by-Ravindra Sikarwar
दिल्ली की एक छात्रा ने हॉस्टल स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा का कहना है कि बलात्कार की शिकायत करने पर स्टाफ ने असंवेदनशील व्यवहार किया और कहा, “लड़कियों के कई बॉयफ्रेंड होते हैं, जाकर नहा लो।” मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की है।
पूरा लेख:
दिल्ली की एक कॉलेज छात्रा ने अपने साथ हुए कथित बलात्कार के बाद संस्थान और हॉस्टल प्रशासन पर असंवेदनशील रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। छात्रा के अनुसार, जब उसने हॉस्टल स्टाफ को इस घटना की जानकारी दी, तो उन्होंने उसकी मदद करने के बजाय शर्मनाक टिप्पणी की और कहा — “लड़कियों के तो कई बॉयफ्रेंड होते हैं, जाकर नहा लो और चुप रहो।”
छात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह दिल्ली के एक निजी विश्वविद्यालय में पढ़ती है और कैंपस के भीतर ही हॉस्टल में रहती है। उसने लिखा कि हॉस्टल परिसर में उसके साथ एक व्यक्ति ने जबरन शारीरिक संबंध बनाए। जब वह मदद के लिए वार्डन और स्टाफ के पास गई, तो उसे समर्थन देने के बजाय ताने दिए गए और उसकी बात को हल्के में लिया गया।
छात्रा ने बताया, “मैं डर के मारे कांप रही थी। जब मैंने बताया कि मेरे साथ जबरदस्ती हुई है, तो उन्होंने कहा कि ‘तुम लड़कियां खुद ही लड़कों को बुलाती हो, फिर ऐसे ड्रामे करती हो।’ उन्होंने मुझे मेडिकल जांच कराने से भी रोका और कहा कि जाकर नहा लो, सब ठीक हो जाएगा।”
सोशल मीडिया पर यह पोस्ट वायरल होते ही लोगों में आक्रोश फैल गया। कई उपयोगकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन और हॉस्टल प्रबंधन के रवैये की निंदा की और छात्रा को न्याय दिलाने की मांग की।
दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने भी इस घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय और पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि “यदि छात्रा का बयान सही है तो यह बेहद शर्मनाक और संवेदनहीन व्यवहार है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
पुलिस के अनुसार, पीड़िता के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और मेडिकल जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसकी तलाश जारी है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि हॉस्टल स्टाफ ने क्यों पीड़िता की मदद करने के बजाय उसे चुप रहने की सलाह दी।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं कि क्या कॉलेज और हॉस्टल परिसर वास्तव में छात्राओं के लिए सुरक्षित हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संस्थानों को संवेदनशीलता प्रशिक्षण देना आवश्यक है ताकि पीड़ितों को न्याय और सहायता मिल सके, न कि अपमान।
