by-Ravindra Sikarwar
मुजफ्फरपुर: बिहार के मधुबनी जिले के सीमावर्ती कस्बे जयनगर से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट और हिमालय की बर्फीली चोटियों का नयनाभिराम दृश्य दिखाई देना एक असाधारण घटना के रूप में सामने आया है। 7 अक्टूबर, 2025 को हाल की भारी बारिश के बाद आकाश की असाधारण स्पष्टता और प्रदूषण मुक्त हवा ने इस दुर्लभ दृश्य को संभव बनाया, जो लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित हिमालय को नग्न आंखों से दिखा रहा था। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है, जिसमें बर्फ से ढकी चोटियां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय तांबे, सोने और चांदी जैसे रंगों में रंगीन हो रही हैं। स्थानीय निवासी इसे “प्रकृति का चमत्कार” बता रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह साफ हवा की कमी को उजागर करता है।
घटना का विस्तृत विवरण:
यह दुर्लभ दृश्य जयनगर कस्बे के उत्तरी छोर से कैद किया गया, जो भारत-नेपाल सीमा पर स्थित है और कमला नदी के किनारे बसा एक सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है। कमला नदी नेपाल के हिमालयी ग्लेशियर से निकलती है, जो जयनगर को हिमालय से सीधे जुड़ाव प्रदान करती है। वीडियो में माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर ऊंची) को स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकता है, जो महालंगुर हिमाल की उप-श्रृंखला में स्थित है। इसके साथ ही ल्होत्से, मकालू, शार्त्से प्रथम, चमलांग, थामसेरकू और मेरा पीक जैसी अन्य प्रमुख चोटियां भी नजर आ रही हैं। दूरी के बावजूद चोटियां इतनी साफ दिखाई दे रही थीं कि स्थानीय लोग घरों की छतों और नदी के बैराज से उन्हें देखते ही रह गए।
वीडियो को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर सत्याम राज नामक उपयोगकर्ता ने साझा किया, जिन्होंने कैप्शन में लिखा: “मधुबनी, बिहार के जयनगर से हिमालय की भव्य झलक।” यह वीडियो सुबह के समय रिकॉर्ड किया गया, जब सूर्य की पहली किरणों से चोटियां चमक उठीं। दृश्य में बर्फीली चोटियां धुंध से मुक्त आकाश में उभरी हुई नजर आ रही हैं, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। सत्याम राज ने बताया कि बारिश के बाद हवा की शुद्धता ने प्रदूषण की परत को हटा दिया, जिससे यह संभव हुआ। वीडियो ने मात्र 24 घंटों में 20 लाख से अधिक व्यूज हासिल कर लिए हैं, और हजारों शेयर और लाइक्स प्राप्त किए हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, जयनगर से हिमालय का यह दृश्य सूर्योदय पर तांबे से सोने और चांदी तक रंग बदलता है, जबकि सूर्यास्त पर चांदी से सोने और कांस्य तक। एक बुजुर्ग निवासी ने कहा, “यह दृश्य हमें नेपाल के हिमालय से जोड़ता है। हमारा कस्बा नेपाल की एकमात्र रेल लाइन का प्रारंभिक स्टेशन भी है, जहां जनकपुर से यात्री आते हैं।”
वैज्ञानिक कारण और मौसम की भूमिका:
यह दुर्लभ घटना मुख्य रूप से मौसम संबंधी कारकों पर निर्भर करती है। हाल की भारी वर्षा ने क्षेत्र में धुंध और प्रदूषण को साफ कर दिया, जिससे हवा की दृश्यता (विजिबिलिटी) 200 किलोमीटर से अधिक हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य दिनों में वायु प्रदूषण और नमी की परतें हिमालय को छिपा लेती हैं, लेकिन साफ मौसम में मैप पर जयनगर सीधे एवरेस्ट के लाइन में पड़ता है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी ने कहा, “ऐसी स्पष्टता शीतकालीन महीनों में अधिक होती है, जब वायु शुष्क रहती है।”
