कैश) द्वारा होते हैं।
- एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि UPI (Unified Payments Interface) बैंकों के बीच फंड ट्रांसफर सुविधा है, जबकि e₹ में लेन-देन डिजिटल रूप से “कैश जैसा” व्यवहार करेगा।
किन बैंकों में काम करेगा ये वॉलेट?
वर्तमान में, लगभग 15 बैंकों को इस रिटेल CBDC (उपभोक्ता उपयोग के लिए) पायलट में शामिल किया गया है, और ये बैंक डिजिटल वॉलेट्स प्रदान कर रहे हैं। इन बैंकों में शामिल हैं:
- State Bank of India (SBI)
- ICICI Bank
- HDFC Bank
- YES Bank
- Axis Bank
- Punjab National Bank (PNB)
- Kotak Mahindra Bank
- Canara Bank
- Union Bank of India
- IndusInd Bank
- Federal Bank
- IDFC First Bank
- और अन्य बैंक भी इस सूची में हैं
ये वॉलेट ऐप स्टोर (Google Play, Apple App Store आदि) से डाउनलोड किए जा सकते हैं, रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है और उपयोग शुरू किया जा सकता है।
इन वॉलेट्स पर कोई शुल्क नहीं होगा, न्यूनतम बैलेंस की शर्त नहीं होगी, और यदि उपयोगकर्ता का डिवाइस खो जाता है तो वॉलेट रिकवरी की प्रणाली होगी।
ऑफ़लाइन मोड कैसे काम करेगा?
e₹ की सबसे नई और अलग पहचान इसकी ऑफ़लाइन कार्यक्षमता है — यानी इंटरनेट न होने की स्थिति में भी लेन-देय हो सकेंगे।
इसकी दो प्रमुख तकनीकें हैं:
- टेलीकॉम सहायता आधारित विधि — जहां कम नेटवर्क संकेतों की सहायता से लेन-देय हो सकेंगे।
- NFC (Near Field Communication) आधारित टैप मोड — इसमे नेट कनेक्शन या मोबाइल नेटवर्क की ज़रूरत नहीं होती; दो डिवाइस को “टैप” करने मात्र से धन हस्तांतरित हो जाएगा।
इन लेन-देनों की निपटान व्यवस्था तुरंत हो जाएगी, और दोनों वॉलेट्स के बीच राशि ट्रांसफर हो जाएगी, जैसे नकदी में बदलाव होता है।
e₹ वॉलेट्स यूज़र UPI क्यूआर कोड स्कैन भी कर पाएँगे, जिससे व्यापारी-पेमेंट और सहज होगी।
प्रोग्रामेबल फीचर्स (नियंत्रित उपयोग):
e₹ में “प्रोग्रामेबल” फीचर्स भी होंगे — यानी डिजिटल मुद्रा को विशेष प्रयोजनों, समयावधि, भौगोलिक क्षेत्र या विशेष व्यापार श्रेणियों तक सीमित किया जा सकेगा।
कुछ सरकारी योजनाओं में यह पहले ही लागू किया जा चुका है:
- गुजरात की G-SAFAL योजना में कृषि इनपुट्स तक ही उपयोग सीमित करना
- आंध्र प्रदेश की DEEPAM 2.0 योजना में एलपीजी सब्सिडी के वितरण में यह सुविधा उपयोग की गई है
इस तरह, सब्सिडी, सरकारी लाभ, कॉरपोरेट भुगतान आदि को अधिक नियंत्रण और पारदर्शिता मिल सकेगी।
भारत के डिजिटल ढाँचे में योगदान:
RBI के गवर्नर ने कहा है कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी संरचना (Digital Public Infrastructure) — जैसे Aadhaar, UPI, DigiLocker — ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया है, और e₹ इस संरचना का एक आवश्यक विस्तार है।
e₹ के माध्यम से, सरकार को यह उम्मीद है कि ऐसे क्षेत्रों में जहाँ नेटवर्क कमजोर है, वहाँ भी डिजिटल अर्थव्यवस्था का लाभ पहुंचेगा।
भारत ऐसे राष्ट्रों में शामिल हो जाएगा जो एक ऑफ़लाइन-सक्षम CBDC (केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा) को व्यवहार में ला रहे हैं।
चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ:
- नेटवर्क न रहने पर लेन-देय की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी।
- पुनरुद्धार (reconciliation) और सच्चे ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्डिंग को सही तरीके से संभालना ज़रूरी होगा।
- उपयोगकर्ता शिक्षा — विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में — यह जानने की ज़रूरत है कि कैसे ऑफ़लाइन तरीके से लेन-देय किया जाए।
- इस सिस्टम का स्केल-अप और सभी बैंकों व व्यापारियों तक पहुंच सुनिश्चित करना भी समय लेगा।
- हालांकि, इसका प्रभाव व्यापक होगा — डिजिटल लेन-देय और नकदी दोनों के लाभ एक साथ मिल सकेंगे, और “डिजिटल वित्तीय समावेशन” को एक नई ऊँचाई मिलेगी।
