Ramayan Temple: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में केसरिया (कैथवलिया) स्थित निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में एक महत्वपूर्ण धार्मिक घटना होने जा रही है। 17 जनवरी 2026 को दुनिया का सबसे बड़ा सहस्त्रलिंगम शिवलिंग यहां विधि-विधान से स्थापित किया जाएगा। यह ब्लैक ग्रेनाइट से बनी एकल शिला है, जो तमिलनाडु के महाबलीपुरम से लाई गई है। इस विशाल शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट, परिधि भी 33 फीट और वजन लगभग 210 टन है। इसकी सतह पर 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं, जिससे इसका अभिषेक 1008 शिवलिंगों के समान माना जाता है।

Ramayan Temple: शिवलिंग की अनोखी यात्रा
यह विशाल संरचना महाबलीपुरम से करीब 45 दिनों की लंबी यात्रा के बाद बिहार पहुंची है। यह यात्रा लगभग 2500 किलोमीटर लंबी रही, जिसमें तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से गुजरना पड़ा। विशेष रूप से डिजाइन किए गए 96 पहियों वाले ट्रक से इसे परिवहन किया गया। गोपालगंज होते हुए यह केसरिया पहुंचा, जहां भक्तों ने भक्ति भाव से इसका स्वागत किया। इस दौरान कई जगहों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और पूजा-अर्चना हुई।
मंदिर परिसर की भव्यता और महत्व
विराट रामायण मंदिर महावीर मंदिर न्यास (पटना) द्वारा बनाया जा रहा है, जो स्वर्गीय आचार्य किशोर कुणाल का सपना था। यह परिसर लगभग 120 एकड़ में फैला होगा, जिसमें मुख्य मंदिर के अलावा 22 अन्य मंदिर और कुल 18 शिखर होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी। मंदिर रामायण की घटनाओं को दर्शाने वाली भित्तिचित्रों से सजा होगा और एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बनेगा। यह शिवलिंग परिसर में पहले पूर्ण होने वाले शिव मंदिर का हिस्सा है, जबकि पूरी प्राण-प्रतिष्ठा मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद होगी।
स्थापना समारोह की तैयारियां
17 जनवरी (माघ कृष्ण चतुर्दशी) को होने वाला यह आयोजन धार्मिक दृष्टि से बहुत खास है, क्योंकि यह तिथि शिवरात्रि के समान पवित्र मानी जाती है। सुबह 8:30 बजे से पूजा शुरू होगी और दोपहर तक स्थापना पूरी हो जाएगी। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, पीठ पूजा और पांच पवित्र स्थलों (कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, सोनपुर) से लाए जल से अभिषेक होगा। हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की भी योजना है, जो वातावरण को और आध्यात्मिक बनाएगी।
प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था
इस भव्य आयोजन को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मंदिर परिसर का दौरा किया और भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा तथा यातायात की व्यवस्था पर विस्तृत निर्देश दिए हैं। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
यह घटना न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की है, जो भारतीय शिल्पकला, आस्था और एकता का प्रतीक बनेगी।

