by-Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश: उज्जैन जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने 5629 उपभोक्ताओं को नोटिस जारी किया, जिसमें उनकी वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक होने के कारण राशन कार्ड कटौती की चेतावनी दी गई। इनमें से 132 उपभोक्ताओं के कार्ड पहले ही रद्द कर दिए गए हैं। यह घटना PDS प्रणाली में व्यापक भ्रष्टाचार और दुरुपयोग की ओर इशारा करती है, जिससे गरीबों को सस्ता अनाज मिलने वाली योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं।
घोटाले का पूरा विवरण:
उज्जैन के विभिन्न क्षेत्रों में PDS के तहत संचालित फेयर प्राइस शॉप्स (FPS) में जांच के दौरान पाया गया कि कई उच्च आय वर्ग के लोग सब्सिडी वाले राशन का लाभ उठा रहे थे। विभाग की विशेष टीम ने डेटा विश्लेषण और सत्यापन अभियान चलाया, जिसमें आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि उपभोक्ता की वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक है, तो वे PDS लाभ के पात्र नहीं हैं। इस कटऑफ को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के दिशानिर्देशों के अनुसार तय किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ दुकानदारों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अमीर परिवारों को कार्ड जारी किए थे, जबकि असली जरूरतमंदों को लाभ से वंचित रखा गया। रद्द किए गए 132 कार्डों में ज्यादातर शहरी क्षेत्रों के निवासियों के थे, जिनमें व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और अन्य उच्च आय वाले व्यक्ति शामिल हैं। विभाग ने इन कार्ड धारकों से 15 दिनों के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है, अन्यथा कार्रवाई कड़ी हो जाएगी।
PDS प्रणाली में भ्रष्टाचार के संकेत:
यह घोटाला PDS में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी समस्या को उजागर करता है। भारत में PDS का उद्देश्य गरीबों को सस्ते दामों पर अनाज, चीनी और केरोसिन उपलब्ध कराना है, लेकिन अक्सर यह लाभ अमीरों तक पहुंच जाता है। उज्जैन में इस अभियान से लगभग 5000 टन से अधिक सब्सिडी वाले अनाज का दुरुपयोग होने का अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल ट्रैकिंग और आधार लिंकिंग के बावजूद सिस्टम में लूपहोल्स हैं, जिनका फायदा उठाया जाता है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “यह अभियान पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया है। हमने 5629 नोटिस जारी किए हैं, और 132 कार्ड रद्द हो चुके हैं। आगे भी सत्यापन जारी रहेगा, ताकि सही लाभार्थी तक योजना पहुंचे।” इस कार्रवाई से विभाग ने दुकानदारों पर भी नजर रखी है, और दोषी पाए जाने पर उनके लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी दी गई है।
प्रभावित उपभोक्ताओं की स्थिति:
नोटिस प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं में से कई ने अपनी सफाई पेश की है। कुछ का दावा है कि उनकी आय गलत तरीके से दर्ज की गई है, जबकि अन्य ने कहा कि वे अब भी आर्थिक रूप से कमजोर हैं। एक प्रभावित निवासी, रमेश शर्मा ने कहा, “मेरा कार्ड रद्द हो गया, लेकिन मेरी आय 6 लाख से कम है। विभाग को सही दस्तावेज दिखाने का मौका मिलना चाहिए।” दूसरी ओर, कई लोगों ने इसे सकारात्मक कदम बताया, क्योंकि इससे गरीबों को अधिक लाभ मिलेगा।
इस घोटाले से उज्जैन के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में असर पड़ा है। असली जरूरतमंदों को अब अतिरिक्त कोटा मिलने की संभावना है, लेकिन सत्यापन प्रक्रिया में देरी से कुछ परिवार प्रभावित हो सकते हैं। विभाग ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जहां लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
सरकारी स्तर पर प्रतिक्रिया:
मध्य प्रदेश सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि पूरे राज्य में इसी तरह के अभियान चलाए जाएं। खाद्य विभाग ने डिजिटल ऐप के माध्यम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग शुरू की है, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताएं रोकी जा सकें। इसके अलावा, दोषी अधिकारियों और दुकानदारों के खिलाफ FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
विपक्षी दलों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, “यह घोटाला सरकार की नाकामी दर्शाता है। PDS को मजबूत बनाने के बजाय, वे अब सफाई दे रहे हैं।” सरकार ने जवाब दिया कि यह पारदर्शिता का प्रमाण है, और आगे और सख्ती बरती जाएगी।
निष्कर्ष:
उज्जैन राशन घोटाला PDS प्रणाली की कमजोरियों को सामने लाता है, जहां उच्च आय वालों का दुरुपयोग गरीबों के हक को छीन रहा है। 132 कार्ड रद्द और 5629 नोटिस इस दिशा में पहला कदम हैं, लेकिन व्यापक सुधारों की आवश्यकता है। यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा नीतियों पर बहस छेड़ सकती है। सरकार को अब सिस्टम को और मजबूत बनाने पर ध्यान देना होगा, ताकि सब्सिडी का लाभ सही हाथों तक पहुंचे।