ऐतिहासिक रूप से, 19वीं शताब्दी में ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिक सर्वे ऑफ इंडिया के सर्वेक्षकों को भी बिहार से हिमालय की झलक मिलती थी। आधुनिक समय में, यह दृश्य 2020 के कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी देखा गया था, जब प्रदूषण स्तर 50 प्रतिशत से अधिक गिर गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण से ऐसी घटनाएं और दुर्लभ हो रही हैं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं और वायरल प्रभाव:
वीडियो की वायरलता ने इंटरनेट पर एक तूफान ला दिया। एक्स पर उपयोगकर्ताओं ने इसे “दुर्लभ दृश्य” और “प्रकृति का चमत्कार” कहा। एक यूजर ने लिखा, “माउंट एवरेस्ट 8.8 किमी ऊंचा है। हवाई जहाज 8-10 किमी ऊंचाई पर उड़ते हैं, और अंतरिक्ष 100 किमी पर शुरू होता है। यह वाकई अद्भुत है।” एक अन्य ने कहा, “ये हिमालय हमेशा वहां हैं, लेकिन प्रदूषण उन्हें छिपा लेता है। साफ हवा का महत्व समझ आ गया।” एक तीसरे यूजर ने लिखा, “वाह, बिहार से हिमालय? कभी कल्पना भी नहीं की।”
कई उपयोगकर्ताओं ने चोटियों को लेबल करते हुए तस्वीरें साझा कीं, जो वीडियो को और स्पष्ट बनाती हैं। एक पोस्ट में लिखा गया, “यह दृश्य वसंत पंचमी से होली और दुर्गा पूजा से कार्तिक पूर्णिमा तक सबसे अच्छा दिखता है।” वायरल वीडियो ने पर्यटन को बढ़ावा देने की चर्चा भी छेड़ दी। एक यूजर ने सुझाव दिया, “यदि नेपाल भारत का हिस्सा होता, तो जयनगर, जोगबनी, रक्सौल जैसे इलाके पर्यटन केंद्र बन जाते।” कुल मिलाकर, यह वीडियो पर्यावरण जागरूकता का माध्यम भी बन गया है, जहां लोग साफ हवा की मांग कर रहे हैं।
जयनगर का महत्व और पर्यटन संभावनाएं:
जयनगर न केवल एक सीमावर्ती कस्बा है, बल्कि सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह नेपाल की जनकपुर से जुड़ा रेलवे स्टेशन है, जहां रोजाना सैकड़ों यात्री आते-जाते हैं। कस्बे की ऊंची इमारतों और कमला नदी के बैराज से हिमालय का दृश्य सबसे स्पष्ट दिखता है। स्थानीय प्रशासन ने इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है, ताकि पर्यटक इस दुर्लभ दृश्य का आनंद ले सकें। एक स्थानीय अधिकारी ने कहा, “यह प्राकृतिक आकर्षण बिहार को हिमालयी पर्यटन से जोड़ सकता है।”
यह घटना बिहार के सितामढ़ी जिले के सिंहवाहिनी गांव की याद दिलाती है, जहां 2020 में भी एवरेस्ट दिखाई दिया था। वहां की मुखिया रितु जायसवाल ने तस्वीर साझा की थी, जो दशकों बाद की घटना बताई गई थी।
निष्कर्ष: प्रकृति की याद दिलाने वाला संदेश
यह दुर्लभ दृश्य न केवल बिहारवासियों के लिए आश्चर्य का विषय है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की अपील भी करता है। साफ हवा और स्पष्ट आकाश के बिना ऐसी सुंदरता असंभव है। जैसे-जैसे वीडियो की लोकप्रियता बढ़ रही है, उम्मीद है कि यह पर्यटन को बढ़ावा देगा और प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करेगा। जयनगर के निवासी इसे “ईश्वरीय दर्शन” बता रहे हैं, जो प्रकृति की महानता को स्मरण कराता है। यदि मौसम अनुकूल रहा, तो आने वाले दिनों में यह दृश्य फिर दिख सकता है, लेकिन फिलहाल यह वीडियो लाखों लोगों के लिए एक अविस्मरणीय स्मृति बन चुका है।
